
बुलंदशहर
बुलंदशहर में दुकानदारों को फर्जी डिजिटल पेमेंट का स्क्रीनशॉट दिखाकर सामान लेकर फरार होने वाले एक गिरोह का थाना खुर्जा देहात पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने बुधवार को अभिसूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए गांव बहोरावास के पास से गिरोह के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों के पास से फर्जी पेमेंट के जरिए खरीदा गया सामान, नकदी, मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल कार बरामद की गई है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ऐसे दुकानदारों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, जो केवल पेमेंट का स्क्रीनशॉट देखकर सामान ग्राहकों को सौंप देते हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी अपने मोबाइल फोन में फोन-पे के लोगो वाली एक फर्जी एप रखते थे। इस एप की मदद से किसी भी दुकानदार के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दुकानदार के खाते का नाम और अन्य डिटेल दिखाई देती थी। इसके बाद आरोपी इसी फर्जी एप के माध्यम से सफल भुगतान का ऐसा स्क्रीनशॉट तैयार कर दुकानदार को दिखाते थे, जिससे उसे लगता था कि उसके खाते में भुगतान पहुंच चुका है।
आरोपियों के इस तरीके का सबसे अहम हिस्सा यही था कि दुकानदार वास्तविक बैंक या पेमेंट एप में रकम आने की पुष्टि किए बिना स्क्रीनशॉट देखकर सामान सौंप देता था। आरोपी सामान लेने के बाद वहां से निकल जाते थे। बाद में जब दुकानदार अपने खाते की जांच करता था तो पता चलता था कि उसके खाते में कोई रकम जमा ही नहीं हुई।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही जुटा लेते थे जानकारी
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल में फोन-पे का फर्जी लोगो लगी एक एप थी। इस एप से किसी भी दुकान पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर दुकानदार के खाते का नाम और संबंधित डिटेल सामने आ जाती थी। इसके बाद आरोपी फर्जी भुगतान दिखाने के लिए उसी एप का इस्तेमाल करते थे।
गिरोह के सदस्य पहले दुकान पर ग्राहक बनकर पहुंचते थे। अपनी जरूरत का सामान पसंद करने के बाद भुगतान करने की बात कहते थे। इसके बाद दुकानदार से क्यूआर कोड स्कैन कराया जाता या आरोपी स्वयं क्यूआर कोड स्कैन कर लेते थे। फर्जी एप में भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मोबाइल स्क्रीन पर सफल भुगतान का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखा दिया जाता था।
दुकानदार को जब स्क्रीन पर भुगतान सफल दिखाई देता था तो वह आरोपियों पर विश्वास कर सामान दे देता था। सामान हाथ में आते ही आरोपी कार से मौके से फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने गाजियाबाद, बुलंदशहर और अन्य जिलों में भी इसी तरह दुकानदारों को निशाना बनाया।
दो घटनाओं का पुलिस ने किया खुलासा
पुलिस जांच में आरोपियों द्वारा हाल में की गई कम से कम दो घटनाओं का खुलासा हुआ है। आरोपियों ने 1 अक्टूबर 2026 को थाना ककोड़ क्षेत्र के कस्बा ककोड़ में स्थित एक सप्लीमेंट की दुकान पर पहुंचकर फर्जी फोन-पे एप से भुगतान दिखाया था। इसके बाद उन्होंने करीब 9,600 रुपये का सप्लीमेंट दुकान से लिया और बिना वास्तविक भुगतान किए वहां से फरार हो गए।
इस मामले में दुकानदार की शिकायत के आधार पर थाना ककोड़ में मुकदमा संख्या 352/26, धारा 318(4) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपियों की गतिविधियों और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे तरीके की जानकारी जुटाई।
इसी तरह 30 सितंबर 2026 को थाना खुर्जा देहात क्षेत्र के ग्राम अगौरा में स्थित बैट्री की दुकान पर भी आरोपियों ने इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी फोन-पे एप से भुगतान सफल होने का स्क्रीनशॉट दिखाया और दुकान से बैट्री लेकर फरार हो गए थे।
इस घटना के संबंध में थाना खुर्जा देहात में मुकदमा संख्या 305/26, धारा 318(4)/303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया था। दोनों मामलों की जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
बहोरावास के पास पुलिस ने दबोचा
