Recovery : फर्जी एसटी प्रमाणपत्र से 16 साल तक सरकारी नौकरी करने वाली शिक्षिका बर्खास्त, पूरे वेतन की होगी वसूली ?

Recovery : फर्जी एसटी प्रमाणपत्र से 16 साल तक सरकारी नौकरी करने वाली शिक्षिका बर्खास्त, पूरे वेतन की होगी वसूली
Recovery : फर्जी एसटी प्रमाणपत्र से 16 साल तक सरकारी नौकरी करने वाली शिक्षिका बर्खास्त, पूरे वेतन की होगी वसूली

सिद्धार्थनगर।

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में फर्जी अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। उस्का बाजार विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय उटियां में प्रधानाध्यापिका के पद पर तैनात सुनैना गौड़ को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि उन्होंने अनुसूचित जनजाति वर्ग का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर वर्ष 2010 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी, जबकि उनका परिवार कहार जाति से संबंधित है, जिसे उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की श्रेणी में रखा गया है। मामले में जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद अब विभाग ने उनकी बर्खास्तगी को नियुक्ति की तारीख से प्रभावी कर दिया है। इसके साथ ही विभाग ने अब तक प्राप्त वेतन की वसूली और प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सुनैना गौड़ पुत्री रामचरन, निवासी सुगही, विकासखंड उस्का बाजार, ने 30 जुलाई 2010 को अनुसूचित जनजाति कोटे के तहत सहायक अध्यापक के पद पर सरकारी सेवा प्राप्त की थी। नियुक्ति के समय प्रस्तुत किए गए जाति प्रमाणपत्र के आधार पर उन्हें एसटी वर्ग के लिए निर्धारित आरक्षण का लाभ मिला। बाद में उनके जाति प्रमाणपत्र को लेकर शिकायत सामने आई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि संबंधित शिक्षिका का परिवार अनुसूचित जनजाति वर्ग से नहीं है और उन्होंने गलत जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण का लाभ लेते हुए सरकारी नौकरी हासिल की है।

शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया। तहसीलदार नौगढ़ तथा संबंधित सतर्कता समिति की ओर से जाति प्रमाणपत्र और उससे जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। जांच के दौरान शिक्षिका के पारिवारिक और जातिगत विवरण का सत्यापन किया गया। इसमें सामने आया कि उनका परिवार कहार जाति से संबंधित है, जिसे उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल किया गया है। ऐसे में अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त करने का मामला सवालों के घेरे में आ गया।

जांच रिपोर्ट और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई जनपद स्तरीय सत्यापन समिति के समक्ष रखी गई। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने 7 जुलाई 2026 को मामले पर विचार करते हुए सुनैना गौड़ के अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को निरस्त करने का निर्णय लिया। प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि संबंधित शिक्षिका ने जिस आरक्षित श्रेणी के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की थी, उसके लिए वह पात्र नहीं थीं। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार ने पहले 7 जुलाई 2026 से शिक्षिका की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, अब इस मामले में संशोधित आदेश जारी करते हुए बर्खास्तगी की प्रभावी तिथि उनकी मूल नियुक्ति तिथि यानी 30 जुलाई 2010 निर्धारित कर दी गई है। इसका अर्थ है कि विभागीय आदेश के अनुसार उनकी सेवा को नियुक्ति के दिन से ही समाप्त माना जाएगा। इस संशोधित आदेश के बाद मामले में कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है, क्योंकि अब केवल नौकरी समाप्त करने तक सीमित न रहकर सरकारी खजाने से प्राप्त वेतन की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

16 साल के वेतन की होगी वसूली

इस प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई वेतन की रिकवरी को लेकर की जा रही है। विभाग की ओर से वित्त एवं लेखाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षिका को 30 जुलाई 2010 से अब तक सरकारी सेवा के दौरान दिए गए वेतन की गणना की जाए और नियमानुसार उसकी वसूली की कार्रवाई की जाए। लगभग 16 वर्षों तक सरकारी नौकरी करने के दौरान उन्हें वेतन के रूप में जो धनराशि प्राप्त हुई, उसकी पूरी जानकारी संबंधित अभिलेखों से जुटाई जाएगी। इसके बाद देय वसूली की राशि निर्धारित कर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि विभाग फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर प्राप्त सरकारी लाभ को वापस लेने की दिशा में कदम उठा रहा है।

Recovery : फर्जी एसटी प्रमाणपत्र से 16 साल तक सरकारी नौकरी करने वाली शिक्षिका बर्खास्त, पूरे वेतन की होगी वसूली
Recovery : फर्जी एसटी प्रमाणपत्र से 16 साल तक सरकारी नौकरी करने वाली शिक्षिका बर्खास्त, पूरे वेतन की होगी वसूली

एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश

वेतन वसूली के साथ ही मामले में कानूनी कार्रवाई की तैयारी भी की गई है। संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वह शिक्षिका के खिलाफ स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई करें। इसके तहत फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के आरोपों को लेकर पुलिस के समक्ष मामला दर्ज कराया जाएगा। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी नौकरी में आरक्षण व्यवस्था के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले को कानूनी रूप से आगे बढ़ाना है।

मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज होगी पूरी कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक रिकॉर्ड को दुरुस्त रखने के लिए मानव संपदा पोर्टल पर भी पूरी कार्रवाई दर्ज कराने का निर्देश दिया है। शिक्षिका की नियुक्ति, जाति प्रमाणपत्र निरस्तीकरण, बर्खास्तगी के संशोधित आदेश और विभागीय कार्रवाई से संबंधित विवरण पोर्टल पर अपडेट किए जाएंगे। इससे संबंधित सेवा अभिलेखों में कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और भविष्य में किसी भी प्रकार के सत्यापन के दौरान इन तथ्यों को देखा जा सकेगा।

इस पूरे प्रकरण ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के लिए प्रस्तुत किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्रों के सत्यापन की महत्ता को एक बार फिर सामने ला दिया है। आरक्षण व्यवस्था का उद्देश्य पात्र और वंचित वर्गों को अवसर उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति कथित रूप से गलत प्रमाणपत्र के आधार पर इसका लाभ प्राप्त करता है, तो इससे वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसी कारण जाति प्रमाणपत्रों की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जाता है।

सिद्धार्थनगर के इस मामले में शिकायत के बाद तहसील स्तर से लेकर जनपद स्तरीय सत्यापन समिति तक जांच की गई और प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया। अब नियुक्ति तिथि से बर्खास्तगी प्रभावी करने, 16 वर्षों के वेतन की वसूली, एफआईआर दर्ज कराने और मानव संपदा पोर्टल पर रिकॉर्ड अपडेट करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में पुलिस की जांच और विभागीय प्रक्रिया के आधार पर मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल इस कार्रवाई को फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने के मामलों में प्रशासन की सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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