
हापुड़, 22 अक्टूबर 2026। जनपद हापुड़ में शिक्षा के साथ कला, संस्कृति और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), कोठी गेट में कला प्रदर्शनी एवं संस्कृति महोत्सव का आयोजन किया गया। समग्र शिक्षा के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना (आईएएस) ने की। कार्यक्रम में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। महोत्सव का शुभारंभ जिलाधिकारी ने दीप प्रज्वलित कर किया।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, हापुड़/गाजियाबाद की ओर से आयोजित इस जनपद स्तरीय महोत्सव का उद्देश्य शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों में कला, रचनात्मकता और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम में चित्रकला, मिट्टी कला, लोक नृत्य और संगीत से जुड़ी आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। शिक्षकों की प्रस्तुतियों ने भारतीय लोक संस्कृति की विविधता और कला की महत्ता को प्रदर्शित किया।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
गुरुवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, कोठी गेट, हापुड़ में आयोजित कला प्रदर्शनी एवं संस्कृति महोत्सव का शुभारंभ जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में कला और संस्कृति की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में जनपद के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने भाग लिया। महोत्सव के माध्यम से शिक्षकों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ ही शिक्षण प्रक्रिया में कला को शामिल करने के विभिन्न तरीकों को प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
आयोजन का उद्देश्य केवल कलात्मक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा को अधिक रोचक, प्रभावी और विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप बनाने के महत्व को भी सामने लाना रहा। कला के माध्यम से बच्चों की कल्पनाशक्ति, अभिव्यक्ति और सीखने की क्षमता को विकसित करने पर जोर दिया गया।
बच्चों के सर्वांगीण विकास में कला की अहम भूमिका: डीएम
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कला अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा, रचनात्मक सोच और व्यक्तित्व को विकसित करना भी है। कला बच्चों को अपनी भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करने का अवसर देती है।
उन्होंने कहा कि चित्रकला, संगीत, नृत्य और मिट्टी कला जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में रचनात्मकता को बढ़ावा देती हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चे नई चीजें सीखते हैं और अपनी क्षमताओं को पहचानने का अवसर प्राप्त करते हैं। इसलिए विद्यालयों में पढ़ाई के साथ-साथ कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी ने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे कला के माध्यम से शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बनाएं। जब विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलता है, तो उनकी विषयों के प्रति रुचि बढ़ सकती है। इससे सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज और आनंददायक बनाया जा सकता है।
लोक संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
जिलाधिकारी कविता मीना ने भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी लोक संस्कृति और कला को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी विविध परंपराओं, लोक कलाओं, संगीत और नृत्य में दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय बच्चों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को स्थानीय लोक कलाओं, पारंपरिक शिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी देकर उन्हें अपनी विरासत के प्रति जागरूक बना सकते हैं।
आज के बदलते समय में पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और संवर्धन बेहद महत्वपूर्ण है। इसके लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी को इन कलाओं से जोड़ने के प्रयास किए जाएं। कला प्रदर्शनी एवं संस्कृति महोत्सव जैसे आयोजन शिक्षकों को इस दिशा में प्रेरित करने के साथ-साथ सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।

शिक्षकों ने चित्रकला और मिट्टी कला से दिखाई प्रतिभा
महोत्सव में शिक्षकों द्वारा विभिन्न कलात्मक विधाओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। चित्रकला के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया। वहीं, मिट्टी कला की प्रस्तुतियों ने पारंपरिक शिल्प और हस्तकला की महत्ता को उजागर किया।
चित्रकला और मिट्टी कला जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों में एकाग्रता, धैर्य और सृजनात्मक सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से शिक्षक इन कलाओं को विद्यालयों में शिक्षण गतिविधियों के साथ जोड़ने के नए तरीके भी सीख सकते हैं।
कार्यक्रम में लोक नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां भी दी गईं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। शिक्षकों ने उत्साह के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और महोत्सव को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
शिक्षा को रचनात्मक बनाने का मिला संदेश
कला प्रदर्शनी एवं संस्कृति महोत्सव ने शिक्षा में रचनात्मक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि विद्यालयों में कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करके विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
शिक्षक बच्चों की प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि उन्हें कला, संगीत, नृत्य और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर दिया जाए, तो वे अपनी रुचियों और क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकते हैं।
समग्र शिक्षा के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव ने शिक्षकों को कला आधारित शिक्षण के महत्व से जोड़ने का अवसर प्रदान किया। साथ ही लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि शिक्षा के साथ कला और संस्कृति का समावेश बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे रचनात्मक गतिविधियों को शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाएं और भारतीय लोक संस्कृति की समृद्ध विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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