
नई दिल्ली।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने अपनी कार्यक्षमता, बेहतर रणनीति और जवानों की सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल CRPF ने लगातार 12 महीने यानी पूरे एक साल तक बिना किसी ऑपरेशनल मौत के अपने अभियान को पूरा किया है। खास बात यह है कि बल ने यह उपलब्धि लगभग 47 साल बाद हासिल की है। इससे पहले जनवरी 1979 में CRPF ने इतनी लंबी अवधि तक अभियान के दौरान किसी जवान की ऑपरेशनल मौत दर्ज किए बिना अपना कार्यकाल पूरा किया था। इस बार आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को दर्ज की गई थी। इसके बाद लगातार एक वर्ष तक किसी जवान की ऑपरेशन के दौरान मौत नहीं होना बल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
इस उपलब्धि को CRPF के जवानों की सतर्कता, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, बेहतर प्रशिक्षण और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का परिणाम माना जा रहा है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, दुर्गम जंगलों, पहाड़ी इलाकों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगातार तैनाती के बावजूद जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में एक वर्ष तक किसी ऑपरेशनल मौत का दर्ज नहीं होना बल की कार्यप्रणाली में आए सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।
आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों ने बढ़ाई क्षमता
CRPF की इस उपलब्धि के पीछे आधुनिक हथियारों और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समय के साथ सुरक्षा बलों की जरूरतों के अनुसार उन्हें बेहतर हथियार, बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट, संचार उपकरण और अन्य सुरक्षा संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इन उपकरणों की मदद से जवानों को कठिन परिस्थितियों में भी अधिक सुरक्षित तरीके से अभियान संचालित करने में सहायता मिल रही है।
विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। घने जंगल, दुर्गम रास्ते, छिपे हुए विस्फोटक और अचानक होने वाले हमलों का खतरा जवानों के सामने लगातार बना रहता है। ऐसे इलाकों में आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और बेहतर संचार व्यवस्था के माध्यम से जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।
बेहतर प्रशिक्षण और रणनीतिक योजना का मिला लाभ
CRPF की इस सफलता में जवानों को दिए जा रहे आधुनिक प्रशिक्षण की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। समय-समय पर जवानों को जंगलों में अभियान चलाने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, विस्फोटक खतरों से निपटने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इसके अलावा ऑपरेशन से पहले तैयार की जाने वाली रणनीतिक योजनाओं में भी सुधार किया गया है। किसी भी अभियान को शुरू करने से पहले क्षेत्र की परिस्थितियों, संभावित खतरों, उपलब्ध संसाधनों और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का आकलन किया जाता है। स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी और बेहतर खुफिया सूचनाओं के आधार पर अभियान की रूपरेखा तैयार की जाती है। इससे जवानों को अनावश्यक जोखिम से बचाने में सहायता मिलती है।

घायल जवानों को समय पर चिकित्सा सुविधा
सुरक्षा बलों के अभियानों में किसी जवान के घायल होने की स्थिति में उसे समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। CRPF ने इस दिशा में भी अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत किया है। अभियान के दौरान घायल होने वाले जवानों को जल्द से जल्द प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने और आवश्यकता पड़ने पर बेहतर चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है।
आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं, प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों और त्वरित निकासी व्यवस्था के कारण घायल जवानों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अभियान में जवानों की जान बचाने के लिए बेहतर चिकित्सा प्रबंधन उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि आधुनिक हथियार और सुरक्षा उपकरण।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय है CRPF
CRPF देश के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है। नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान चलाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने, आतंकवाद विरोधी गतिविधियों में सहयोग और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में भी बल की महत्वपूर्ण भूमिका है।
छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में CRPF के जवान कठिन परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कई बार उन्हें ऐसे इलाकों में अभियान चलाना पड़ता है, जहां सामान्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं होतीं। इसके बावजूद जवान पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।
47 साल बाद बनी ऐतिहासिक उपलब्धि
CRPF के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि जनवरी 1979 के बाद पहली बार इतनी लंबी अवधि तक ऑपरेशनल मौत के बिना अभियान पूरा हुआ है। लगभग पांच दशक बाद बने इस रिकॉर्ड को बल की सुरक्षा तैयारियों और कार्यक्षमता में हुए सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, इस उपलब्धि को केवल आंकड़ों तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे उन हजारों जवानों की मेहनत, अनुशासन और समर्पण है, जो दिन-रात देश की आंतरिक सुरक्षा में जुटे रहते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती, परिवार से दूर रहना और हर समय संभावित खतरे का सामना करना उनकी सेवा का हिस्सा है।
CRPF की यह उपलब्धि भविष्य में भी जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण, सटीक रणनीति और प्रभावी चिकित्सा व्यवस्था के माध्यम से सुरक्षा बलों को और मजबूत बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, 47 साल बाद हासिल हुआ यह रिकॉर्ड CRPF के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि बताती है कि बेहतर संसाधनों, आधुनिक तकनीक और सुनियोजित रणनीति के जरिए कठिन से कठिन सुरक्षा अभियानों में भी जोखिम को कम किया जा सकता है। देश की सुरक्षा में तैनात जवानों की सलामती सुनिश्चित करना ही इस सफलता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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