
पिलखुवा/श्रीनगर।
कभी आतंकवाद और हिंसा की घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहने वाली कश्मीर घाटी में अब साहित्य, संस्कृति और शांति से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन सामाजिक बदलाव का संदेश दे रहा है। इसी क्रम में श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम के तत्वावधान में कश्मीर में भव्य काव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कवियों और साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, सामाजिक एकता, अमन और भाईचारे का संदेश दिया।
काव्य समारोह के दौरान वीर रस और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविताओं ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। कवियों की रचनाओं पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साह व्यक्त किया। कार्यक्रम में ‘मां भारती’ के जयकारों के साथ देश की एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई।
समारोह की अध्यक्षता श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि अशोक गोयल चक्रवर्ती ने की। कार्यक्रम में साहित्यकारों, समाजसेवियों और साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी रही। आयोजकों ने कहा कि साहित्य समाज को जोड़ने और सकारात्मक विचारों को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है।
साहित्य और संस्कृति के माध्यम से शांति का संदेश
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज में स्थायी शांति केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं, बल्कि लोगों के बीच संवाद, विश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव से मजबूत होती है। साहित्य लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने और भावनात्मक संबंध स्थापित करने का काम करता है।
अशोक गोयल चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में कहा कि “कल जहां बारूद की गूंज और बंदूकों का साया था, आज वहां अक्षरों की शक्ति और मां भारती का परचम लहराता दिखाई दे रहा है।” उन्होंने कहा कि साहित्यकारों का दायित्व केवल कविता लिखना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाना भी है।
उन्होंने कहा कि कश्मीर की धरती पर साहित्यिक आयोजन का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि शांति, भाईचारे और देश की एकता का संदेश देना है। साहित्य के माध्यम से युवाओं को रचनात्मक दिशा देने की आवश्यकता है।
प्रमुख अतिथियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में वरिष्ठ कवयित्री बीना गोयल, राष्ट्रीय प्रभारी, श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था, अयोध्या धाम का विशेष सानिध्य रहा। वहीं समाजसेवी एवं प्रबुद्ध विचारक अनिल गोयल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सुधीर बंसल विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम का हिस्सा बने।
अतिथियों ने साहित्यकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि देश की विभिन्न भाषाओं और क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकार जब एक मंच पर आकर राष्ट्रप्रेम और शांति की बात करते हैं तो इससे सामाजिक एकता को मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने कहा कि भारत की साहित्यिक परंपरा सदैव समाज को जोड़ने वाली रही है। कविता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर सामाजिक जागरूकता तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भी साहित्यकार अपनी रचनाओं के माध्यम से युवाओं और समाज को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।
देशभर से पहुंचे कवि और कवयित्रियां
कश्मीर में आयोजित इस साहित्यिक समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से अनेक कवि और कवयित्रियां शामिल हुए। मंच पर अशोक गोयल चक्रवर्ती, बीना गोयल, मंजू गुप्ता, कुमकुम वशिष्ठ, मधु चौबे, दीपा शर्मा, डॉ. अशोक गुप्ता, डॉ. शशि किरण गुप्ता, डॉ. संजय जैन, महेंद्र शर्मा, प्रमोद गर्ग, रामनाथ चौबे, सुनील कुमार शर्मा, उर्मिल गोयल, योगेंद्र अग्रवाल, प्रतीक भारद्वाज, उमेश और इंदु सहित अन्य रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कवियों ने वीर रस, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सौहार्द और अमन से जुड़ी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं ने कविताओं को ध्यानपूर्वक सुना और कई प्रस्तुतियों पर तालियों से कवियों का उत्साह बढ़ाया।
कवयित्रियों ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता, नारी शक्ति, सामाजिक एकता और मानवीय संवेदनाओं को स्वर दिया। कार्यक्रम में कविता पाठ के दौरान साहित्य और राष्ट्रप्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला।

‘बंदूकों पर भारी शब्दों की ताकत’
समारोह में वक्ताओं ने साहित्य की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि शब्द समाज की सोच बदलने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुसार, जहां हिंसा और भय समाज को बांटते हैं, वहीं साहित्य संवाद और संवेदना के माध्यम से लोगों को जोड़ सकता है।
वक्ताओं ने कहा कि कश्मीर में आयोजित साहित्यिक कार्यक्रम केवल एक काव्य आयोजन नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के बीच सांस्कृतिक संवाद का अवसर भी है। देश के विभिन्न राज्यों से आए साहित्यकारों ने कश्मीर की धरती पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर यह संदेश देने का प्रयास किया कि साहित्य की कोई सीमा नहीं होती।
उन्होंने कहा कि युवाओं को सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। शिक्षा, साहित्य, कला, खेल और रोजगार के अवसर युवाओं को रचनात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बदलते कश्मीर में साहित्य की भूमिका
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कश्मीर में हो रहे सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी क्षेत्र की वास्तविक पहचान वहां के लोगों की संस्कृति, कला, साहित्य और परंपराओं से होती है। कश्मीर की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए ऐसे कार्यक्रम उपयोगी हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर की नई पीढ़ी को देश के अन्य हिस्सों के युवाओं और साहित्यकारों से संवाद के अवसर मिलने चाहिए। इससे आपसी समझ और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिल सकता है।
आयोजकों ने कहा कि श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था का प्रयास साहित्य को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का है। संस्था के माध्यम से देश के विभिन्न क्षेत्रों में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और रचनाकारों को मंच प्रदान किया जा रहा है।
राष्ट्रप्रेम के साथ अमन का संदेश
काव्य समारोह में राष्ट्रप्रेम के साथ-साथ शांति और भाईचारे पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि राष्ट्रप्रेम का अर्थ समाज में सद्भाव, जिम्मेदारी और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है।
कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया। वीर रस की कविताओं के साथ अमन और भाईचारे से जुड़ी रचनाओं ने कार्यक्रम को विविध रंग प्रदान किए।
कार्यक्रम में मौजूद साहित्य प्रेमियों ने कहा कि कश्मीर जैसे क्षेत्र में देश के विभिन्न हिस्सों के साहित्यकारों का एक मंच पर आना सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे साहित्य के माध्यम से संवाद और सकारात्मक वातावरण बनाने का अवसर मिलता है।
साहित्यकारों ने लिया सकारात्मक संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों और साहित्यकारों ने साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, शांति, भाईचारा और राष्ट्रीय एकता का संदेश आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि कविताएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज की भावनाओं और विचारों को दिशा देने का कार्य भी करती हैं।
अशोक गोयल चक्रवर्ती ने कहा कि साहित्यकारों को अपनी कलम के माध्यम से समाज में आशा, विश्वास और एकता का वातावरण तैयार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कश्मीर की धरती पर आयोजित यह साहित्यिक आयोजन इसी सोच का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी साहित्य और संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों को अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा, ताकि देश के विभिन्न हिस्सों के साहित्यकार और नागरिक एक-दूसरे से जुड़ सकें।
इस काव्य समारोह ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि साहित्य संवाद का माध्यम है और संवाद से शांति एवं सामाजिक जुड़ाव को मजबूती मिल सकती है। कश्मीर की धरती पर देशभर से आए कवियों की प्रस्तुतियों और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविताओं ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। समारोह का समापन साहित्य, शांति, भाईचारे और देश की एकता के संदेश के साथ हुआ।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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