पुलिस ने मिली अभिसूचना के आधार पर आरोपियों की तलाश तेज कर दी। इसी क्रम में थाना खुर्जा देहात पुलिस ने बुधवार को गांव बहोरावास के पास कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राजू चौहान पुत्र नीटू सिंह निवासी ग्राम ग्वारौली, थाना अरनिया, जनपद बुलंदशहर; करन पुत्र किशनपाल निवासी ग्राम बौरोली, थाना खुर्जा नगर, जनपद बुलंदशहर, हाल पता भड़ाना हाउस के पास थाना इंदिरापुरम, जनपद गाजियाबाद; योगेश तोमर पुत्र राम सिंह तोमर निवासी ग्राम ग्वारौली, थाना अरनिया, जनपद बुलंदशहर; तथा सन्नी राघव पुत्र मुकेश कुमार निवासी ग्राम भोजगढ़ी, थाना अरनिया, जनपद बुलंदशहर के रूप में हुई है।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने उनके द्वारा अपनाए जा रहे फर्जी डिजिटल पेमेंट के तरीके की जानकारी जुटाई। पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने किन-किन दुकानदारों को इसी तरीके से अपना शिकार बनाया और कितनी रकम के सामान की ठगी की गई।

नकदी और खरीदा गया सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से ठगी के जरिए खरीदी गई एक बैट्री, पांच सप्लीमेंट के डिब्बे और तीन जीन्स तथा तीन शर्ट बरामद की हैं। इसके अलावा आरोपियों के पास से 2,800 रुपये नकद, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई एक कार भी बरामद की गई है।
बरामद सामान को पुलिस ने मामले की जांच से जोड़ते हुए अपने कब्जे में लिया है। मोबाइल फोन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जा रहे हैं, क्योंकि आरोपियों के अनुसार इन्हीं मोबाइल में फर्जी पेमेंट एप का इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के जरिए गिरोह की गतिविधियों से जुड़े और तथ्य सामने लाने का प्रयास कर रही है।
दुकानदारों के लिए बड़ी चेतावनी
यह मामला डिजिटल भुगतान के दौर में दुकानदारों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी भी है। वर्तमान समय में अधिकांश दुकानों पर क्यूआर कोड के जरिए भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। ग्राहक द्वारा भुगतान किए जाने के बाद कई बार दुकानदार मोबाइल स्क्रीन पर दिखाए गए स्क्रीनशॉट या भुगतान की सूचना के आधार पर सामान सौंप देते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति फर्जी एप या एडिट किए गए स्क्रीनशॉट का इस्तेमाल करे तो दुकानदार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि केवल ग्राहक द्वारा दिखाए गए स्क्रीनशॉट के आधार पर भुगतान की पुष्टि न की जाए। दुकानदार को अपने बैंक खाते, बैंकिंग एप या वास्तविक पेमेंट प्राप्त होने की सूचना से रकम की पुष्टि करनी चाहिए। यदि भुगतान खाते में दिखाई नहीं देता है तो सामान ग्राहक को नहीं देना चाहिए।
पुलिस की कार्रवाई से गिरोह में हड़कंप
थाना खुर्जा देहात पुलिस की कार्रवाई के बाद फर्जी डिजिटल पेमेंट के जरिए ठगी करने वाले आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ है। पुलिस ने गिरफ्तार चारों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। वहीं, पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य संभावित मामलों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
बुलंदशहर के साथ-साथ गाजियाबाद और अन्य जिलों में इस तरीके से हुई घटनाओं को भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है। यदि जांच में अन्य घटनाओं में आरोपियों की संलिप्तता सामने आती है तो पुलिस उन मामलों में भी कार्रवाई कर सकती है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा के साथ साइबर और तकनीकी ठगी के तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। फर्जी एप के जरिए तैयार किया गया भुगतान स्क्रीनशॉट देखने में वास्तविक लग सकता है, लेकिन वास्तविक भुगतान तभी माना जाना चाहिए जब रकम दुकानदार के खाते में पहुंच जाए। पुलिस की कार्रवाई से जहां एक ओर फर्जी पेमेंट करने वाले गिरोह पर शिकंजा कसा है, वहीं दुकानदारों के लिए भी यह मामला डिजिटल लेनदेन में अतिरिक्त सावधानी बरतने का संदेश देता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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