
महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर, स्वयं सहायता समूहों तथा कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने का किया आह्वान
हापुड़।
महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने, उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने तथा उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को ग्राम पीर सूदना में मिशन शक्ति 6.0 के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में महिला जागृति फाउंडेशन ने सहयोग किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं, महिला सुरक्षा से संबंधित हेल्पलाइन नंबरों, साइबर अपराध से बचाव तथा स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लाभों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करना तथा उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना रहा। इस दौरान महिलाओं को बताया गया कि जागरूकता, शिक्षा, कौशल विकास और सरकारी योजनाओं से जुड़कर वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। साथ ही बालिकाओं को भविष्य में रोजगार के अवसर प्राप्त करने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
महिला संबंधी सरकारी योजनाओं की दी जानकारी
कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर नेहा त्यागी ने महिलाओं को विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित महिला कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और जीवन में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना है।
नेहा त्यागी ने महिलाओं को समझाया कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए संबंधित विभागों की जानकारी होना आवश्यक है। कई बार जानकारी के अभाव में पात्र महिलाएं योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाती हैं। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर उनका लाभ उठाएं और अपने आसपास रहने वाली अन्य महिलाओं को भी इसके प्रति जागरूक करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों, सुरक्षा और सरकारी सुविधाओं के बारे में जानकारी होनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे संबंधित विभागों से सहायता प्राप्त कर सकें।
कार्यक्रम में महिलाओं को यह भी बताया गया कि किसी समस्या का सामना करने पर उन्हें चुप रहने के बजाय उचित सहायता प्राप्त करने के लिए संबंधित अधिकारियों और हेल्पलाइन सेवाओं से संपर्क करना चाहिए। जागरूकता के माध्यम से महिलाएं न केवल स्वयं को सशक्त बना सकती हैं, बल्कि परिवार और समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
महिला सुरक्षा हेल्पलाइन नंबरों के बारे में किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी विस्तारपूर्वक दी गई। महिलाओं को बताया गया कि आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता सेवाओं का उपयोग किस प्रकार किया जा सकता है। उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी, उत्पीड़न या असुरक्षा की स्थिति में उचित माध्यम से सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर नेहा त्यागी ने महिलाओं को हेल्पलाइन नंबरों की उपयोगिता समझाते हुए कहा कि इन नंबरों की जानकारी प्रत्येक महिला और बालिका के पास होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जागरूकता और समय पर सहायता प्राप्त करने से कई समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकता है।
उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे अपने परिवार की बेटियों और अन्य महिला सदस्यों को भी सुरक्षा संबंधी जानकारी दें। विशेष रूप से बालिकाओं को किसी भी संदिग्ध गतिविधि, उत्पीड़न अथवा परेशानी की स्थिति में उचित सहायता लेने के लिए जागरूक रहना चाहिए।
कार्यक्रम में महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर संबंधित विभागों से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया। आयोजकों ने कहा कि मिशन शक्ति जैसे जागरूकता कार्यक्रम महिलाओं को अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत बनाने और उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
साइबर अपराध से बचाव के बताए तरीके, 1930 हेल्पलाइन की दी जानकारी
डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए कार्यक्रम में साइबर अपराध से बचाव पर भी विशेष जोर दिया गया। महिलाओं और बालिकाओं को बताया गया कि मोबाइल फोन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और ऑनलाइन लेनदेन का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतना आवश्यक है। साइबर अपराधी कई बार लोगों को झांसा देकर उनकी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक संबंधी विवरण और धनराशि हासिल करने का प्रयास करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को सलाह दी गई कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, अनजान व्यक्ति को ओटीपी बताने या बिना सत्यापन के ऑनलाइन भुगतान करने से बचें। सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय भी सतर्क रहें।
नेहा त्यागी ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होती है, तो उसे जल्द से जल्द हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और उपलब्ध आधिकारिक माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से संबंधित एजेंसियों को मामले पर कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है।
महिलाओं और बालिकाओं को यह भी समझाया गया कि डिजिटल सुविधाओं का उपयोग करते समय जागरूकता बेहद जरूरी है। किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या ऑनलाइन गतिविधि को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी जांच करनी चाहिए। साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रत्येक महिला और बालिका के लिए उपयोगी है, क्योंकि डिजिटल जागरूकता उन्हें आर्थिक नुकसान और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसी समस्याओं से बचाने में मदद कर सकती है।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के लिए किया प्रेरित
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ने के लिए जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं को सामूहिक रूप से आगे बढ़ने, आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने और अपनी आजीविका के अवसर विकसित करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
महिलाओं को समूहों के माध्यम से उपलब्ध संभावनाओं के बारे में जानकारी देते हुए प्रोत्साहित किया गया कि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आर्थिक गतिविधियों से जुड़ें। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने, आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने और परिवार की आर्थिक स्थिति में योगदान देने के अवसर विकसित हो सकते हैं।
कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना समाज के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। जब महिलाएं रोजगार, स्वरोजगार और सामूहिक आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी करती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके परिवार और समुदाय पर भी पड़ता है।
महिलाओं से अपील की गई कि वे स्वयं सहायता समूहों की जानकारी प्राप्त करें और अन्य महिलाओं को भी इनसे जुड़ने के लिए प्रेरित करें। इस तरह सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।
बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण से जुड़ने के लिए किया प्रोत्साहित
कार्यक्रम में महिला जागृति फाउंडेशन के प्रोजेक्ट हेड अभिषेक मिश्रा ने भी बालिकाओं को संबोधित किया। उन्होंने उन्हें दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के अंतर्गत उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण युवाओं को रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करने में सहायक हो सकता है।
अभिषेक मिश्रा ने बालिकाओं को संस्था का भ्रमण करने और वहां उपलब्ध प्रशिक्षण एवं गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को अपने भविष्य के प्रति गंभीर रहते हुए शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में रोजगार प्राप्त करने के लिए शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल भी महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण के माध्यम से बालिकाएं अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकती हैं और भविष्य में रोजगार या स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं।
उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अवसर मिलने और उनका सही उपयोग करने से परिवार, समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम में महिलाओं और बालिकाओं को सामाजिक जागरूकता, आर्थिक सशक्तीकरण तथा कौशल विकास के महत्व से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना, अपने अधिकारों को समझना, सुरक्षा के प्रति सतर्क रहना और उपलब्ध प्रशिक्षण अवसरों का लाभ उठाना आवश्यक है।
इस अवसर पर डिस्ट्रिक्ट मिशन कोऑर्डिनेटर नेहा त्यागी और जेंडर स्पेशलिस्ट मुस्तकीम अहमद उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से ग्राम पीर सूदना की महिलाओं और बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक करने का प्रयास किया गया।
मिशन शक्ति 6.0 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में महिला सुरक्षा, सरकारी योजनाओं, साइबर अपराध से बचाव, स्वयं सहायता समूहों तथा कौशल प्रशिक्षण जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। आयोजकों ने महिलाओं और बालिकाओं से अपील की कि वे कार्यक्रम में मिली जानकारी को अपने जीवन में उपयोग करें और अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं।
कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को जागरूक बनाकर उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त करना तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी को बढ़ावा देना रहा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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