Attack on democracy : एसआईआर में जीत के अंतर से दोगुने कटे वोट : राजस्थान में बीजेपी सरकार को रिपीट कराने की तैयारी या लोकतंत्र पर प्रहार ?

Attack on democracy : एसआईआर में जीत के अंतर से दोगुने कटे वोट : राजस्थान में बीजेपी सरकार को रिपीट कराने की तैयारी या लोकतंत्र पर प्रहार

Attack on democracy : एसआईआर में जीत के अंतर से दोगुने कटे वोट : राजस्थान में बीजेपी सरकार को रिपीट कराने की तैयारी या लोकतंत्र पर प्रहार
Attack on democracy : एसआईआर में जीत के अंतर से दोगुने कटे वोट : राजस्थान में बीजेपी सरकार को रिपीट कराने की तैयारी या लोकतंत्र पर प्रहार

जयपुर |

  • राजस्थान की राजनीति में इन दिनों ‘स्पेशल इंटेसिव रिवीजन’ (SIR) चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक सियासी युद्ध का मैदान बन गया है। मुख्यमंत्री, विधानसभा स्पीकर और 15 मंत्रियों सहित दर्जनों विधायकों के क्षेत्रों में उनकी पिछली जीत के अंतर से दोगुने-तिगुने वोट कटना कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि भविष्य के सत्ता समीकरणों का आधार है।सत्ता पक्ष (BJP) : भाजपा के लिए यह प्रक्रिया एक बड़े “सफाई अभियान” जैसी है। भाजपा की रणनीति के केंद्र में ये तीन बिंदु हैं। फर्जी वोटिंग पर लगाम : भाजपा का मानना है कि पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में ‘घोस्ट वोटर्स’ (फर्जी नाम) के जरिए कांग्रेस ने बढ़त बनाई थी। इन नामों के हटने से भाजपा का ‘वोट शेयर’ स्वतः बढ़ जाएगा।
  • एंटी-इन्कंबेंसी का मैनेजमेंट : मंत्रियों के क्षेत्रों में वोट कटने को भाजपा एक अवसर के रूप में देख रही है। उनका तर्क है कि यदि ‘मृत’ या ‘शिफ्टेड’ वोटर हट रहे हैं, तो वास्तविक जनाधार का आकलन करना आसान होगा।
    कैडर की सक्रियता : भाजपा के पन्ना प्रमुखों ने नाम हटवाने के लिए रिकॉर्ड फॉर्म भरे हैं, जो दर्शाता है कि संगठन स्तर पर पार्टी ने इस रिवीजन को “चुनावी माइक्रो-मैनेजमेंट” की तरह लिया है।
Attack on democracy : एसआईआर में जीत के अंतर से दोगुने कटे वोट : राजस्थान में बीजेपी सरकार को रिपीट कराने की तैयारी या लोकतंत्र पर प्रहार
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विपक्ष (Congress) : ‘वोट चोरी’ और अस्तित्व का संकट

  • पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के क्षेत्र में जीत से दोगुने (56,000) वोट कटना कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को ‘टारगेटेड’ बता रही है।
  • कोर वोट बैंक पर चोट : कांग्रेस का आरोप है कि दलित, अल्पसंख्यक और ग्रामीण क्षेत्रों के उन मतदाताओं को निशाना बनाया गया है जो उनके पारंपरिक समर्थक हैं।
  • कानूनी और मैदानी लड़ाई : पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दे रहे हैं। कांग्रेस अब इन नामों को वापस जुड़वाने के लिए घर-घर जाकर सर्वे करने और अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है।
    किसके लिए वरदान, किसके लिए ‘अभिशाप’?यदि यह रुझान फाइनल लिस्ट (14 फरवरी) तक बना रहता है, तो इसका असर कुछ ऐसा होगा।
  • भाजपा को फायदा : उन सीटों पर जहां हार-जीत का अंतर 5,000 से कम था (जैसे स्पीकर वासुदेव देवनानी की सीट), वहां 28,000 वोट कटना भाजपा के लिए एक ‘सेफ कुशन’ तैयार कर सकता है।
    कांग्रेस को झटका : गहलोत और पायलट जैसे दिग्गजों के क्षेत्रों में बड़ी कटौती उनके प्रभाव क्षेत्र को कमजोर दिखा सकती है, जिससे कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ेगा।
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कटे हुए वोटों में 60-70% हिस्सा विपक्ष के समर्थकों का है, तो आगामी चुनावों में कांग्रेस के लिए वापसी की राह और कठिन हो जाएगी। वहीं, यदि यह निष्पक्ष प्रक्रिया है, तो भी इसका लाभ उस पार्टी को मिलेगा जिसका संगठन धरातल पर अधिक सतर्क है। फिलहाल, ‘वोट काटने’ की इस राजनीति ने राजस्थान के सियासी रण में एक नया मोड़ ला दिया है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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