Arrested in Prayagraj : मेरठ: धागा कारोबारी से ₹20 लाख वसूली का मामला, दो दारोगा प्रयागराज में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में धागा कारोबारी से ₹20 लाख की कथित रंगदारी वसूली के मामले में बड़ा प्रशासनिक एक्शन सामने आया है। मामले में नामजद दोनों दारोगाओं को प्रयागराज से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि दोनों ने कारोबारी पर दबाव बनाकर मोटी रकम वसूली और बाद में केस को प्रभावित करने की कोशिश भी की। इस पूरे घटनाक्रम के उजागर होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने तत्काल प्रभाव से संबंधित पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया था। अब तीनों के खिलाफ विभागीय जांच भी जारी है।
प्रयागराज में गिरफ्तारी, हाईकोर्ट से स्टे लेने की थी कोशिश
सूत्रों के मुताबिक, दोनों आरोपी दारोगा गिरफ्तारी से बचने के लिए प्रयागराज पहुंचे थे। वहां से वे कथित तौर पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय (प्रयागराज) से मामले में स्टे ऑर्डर लेने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, इससे पहले ही पुलिस की टीम ने उन्हें ट्रैक कर लिया और गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों को स्थानीय अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से संपर्क से बाहर थे और मोबाइल लोकेशन व तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उनकी लोकेशन ट्रेस की गई। प्रयागराज में दबिश देकर दोनों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है, जिनसे पूरे नेटवर्क और संभावित अन्य संलिप्त लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।
रंगदारी और भ्रष्टाचार का केस दर्ज
मामले में दोनों दारोगाओं पर रंगदारी वसूली और भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कारोबारी का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक पुराने मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे ₹20 लाख की मांग की थी। दबाव बढ़ने पर उसने रकम दे दी, लेकिन बाद में मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की।
शिकायत मिलने के बाद विभाग ने प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें आरोपों को प्रथमदृष्टया सही पाया गया। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस महकमे में इस घटना से हड़कंप मच गया, क्योंकि मामला सीधे तौर पर वर्दी की साख से जुड़ा हुआ है।
SSP का एक्शन, तत्काल निलंबन
मामले के खुलासे के बाद मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित दोनों दारोगाओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। जांच में लापरवाही या संलिप्तता की आशंका के चलते लोहियानगर थाना के थानेदार योगेश चंद्र को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
एसएसपी ने साफ कहा है कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार या रंगदारी जैसी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने यह भी निर्देश दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
विभागीय जांच जारी, सख्त कार्रवाई के संकेत
तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच में उनकी संपत्ति, बैंक खातों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की भी पड़ताल की जा सकती है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो न केवल सेवा से बर्खास्तगी बल्कि कानूनी सजा का भी सामना करना पड़ सकता है।
पुलिस मुख्यालय स्तर पर भी इस मामले को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो विजिलेंस या अन्य विशेष एजेंसी से भी जांच कराई जा सकती है। विभाग यह संदेश देना चाहता है कि वर्दी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तय है।

कारोबारी वर्ग में नाराजगी
घटना सामने आने के बाद स्थानीय कारोबारी वर्ग में रोष देखने को मिला। व्यापारियों का कहना है कि यदि सुरक्षा देने वाली पुलिस ही दबाव बनाकर वसूली करेगी, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करेगा। कई व्यापारिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
व्यापारियों का यह भी कहना है कि ऐसे मामलों से पूरे जिले की कानून-व्यवस्था की छवि प्रभावित होती है। उन्होंने प्रशासन से भरोसा दिलाने की मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
पुलिस की साख पर सवाल
यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर पुलिस अधिकारियों पर रंगदारी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। आम तौर पर पुलिस अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करती है, लेकिन जब उसी पर वसूली के आरोप लगें, तो जनता का विश्वास डगमगा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शी जांच और त्वरित कार्रवाई ही भरोसा बहाल करने का एकमात्र तरीका है। गिरफ्तारी और निलंबन जैसे कदमों को शुरुआती कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष विभागीय और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार दारोगाओं से पूछताछ जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस वसूली में कोई और पुलिसकर्मी या बाहरी व्यक्ति शामिल था। कारोबारी से वसूली गई रकम की रिकवरी और लेनदेन के सबूत भी जांच का हिस्सा हैं।
फिलहाल, यह मामला मेरठ और प्रयागराज दोनों जिलों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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