Bhandara on the sixteenth : रामशाला बालाजी मंदिर में दशरथ गिरी महाराज की सोलहवीं पर भंडारा

लालसोट, राजस्थान – ग्राम डिडवाना स्थित रामशाला बालाजी मंदिर में स्वर्गीय संत दशरथ गिरी महाराज की सोलहवीं स्मृति के अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह धार्मिक कार्यक्रम स्थानीय श्रद्धालुओं और संत समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर रहा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक भाग लिया और संत की स्मृति में चादर अर्पित की।
भंडारे के दौरान महंत आलोका नंद गिरी महाराज के सानिध्य में वृंदावन और अयोध्या से आए संत समाज के प्रतिनिधियों ने मंदिर परिसर में उपस्थित होकर धार्मिक अनुशासन और पवित्रता बनाए रखी। आयोजन में धार्मिक रीतियों का पालन करते हुए संत समाज और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सोलहवीं के अवसर पर मंदिर में भंडारे का आयोजन विशेष रूप से श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना। इस भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरण किया गया। प्रसादी वितरण के दौरान श्रद्धालुओं ने संत की शिक्षाओं और धार्मिक अनुशासन का पालन करते हुए आयोजन का आनंद लिया। यह आयोजन केवल धार्मिक भावना का प्रतीक ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाज में भाईचारा और सामुदायिक सहयोग की भावना को भी प्रदर्शित करता है।
भंडारे को सफल बनाने में स्थानीय कार्यकर्ताओं और समाज के गणमान्य नागरिकों ने विशेष सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच दीपक पटेल, राकेश मेडिवाला, रामजीलाल खुटला, धर्मेंद्र क्यारा, गौरी शंकर सैनी, कमल जैमन, महेश जैमन, धीरज जालवाला, सीताराम कुईवाला, सीताराम सोनी, रामसहाय सैनी, रामफूल सैनी, ब्रजमोहन थानेदार, सत्यनारायण बोहरा, रमेश जालवाला, राधामोहन मिश्रा, नरेंद्र पडा, अक्षित जांगिड़, लाला पंडित, मनोज जैमन, राजेश बुत्तोलिया, ओमप्रकाश पंडित, रमेश पंडा, चंद्रप्रकाश मेडिवाला सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इन सभी ने मिलकर भंडारे के आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने में योगदान दिया।
भंडारे के दौरान मंदिर परिसर को धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अनुसार सजाया गया। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गईं, जिससे उन्हें सुविधा और सम्मान के साथ प्रसादी ग्रहण करने का अवसर मिला। महंत आलोका नंद गिरी महाराज ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन संत की स्मृति को जीवंत रखते हैं और समाज में धार्मिक चेतना एवं आध्यात्मिक मूल्य बनाए रखते हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने भी सहयोग प्रदान किया, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हो सका। आयोजकों ने सुनिश्चित किया कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं सुरक्षित और सुगम हों। इस प्रकार का आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण में भी योगदान देता है।
संत समाज और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मिलकर इस भंडारे को सफल बनाने में प्रत्येक पहलू का ध्यान रखा। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि प्रसादी वितरण, सुरक्षा, बैठने की व्यवस्था और कार्यक्रम की समयसीमा सभी सुचारू रूप से सम्पन्न हो। इस आयोजन ने यह भी प्रदर्शित किया कि ग्राम डिडवाना और लालसोट क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी कितनी सक्रिय और सकारात्मक है।
भंडारे के आयोजन के दौरान उपस्थित संत समाज ने भक्तों को धार्मिक शिक्षाएं दी और संत दशरथ गिरी महाराज की जीवन गाथा व उनके द्वारा समाज के लिए किए गए कार्यों को श्रद्धालुओं के समक्ष रखा। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की जानकारी दी गई, जिससे वे अपने जीवन में सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारियों को समझ सकें।
स्थानीय कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों ने भंडारे के आयोजन में आर्थिक और श्रम दोनों तरह से योगदान दिया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि भंडारे का उद्देश्य केवल भोजन वितरण ही न हो, बल्कि यह समाज में आपसी सहयोग, सेवा भावना और सामूहिक भागीदारी का संदेश भी दे। इस आयोजन ने साबित कर दिया कि धार्मिक आयोजन समाज में एकजुटता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा देते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने संत दशरथ गिरी महाराज की स्मृति में कार्यक्रम की सफलता के लिए अपने आभार और श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक चेतना के प्रसार के साथ-साथ युवा और बच्चों को भी आध्यात्मिक मूल्य सिखाने का अवसर प्रदान करते हैं।
अंततः, ग्राम डिडवाना स्थित रामशाला बालाजी मंदिर में आयोजित यह विशाल भंडारा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि स्थानीय समाज में एकता, सहयोग और श्रद्धा की भावना को भी मजबूत किया। महंत आलोका नंद गिरी महाराज, संत समाज और स्थानीय कार्यकर्ताओं के सहयोग से यह आयोजन पूरी तरह सफल रहा और हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संतोष एवं प्रसादी प्राप्त हुई।
इस प्रकार का आयोजन न केवल संत दशरथ गिरी महाराज की स्मृति को सम्मानित करता है, बल्कि यह स्थानीय समाज और धार्मिक समुदाय के बीच आपसी सहयोग और सामूहिक सेवा की भावना को भी प्रकट करता है। आयोजन की सफलता ने यह संदेश दिया कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में सामाजिक एकता और आध्यात्मिक चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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