An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर ?

An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर

An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर
An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर

हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक चौंकाने वाला और भावनात्मक रूप से झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज में रिश्तों, भरोसे और कानून के जटिल पहलुओं पर नई बहस छेड़ दी है। यहां ग्राम पूठा निवासी एक युवक ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी पत्नी को पढ़ा-लिखाकर और हर तरह का सहयोग देकर उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनवाया, लेकिन अफसर बनते ही पत्नी ने उसी पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया।

पीड़ित पति गुलशन कुमार के अनुसार, उसकी शादी पायल रानी से सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य था, लेकिन पायल की पढ़ाई और करियर को लेकर परिवार में मतभेद शुरू हो गए। गुलशन का कहना है कि उसके परिवार की ओर से पारंपरिक सोच के चलते पढ़ाई को लेकर आपत्ति थी, लेकिन उसने अपनी पत्नी के भविष्य को देखते हुए अपने ही परिवार से विरोध मोल लिया।

गुलशन कुमार ने बताया कि उसने पायल रानी को घर की चारदीवारी और बंदिशों से बाहर निकालकर पढ़ने-लिखने की पूरी आजादी दी। पढ़ाई के दौरान आर्थिक सहयोग के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक समर्थन भी किया। उसने दावा किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उसने पत्नी को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराई, ताकि वह अपने सपनों को पूरा कर सके।

पति का आरोप है कि कड़ी मेहनत और वर्षों की तैयारी के बाद जब पायल रानी का चयन उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर हुआ, तो पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। गुलशन का कहना है कि उसने इसे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि माना, क्योंकि उसे लगा कि पत्नी के सपनों को पूरा करने में उसकी भूमिका अहम रही है।

हालांकि, गुलशन के अनुसार, पत्नी के अफसर बनते ही उनके रिश्तों में अचानक बदलाव आ गया। उसने आरोप लगाया कि पायल का व्यवहार बदलने लगा और उसके साथ बातचीत का लहजा भी कठोर हो गया। कुछ समय बाद पत्नी ने मायके जाकर पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी।

गुलशन का कहना है कि यह उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं था। उसने बताया कि जिस पत्नी को उसने समाज और परिवार की बंदिशों से लड़कर आगे बढ़ाया, उसी ने कानून का सहारा लेकर सबसे पहले उसी के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। गुलशन ने यह भी कहा कि एफआईआर में लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत हैं।

दूसरी ओर, महिला सब इंस्पेक्टर पायल रानी की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। आरोपों के अनुसार, पति और ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाती थी और मांग पूरी न होने पर मानसिक दबाव बनाया जाता था। महिला का कहना है कि उसने लंबे समय तक यह सब सहा, लेकिन जब हालात असहनीय हो गए, तो उसे कानूनी कदम उठाना पड़ा।

An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर
An FIR has been filed against the husband : हापुड़ में पति ने बनाया दारोगा, अफसर बनी पत्नी ने पति पर दर्ज कराई एफआईआर

पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।

यह मामला सामने आने के बाद इलाके में चर्चा का विषय बन गया है। गांव और आसपास के क्षेत्र में लोग इसे अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग पति के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं और इसे “विश्वासघात” बता रहे हैं, तो वहीं कुछ का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और यदि महिला के साथ वास्तव में उत्पीड़न हुआ है, तो उसे न्याय मिलना चाहिए।

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल पति-पत्नी के विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में बदलते रिश्तों, महिला सशक्तिकरण और कानून के दुरुपयोग बनाम उपयोग की बहस को भी उजागर करता है। एक ओर जहां महिलाओं का शिक्षित और आत्मनिर्भर होना समाज के लिए सकारात्मक बदलाव है, वहीं दूसरी ओर पारिवारिक रिश्तों में संवाद की कमी और आपसी अविश्वास ऐसे विवादों को जन्म दे रहा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों में निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन यदि आरोप झूठे साबित होते हैं, तो इससे कानून की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं और निर्दोष लोगों की जिंदगी बर्बाद हो सकती है।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है। पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों पक्षों के बयान, दस्तावेज और परिस्थितियों की गहनता से जांच की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि रिश्तों में भरोसा, संवाद और समझ कितनी जरूरी है। साथ ही यह भी कि कानून का सहारा अंतिम विकल्प होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत टकराव का हथियार। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे इस मामले की सच्चाई सामने आ सके।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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