Poultry farm : हापुड़ के 50 प्रशिक्षणार्थी देशी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लेने बरेली रवाना, 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म खोलने में मिलेगी मदद ?

Poultry farm : हापुड़ के 50 प्रशिक्षणार्थी देशी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लेने बरेली रवाना, 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म खोलने में मिलेगी मदद
Poultry farm : हापुड़ के 50 प्रशिक्षणार्थी देशी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लेने बरेली रवाना, 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म खोलने में मिलेगी मदद

हापुड़

जनपद हापुड़ में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और देशी अंडा उत्पादन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी क्रम में सोमवार को जनपद के 50 इच्छुक प्रशिक्षणार्थियों को दो दिवसीय एक्सपोजर विजिट एवं प्रशिक्षण के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली स्थित राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र के लिए रवाना किया गया। प्रशिक्षणार्थियों से भरी बस को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हापुड़, जिला पंचायत राज अधिकारी हापुड़ एवं संयुक्त निदेशक, सदर हापुड़ ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

जिलाधिकारी महोदया की प्रेरणा एवं निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इच्छुक लाभार्थियों को देशी मुर्गी पालन की आधुनिक एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वे अपनी क्षमता और संसाधनों के अनुरूप पोल्ट्री फार्म स्थापित कर सकें। इस पहल से जनपद में स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ देशी अंडों के उत्पादन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र में मिलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण

जनपद से रवाना किए गए सभी 50 प्रशिक्षणार्थियों को राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र, इज्जतनगर, बरेली में दो दिवसीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोजर विजिट कराई जाएगी। इस दौरान लाभार्थियों को देशी मुर्गी पालन की प्रक्रिया, मुर्गियों की देखभाल, अंडा उत्पादन, फार्म प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से पालन करने से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी।

प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल लाभार्थियों को सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें पोल्ट्री फार्म संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी समझ भी उपलब्ध कराना है। इससे प्रशिक्षणार्थियों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि कम या मध्यम स्तर पर मुर्गी पालन का व्यवसाय किस प्रकार शुरू किया जा सकता है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करके इसे रोजगार का साधन कैसे बनाया जा सकता है।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को देशी मुर्गी पालन से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी क्षमता, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप पोल्ट्री फार्म स्थापित कराने में सहायता की जाएगी।

500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले फार्म खोलने में मिलेगी मदद

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि प्रशिक्षण के बाद इच्छुक लाभार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार 500 से 2000 मुर्गियों की संख्या वाले पोल्ट्री फार्म स्थापित कराने में मदद की जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिल सकता है।

योजना के अंतर्गत देशी मुर्गी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए केज-लेस यानी पिंजरे के बिना मुर्गियां पालने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही देशी अंडा उत्पादन के लिए छोटे-छोटे फार्म विकसित किए जाएंगे। विभागीय योजना के अनुसार, प्रशिक्षण के उपरांत डीप लिटर सिस्टम के माध्यम से भी फार्म स्थापित कराने की व्यवस्था की जाएगी।

डीप लिटर सिस्टम में मुर्गियों को फर्श पर बिछाई गई उपयुक्त बिछावन सामग्री के बीच रखा जाता है। इस व्यवस्था में साफ-सफाई, नमी नियंत्रण, उचित वेंटिलेशन और मुर्गियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षणार्थियों को इस तरह की व्यवस्थाओं की जानकारी मिलने से वे फार्म संचालन के दौरान बेहतर प्रबंधन कर सकेंगे।

उन्नत नस्ल की देशी लेयर मुर्गियों के चूजे होंगे उपलब्ध

जनपद में देशी अंडा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र के माध्यम से स्वदेशी उन्नत नस्ल की लेयर मुर्गियों के चूजे उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को देशी अंडा उत्पादन के लिए उपयुक्त मुर्गियां प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

देशी अंडों की मांग को देखते हुए यह पहल स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि लाभार्थी वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन करते हैं और फार्म का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करते हैं, तो इससे उनके लिए नियमित आय का अवसर विकसित हो सकता है।

हालांकि, पोल्ट्री फार्म की सफलता के लिए चूजों की उचित देखभाल, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, रोगों से बचाव, साफ-सफाई और बाजार तक पहुंच जैसे पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक होगा। प्रशिक्षण के माध्यम से लाभार्थियों को इन विषयों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

Poultry farm : हापुड़ के 50 प्रशिक्षणार्थी देशी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लेने बरेली रवाना, 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म खोलने में मिलेगी मदद
Poultry farm : हापुड़ के 50 प्रशिक्षणार्थी देशी मुर्गी पालन का प्रशिक्षण लेने बरेली रवाना, 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म खोलने में मिलेगी मदद

ईको एग्स कोऑपरेटिव लिमिटेड भी कर रही सहयोग

इस कार्यक्रम के संचालन में ईको एग्स कोऑपरेटिव लिमिटेड, बागपत की सुश्री रुबीना नितिन अय्यर द्वारा भी सहयोग किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों और सहयोगी संस्था के समन्वय से लाभार्थियों को प्रशिक्षण तथा आगे फार्म स्थापित करने की प्रक्रिया में सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

प्रशिक्षणार्थियों के साथ डॉ. मदन पाल सिंह एवं डॉ. आनंद गिल को विभागीय अधिकारी के रूप में समन्वयक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों अधिकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान लाभार्थियों के साथ रहकर आवश्यक समन्वय सुनिश्चित करेंगे। इससे प्रशिक्षणार्थियों को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने और संबंधित गतिविधियों में भाग लेने में सहायता मिलेगी।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओपी मिश्रा के अनुसार, यह पहल जिलाधिकारी महोदया की प्रेरणा एवं निर्देशन में आगे बढ़ाई जा रही है। इसका उद्देश्य इच्छुक लोगों को देशी मुर्गी पालन के क्षेत्र में प्रशिक्षित करके उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की पहल

हापुड़ जनपद से 50 प्रशिक्षणार्थियों को बरेली भेजने की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। देशी मुर्गी पालन ऐसा व्यवसाय है, जिसे उपयुक्त संसाधनों, तकनीकी जानकारी और बाजार की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग स्तरों पर शुरू किया जा सकता है।

प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों को अपनी क्षमता के अनुसार पोल्ट्री फार्म स्थापित करने में सहायता मिलने से स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर देशी अंडों का उत्पादन बढ़ने से उपभोक्ताओं को भी लाभ मिल सकता है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से पशुपालन विभाग का प्रयास है कि इच्छुक लाभार्थियों को प्रशिक्षण से लेकर फार्म स्थापित करने की दिशा में आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए। दो दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को देशी अंडा उत्पादन के लिए छोटे-छोटे फार्म विकसित करने में मदद दी जाएगी।

जनपद में इस पहल से देशी मुर्गी पालन को बढ़ावा मिलने, ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत विकसित होने और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। अब प्रशिक्षणार्थियों का ध्यान बरेली में मिलने वाले तकनीकी प्रशिक्षण और वहां से प्राप्त जानकारी को अपने क्षेत्र में लागू करने पर रहेगा।

जारीकर्ता: डॉ. ओपी मिश्रा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, हापुड़।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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