
फतेहपुर।
जिले में अंतर्जनपदीय ओवरलोडिंग और खनिज के कथित अवैध परिवहन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि शाम होते ही बांदा जिले की ओर से मोरंग से लदे बड़ी संख्या में खनिज वाहन फतेहपुर की सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक मोरंग लदी होती है और कुछ वाहन बिना नंबर प्लेट, कंडम हालत या आवश्यक खनन एवं राजस्व प्रपत्रों के बिना ही परिवहन कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि खागा तहसील के किशनपुर थाना क्षेत्र से होकर बांदा जिले से फतेहपुर की ओर मोरंग के वाहनों का आवागमन लगातार जारी है। आरोप है कि बांदा जिले के विभिन्न मोरंग भंडारण केंद्रों से खनिज लेकर वाहन दादों-किशनपुर यमुना पुल के रास्ते फतेहपुर जनपद में प्रवेश करते हैं। इसके बाद किशनपुर-खागा मार्ग और विजयीपुर-धाता सहित प्रमुख मार्गों से होकर इन वाहनों का आवागमन होता है।
शाम होते ही बढ़ जाता है वाहनों का आवागमन
स्थानीय लोगों के मुताबिक दिन की अपेक्षा शाम ढलने के बाद मोरंग लदे वाहनों की आवाजाही में तेजी देखने को मिलती है। आरोप है कि बड़ी संख्या में भारी वाहन एक के बाद एक सड़कों से गुजरते हैं। इनमें कई वाहन ओवरलोड बताए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी और ओवरलोड वाहनों के लगातार आवागमन से सड़कों पर दबाव बढ़ता है। इससे सड़क की स्थिति प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। ग्रामीण और राहगीर ऐसे वाहनों की गति और संख्या को लेकर चिंता जताते हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। यदि वाहनों में वास्तव में निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लदा पाया जाता है या आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलते हैं तो संबंधित विभागों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
बिना प्रपत्र परिवहन के लगाए जा रहे आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप खनन एवं राजस्व से संबंधित दस्तावेजों को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि कुछ खनिज वाहन बिना वैध खनन राजस्व प्रपत्रों के ही मोरंग का परिवहन कर रहे हैं। इसके अलावा कुछ वाहनों के कंडम हालत में होने और बिना नंबर प्लेट सड़क पर दौड़ने की भी शिकायतें सामने आ रही हैं।
खनिज परिवहन के दौरान आवश्यक दस्तावेज और वाहन संबंधी कागजात का होना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में यदि कोई वाहन बिना वैध दस्तावेज के खनिज लेकर चलता पाया जाता है तो संबंधित विभाग के स्तर से उसकी जांच और कार्रवाई की जा सकती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि खनिज परिवहन करने वाले वाहनों की नियमित जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लेकर कोई वाहन सड़कों पर न दौड़े।
बांदा से फतेहपुर पहुंचते हैं मोरंग लदे वाहन
बताया जा रहा है कि इस कथित अवैध परिवहन का मुख्य मार्ग बांदा और फतेहपुर के बीच का क्षेत्र है। आरोप है कि बांदा जिले के विभिन्न मोरंग भंडारण केंद्रों से वाहन मोरंग लेकर दादों-किशनपुर यमुना पुल के रास्ते फतेहपुर में प्रवेश करते हैं।
इसके बाद किशनपुर क्षेत्र से होकर खागा तथा अन्य इलाकों की ओर वाहनों का आवागमन बताया जा रहा है। किशनपुर-खागा मार्ग और विजयीपुर-धाता मार्ग पर भी ऐसे वाहनों की आवाजाही होने के आरोप लगाए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से वाहनों की जांच की जाए तो ओवरलोडिंग और दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि परिवहन किए जा रहे खनिज की मात्रा और उससे संबंधित राजस्व प्रपत्र नियमानुसार हैं या नहीं।
किशनपुर थाना क्षेत्र पर उठ रहे सवाल
फतेहपुर की खागा तहसील के किशनपुर थाना क्षेत्र को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्र से होकर लगातार अंतर्जनपदीय खनिज परिवहन हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय भारी संख्या में मोरंग लदे वाहनों की आवाजाही के बावजूद प्रभावी निगरानी की जरूरत है।
लोगों का कहना है कि यदि वाहनों की नियमित चेकिंग की जाए तो ओवरलोडिंग, बिना नंबर प्लेट चलने वाले वाहनों और आवश्यक कागजात के अभाव जैसी स्थिति सामने आ सकती है। इसके अलावा वाहनों की फिटनेस और अन्य जरूरी दस्तावेजों की भी जांच की जानी चाहिए।
हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से इन आरोपों को लेकर क्या कार्रवाई की गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकती है।

खनन, परिवहन और राजस्व विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
खनिज के वैध परिवहन की निगरानी में खनन विभाग के साथ परिवहन और राजस्व विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि तीनों विभाग आपसी समन्वय के साथ अभियान चलाकर वाहनों की जांच करें।
यदि कोई वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लेकर चलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इसी तरह बिना वैध दस्तावेज, बिना नंबर प्लेट या अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की भी जांच जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित विभागों की कार्रवाई सीमित रहने के कारण ओवरलोडिंग का खेल लगातार जारी है। लोगों का कहना है कि यदि नियमित और प्रभावी कार्रवाई हो तो इस प्रकार के परिवहन पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
डीएम के निर्देशों के पालन पर भी सवाल
खनिज के अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समय-समय पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि सड़कों पर बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद कथित तौर पर ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन का सिलसिला पूरी तरह नहीं रुक पा रहा है। लोगों का कहना है कि केवल कभी-कभार कार्रवाई करने के बजाय लगातार निगरानी और चेकिंग अभियान चलाने की जरूरत है।
विशेष रूप से शाम और रात के समय प्रमुख मार्गों पर जांच बढ़ाए जाने की मांग की जा रही है, क्योंकि आरोप है कि इसी दौरान बड़ी संख्या में मोरंग लदे वाहन आवागमन करते हैं।
सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंता
ओवरलोड वाहनों का मामला केवल राजस्व या खनन नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध सड़क सुरक्षा से भी है। भारी वाहनों के ओवरलोड होने की स्थिति में वाहन के नियंत्रण, ब्रेकिंग और सड़क पर संचालन से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां सड़क पर अन्य छोटे वाहन, दोपहिया और पैदल यात्री भी चलते हैं, वहां भारी वाहनों की सुरक्षित आवाजाही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किशनपुर-खागा तथा विजयीपुर-धाता मार्ग पर नियमित जांच से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है। साथ ही सड़कों पर चलने वाले वाहनों के कागजात, फिटनेस, नंबर प्लेट और खनिज से संबंधित प्रपत्रों की भी जांच की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
फिलहाल फतेहपुर में बांदा से आने वाले मोरंग लदे वाहनों को लेकर स्थानीय स्तर पर कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। ओवरलोडिंग, बिना वैध प्रपत्र परिवहन, कंडम वाहन और बिना नंबर प्लेट वाहनों के संचालन जैसे आरोपों की वास्तविकता संबंधित विभागों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो खनन, परिवहन और राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से कार्रवाई की जा सकती है। वहीं प्रशासन की ओर से प्रभावी निगरानी होने पर यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कौन से वाहन वैध दस्तावेजों के साथ खनिज परिवहन कर रहे हैं और किन वाहनों द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
फिलहाल किशनपुर थाना क्षेत्र और इससे जुड़े प्रमुख मार्गों पर मोरंग लदे वाहनों की आवाजाही को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा बनी हुई है। लोगों की मांग है कि प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराए, निर्धारित क्षमता से अधिक खनिज लाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि बिना वैध दस्तावेज कोई भी वाहन खनिज का परिवहन न कर सके।
ऐसे में अब निगाहें खनन, परिवहन और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के साथ-साथ ओवरलोडिंग और अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने की जरूरत होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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