
मनीपुर मंदिर विवाद में पुलिस की भूमिका पर सवाल-मंदिर की जमीन का विवाद या समझौते का दबाव छह माह से थाने की दौड़ के बाद पुलिस अधीक्षक की चौखट पर पहुंचा पीड़ित गाजीपुर थाना क्षेत्र के मनीपुर में कब्जे का आरोप, दबंगों के द्वारा धमकी-गाली गलौज का दावा पुलिस की मौजूदगी में विवाद के आरोप ने बढ़ाई हलचल-
फतेहपुर। थाना गाजीपुर क्षेत्र के ग्राम सभा मनीपुर में मंदिर और जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब ऐसा मोड़ ले चुका है, जहां सवाल केवल जमीन का नहीं, बल्कि छह महीने से शिकायत लेकर थाने पहुंच रहे पीड़ित को कथित तौर पर न्याय क्यों नहीं मिला, इसका भी है। शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक के सामने पहुंचकर अपनी फरियाद रखी है और थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि वह महीनों से थाना पुलिस के चक्कर काट रहा है, लेकिन विवाद का स्थायी समाधान कराने के बजाय उसे कथित रूप से समझौते की ओर धकेला जाता रहा।शिकायतकर्ता के मुताबिक उसका मकान मंदिर के पास है और मंदिर से जुड़ी जमीन को लेकर विपक्षी पक्ष के साथ विवाद चल रहा है। पीड़ित का आरोप है कि विपक्षी पक्ष जमीन पर कब्जे का प्रयास कर रहा है। विरोध करने पर कथित रूप से गाली-गलौज की जाती है और जान से मारने की धमकी दी जाती है। पीड़ित के अनुसार, लगातार तनाव के बावजूद विवाद का ऐसा समाधान नहीं निकल सका जिससे उसे सुरक्षा और न्याय का भरोसा हो।छह महीने में न्याय नहीं तो सवाल थाना पुलिस पर ही उठेंगे पीड़ित का कहना है कि उसने एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार करीब छह महीने तक थाना गाजीपुर का दरवाजा खटखटाया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे उम्मीद थी कि पुलिस मामले की तह तक जाएगी, दोनों पक्षों की बात सुनेगी और जमीन की वास्तविक स्थिति सामने लाएगी।लेकिन आरोप है कि कार्रवाई की दिशा में बढ़ने के बजाय समझौते की कोशिश होती रही।यहीं से मामला गंभीर हो जाता है।जब कोई व्यक्ति छह महीने तक थाने के चक्कर काटने के बाद भी संतुष्ट न हो और अंततः एसपी के सामने शिकायत लेकर पहुंचे, तो सवाल उठना लाजिमी है कि थाना स्तर पर उसकी शिकायत का निस्तारण आखिर किस तरीके से किया गया?पांच फीट रास्ते की बात ने खड़े कर दिए कईसवालपीड़ित का सबसे अहम आरोप यह है कि पुलिस ने विवाद के कानूनी समाधान के बजाय कथित तौर पर समझौते का रास्ता अपनाया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे पांच फीट रास्ता देने की बात कही गई।लेकिन सवाल यह है कि पांच फीट रास्ता किस आधार पर?क्या जमीन की पैमाइश कराई गई?क्या राजस्व अभिलेखों की जांच हुई?क्या मौके पर सीमांकन कराया गया?क्या दोनों पक्षों की सहमति से लिखित समझौता हुआ?अगर इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं हैं तो यह मामला केवल समझौते से खत्म होने वाला नहीं है। जमीन और मंदिर से जुड़ा विवाद भविष्य में फिर न उभरे, इसके लिए वास्तविक स्थिति सामने आना जरूरी है।समझौता कराया, फिर भी विवाद वापस क्यों आया?शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व में समझौता कराया जा चुका है। बावजूद इसके विवाद खत्म नहीं हुआ।

आरोप है कि बाद में फिर गाली-गलौज और धमकी का दौर शुरू हो गया।अब सवाल यह भी है कि यदि समझौता विवाद का समाधान था तो उसके बाद फिर विवाद क्यों पैदा हुआ? क्या समझौते की शर्तों का पालन हुआ? क्या पुलिस ने दोबारा मौके की स्थिति देखी? क्या दोनों पक्षों को पाबंद करने या अन्य कानूनी कार्रवाई की जरूरत महसूस की गई?कहीं ऐसा तो नहीं कि विवाद को जड़ से खत्म करने के बजाय केवल तत्काल शांत कराने की कोशिश होती रही? यह शिकायतकर्ता का आरोप है, जिसकी पुष्टि जांच से ही हो सकेगी।पुलिस सामने, कथित धमकी जारी तो फिर कार्रवाई कहां?पीड़ित ने आरोप लगाया है कि कई बार पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ही विपक्षी पक्ष द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।यह आरोप सही है या नहीं, इसका फैसला जांच में होना है। लेकिन यदि पुलिस के सामने किसी व्यक्ति को कथित रूप से धमकी दी गई और फिर भी तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो पुलिस की भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। विवादित स्थल पर पुलिस मौजूद हो और उसी दौरान कथित रूप से माहौल बिगड़े तो यह जांच का विषय बन जाता है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए।ग्राम सभा में भी विवाद, पुलिसकर्मी पर अभद्र भाषा का आरोपशिकायतकर्ता ने ग्राम सभा में कई लोगों की मौजूदगी में विवाद होने का दावा किया है। आरोप है कि इसी दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया।यदि यह आरोप सामने आया है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है कि मौके पर कौन-कौन मौजूद था, विवाद की वास्तविक स्थिति क्या थी औरपुलिसकर्मी का व्यवहार कैसा रहा।पीड़ित का आरोप है कि जिस पुलिस से उसे सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी पुलिस की कार्यशैली को लेकर अब उसे अधिकारियों के सामने शिकायत करनी पड़ रही है।दो सिपाहियों के घर जाने का दावा, नाम सामने आने का इंतजार शिकायतकर्ता ने दो पुलिसकर्मियों के कथित रूप से उसके घर पहुंचने का भी दावा किया है। उसने कहा है कि संबंधित सिपाहियों के नाम और अन्य जानकारी वह जल्द सामने रखेगा। अब यह भी जांच का विषय है कि वे पुलिसकर्मी किस उद्देश्य से घर पहुंचे थे, क्या कोई आधिकारिक निर्देश था और उस दौरान क्या बातचीत हुई।मंदिर का मामला होने से बढ़ी मामला मंदिर और जमीन से जुड़ा है, इसलिए पुलिस के लिए निष्पक्षता और पारदर्शिता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जमीन की वास्तविक स्थितिदस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और मौके की जांच से स्पष्ट की जा सकती है।किसी भी पक्ष के आरोप को बिना जांच सही मानना उचित नहीं होगा। लेकिन शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा। यही वजह है कि अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ रही है।पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मंदिर और जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराने, कथित धमकी और गाली-गलौज के आरोपों पर नियमानुसार कार्रवाई करने तथा थाना पुलिस की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।मनीपुर का मामला अब कई सवाल छोड़ गया है छह महीने तक पीड़ित थाने के चक्कर क्यों लगाता रहा?शिकायतों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?पांच फीट रास्ते की बात किस आधार पर हुई?समझौते के बावजूद विवाद दोबारा क्यों हुआ?पुलिस की मौजूदगी में कथित धमकी हुई तो कार्रवाई क्या हुई पुलिसकर्मी पर अभद्र भाषा के आरोपों की जांच होगी या नहीं?दो सिपाहियों के घर जाने के आरोप की सच्चाई क्या है
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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