Case registered against : जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हंगामे के आरोप में सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज ?

Case registered against : जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हंगामे के आरोप में सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज
Case registered against : जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हंगामे के आरोप में सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज

नई दिल्ली।

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच विवाद गहरा गया है। आंदोलनकारी छात्रों को समर्थन देने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी और सांसद अब्दुल्ला समेत अन्य लोगों के खिलाफ कथित तौर पर बिना अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने और अशांति फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई के बाद छात्र आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी आंदोलन के समर्थन में कुछ सांसद और अन्य राजनीतिक नेता विश्वविद्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताया। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि संबंधित लोग बिना अनुमति परिसर में दाखिल हुए और उनके पहुंचने से वहां की स्थिति प्रभावित हुई। इस मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

2006 से नहीं हुए छात्रसंघ चुनाव, बहाली की मांग पर आंदोलन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांग है कि विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव कराने के लिए स्पष्ट समय-सारिणी घोषित की जाए। इसके अलावा, आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी छात्र प्रशासन से समाधान चाहते हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के चुनाव वर्ष 2005 में हुए थे और 2006 में छात्रसंघ को भंग कर दिया गया था। इसके बाद से चुनाव नहीं हुए हैं। लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच छात्र प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मौजूदा आंदोलन इसी मांग को लेकर शुरू हुआ, लेकिन समय के साथ इसमें प्रशासनिक कार्रवाई और परिसर में प्रदर्शन की अनुमति जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार मोहम्मद महताब आलम रिजवी की शिकायत के आधार पर 25 अक्टूबर को जामिया नगर थाने में एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कुछ राजनीतिक नेता बिना पूर्व अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचे और आंदोलन के दौरान परिसर की सामान्य व्यवस्था प्रभावित हुई।

शिकायत के मुताबिक, इमरान प्रतापगढ़ी पर 21 अक्टूबर को गेट नंबर 4ए का ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश करने का आरोप है। वहीं, इमरान मसूद पर 23 अक्टूबर को गफ्फार नगर के पास स्थित दीवार को सीढ़ी की मदद से पार कर परिसर में दाखिल होने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में अन्य बाहरी लोगों की मौजूदगी, विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कर्मचारियों के साथ कथित धक्का-मुक्की का भी उल्लेख किया गया है। ये सभी आरोप हैं, जिनकी पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

मामले में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का नाम भी सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, वह प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने विश्वविद्यालय जा रहे थे, तभी उन्हें हिरासत में लिया गया था और बाद में छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम ने छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने और परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया।

Case registered against : जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हंगामे के आरोप में सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज
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सांसदों का पक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया

सांसदों के विश्वविद्यालय पहुंचने का उद्देश्य आंदोलनकारी छात्रों से मुलाकात करना और उनकी मांगों के प्रति समर्थन जताना बताया गया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने परिसर में कथित अनधिकृत प्रवेश के आरोपों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने भी छात्रसंघ की बहाली की मांग का समर्थन किया है और छात्रों के साथ एकजुटता जताई है।

इस विवाद में विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के पक्ष अलग-अलग हैं। प्रशासन का कहना है कि परिसर में प्रवेश और विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है, जबकि छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले को देखना आवश्यक है।

प्रदर्शन के बीच ऑनलाइन कक्षाओं का फैसला

आंदोलन के दौरान परिसर में तनाव बढ़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं अगले आदेश तक ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का फैसला किया। प्रशासन का कहना है कि यह कदम छात्रों और कर्मचारियों की सुरक्षा तथा पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखने के लिए उठाया गया।

दूसरी ओर, छात्र संगठन एसएफआई की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों को परिसर के गेट के बाहर रोका गया और कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आंदोलनकारियों के साथ सख्ती करने के आरोप भी लगाए हैं। इन आरोपों और प्रशासन के पक्ष के बीच विवाद बना हुआ है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ से संबंधित मांगों पर बातचीत के लिए समिति गठित करने और छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। प्रशासन के अनुसार, मसौदा तैयार होने के बाद चुनाव कार्यक्रम को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। छात्रों की ओर से चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग जारी है।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्र संगठनों और राजनीतिक नेताओं के बीच विवाद का विषय बन गया है। एक ओर छात्र चुनाव कराने और अपनी मांगों पर निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन परिसर की सुरक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक गतिविधियों को सामान्य बनाए रखने पर जोर दे रहा है।

सांसद इमरान मसूद, इमरान प्रतापगढ़ी, मोहिबुल्लाह नदवी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मामले में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में संबंधित व्यक्तियों का पक्ष, जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।

फिलहाल, जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग और परिसर में कथित अनधिकृत प्रवेश को लेकर विवाद जारी है। आने वाले समय में प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत, चुनाव प्रक्रिया पर निर्णय तथा पुलिस जांच इस मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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