Created history : एशियन गेम्स में भारत का ऐतिहासिक निशाना : महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया के अजेय दुर्ग को ढहाकर जीता गोल्ड; 5-3 से रचा इतिहास ?

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Created history : एशियन गेम्स में भारत का ऐतिहासिक निशाना : महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया के अजेय दुर्ग को ढहाकर जीता गोल्ड; 5-3 से रचा इतिहास ?

हांगझोउ/नई दिल्ली।

भारतीय महिला तीरंदाजी ने एशियाई खेलों के मंच पर वह कर दिखाया जिसकी मिसाल दशकों तक दी जाएगी। अंकिता भकत, कीर्ति और कुमकुम अनिल मोहोड़ की जांबाज तिकड़ी ने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा के बेहद कड़े और रोमांचक फाइनल में विश्व तीरंदाजी की बेताज बादशाह मानी जाने वाली दक्षिण कोरियाई टीम को 5-3 से धूल चटाकर ऐतिहासिक स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। एशियाई खेलों के इतिहास में भारत का इस स्पर्धा में यह पहला गोल्ड मेडल है। भारतीय तिकड़ी ने फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया की स्टार तीरंदाजों—कांग चाययंग, ली युंजी और ओ येजिन को हर सेट में कड़ा मुकाबला देते हुए दबाव में ला खड़ा किया और सटीक निशानों के दम पर जीत दर्ज की।
पहली बार फाइनल में प्रवेश और सीधे ‘स्वर्ण’ पर कब्जा
एशियाई खेलों में भारतीय महिला रिकर्व टीम का यह सफर किसी सुनहरे ख्वाब से कम नहीं रहा:
ऐतिहासिक डेब्यू फाइनल: एशियाई खेलों के पूरे इतिहास में भारतीय महिला रिकर्व टीम इससे पहले कभी भी फाइनल मुकाबले तक नहीं पहुंच पाई थी।

Created history : एशियन गेम्स में भारत का ऐतिहासिक निशाना : महिला रिकर्व टीम ने दक्षिण कोरिया के अजेय दुर्ग को ढहाकर जीता गोल्ड; 5-3 से रचा इतिहास ?
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दबावमुक्त प्रदर्शन: पहली बार फाइनल का टिकट कटाने के बावजूद भारतीय खिलाड़ियों ने तनिक भी घबराहट नहीं दिखाई। सामने दक्षिण कोरिया जैसी टीम थी, जिसका तीरंदाजी में दबदबा दशकों से अटूट माना जाता है, लेकिन अंकिता, कीर्ति और कुमकुम ने सटीक निशानों से कोरियाई दीवार को भेद दिया।
क्या होती है रिकर्व तीरंदाजी?
तीरंदाजी खेल की दुनिया में रिकर्व धनुष का एक खास और प्रतिष्ठित स्थान है:
पारंपरिक स्वरूप का आधुनिक अवतार: रिकर्व बो दरअसल हजारों वर्षों से इस्तेमाल होते आ रहे पारंपरिक धनुष का ही वैज्ञानिक व आधुनिक स्वरूप है।
बनावट की खासियत: इस धनुष के ऊपरी और निचले सिरे (लिम्ब्स) तीरंदाज के शरीर से बाहर की ओर घूमे (कर्व) होते हैं। इसी विशेष मोड़ या घुमावदार बनावट के कारण इसे ‘रिकर्व’ नाम दिया गया है।
यह बनावट तीर को अत्यधिक गति, ऊर्जा और सटीक उड़ान प्रदान करने में मदद करती है, जहां हवा और दबाव के बीच मानसिक एकाग्रता का सबसे बड़ा इम्तिहान होता है।
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारतीय महिला तीरंदाजी दल ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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