Big Brother : ‘बिग ब्रदर’ हम पर नजर नहीं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा ‘संचार साथी’ ऐप  ?

Big Brother : ‘बिग ब्रदर’ हम पर नजर नहीं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा ‘संचार साथी’ ऐप

Big Brother : 'बिग ब्रदर’ हम पर नजर नहीं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा ‘संचार साथी’ ऐप  ?
Big Brother : ‘बिग ब्रदर’ हम पर नजर नहीं सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का नया मुद्दा ‘संचार साथी’ ऐप  ?

नई दिल्ली: 

  • केंद्र सरकार के सभी मोबाइल फोन पर ‘संचार साथी’ ऐप को अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने के निर्देश ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने इसे असंवैधानिक और ‘जासूसी ऐप’ करार दिया है। हालांकि सरकार ने बाद में स्पष्ट किया कि यह ‘अनिवार्य नहीं है और यूजर्स चाहें तो इसे हटा सकते हैं।’ सरकार सभी फोन पर यह ऐप क्यों चाहती थी? विपक्ष ने इसका विरोध क्यों किया? मोबाइल कंपनियों का क्या रुख था? यह सब जानना ज़रूरी है।
  • कांग्रेस ने नए मोबाइल हैंडसेट में ‘संचार साथी’ ऐप पहले से मौजूद होने संबंधी दूरसंचार विभाग के निर्देश को लेकर मंगलवार को आरोप लगाया कि यह एक ‘जासूसी ऐप’ है और सरकार देश में तानाशाही लागू करने का प्रयास कर रही है।संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यूजर्स चाहें तो इस ऐप को मोबाइल से हटा सकते हैं और रजिस्ट्रेशन न किए जाने तक यह ऐक्टिव नहीं होगा। सिंधिया ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से कहा कि सरकार का उद्देश्य लोगों को धोखाधड़ी और मोबाइल चोरी की घटनाओं से बचाने के लिए उपलब्ध साधनों की जानकारी देना है।

प्रियंका, खरगे समेत कई कांग्रेस नेताओं ने सरकार को घेरा

  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि ‘संचार साथी’ ऐप लोगों की आवाज का गला घोंटने की भाजपा की एक और कोशिश है।उन्होंने कहा, ‘विभिन्न हितधारकों और नागरिकों को विश्वास में लिए बिना इस ऐप को प्रीलोड करने का मोदी सरकार का एकतरफा निर्देश तानाशाही के समान है। सरकार यह क्यों जानना चाहती है कि नागरिक अपने परिवार और दोस्तों के साथ क्या बात करते हैं?’
  • कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘संचार साथी एक जासूसी ऐप है और स्पष्ट रूप से यह हास्यास्पद है। नागरिकों को निजता का अधिकार है। हर किसी को निजता का यह अधिकार होना चाहिए कि वह सरकार की नजर के बिना परिवार और दोस्तों को संदेश भेज सके।’ उन्होंने दावा किया, ‘यह सिर्फ टेलीफोन में ताक-झांक करना नहीं है। वे (सरकार) इस देश को हर रूप में तानाशाही में बदल रहे हैं। संसद नहीं चल रही है, क्योंकि सरकार किसी भी विषय पर चर्चा करने से इनकार कर रही है। विपक्ष पर आरोप लगाना बहुत आसान है, लेकिन वे किसी भी चीज पर चर्चा नहीं होने दे रहे हैं और यह लोकतंत्र नहीं है।’
  • कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि निजता का अधिकार जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘ ‘बिग ब्रदर’ हम पर नजर नहीं रख सकता। दूरसंचार विभाग का यह निर्देश असंवैधानिक है। निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का अभिन्न अंग है।
  • कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी चीज को अनिवार्य बनाना उचित नहीं है। उन्होंने संसद परिसर में पत्रकारों से कहा, ‘मैंने इस मुद्दे का पूरी तरह से अध्ययन नहीं किया है, लेकिन सामान्य ज्ञान मुझे बताता है कि ये ऐप उपयोगी हो सकते हैं, बशर्ते वे स्वैच्छिक हों। जिस किसी को भी इनकी आवश्यकता है, उन्हें इन्हें डाउनलोड करने की अनुमति होनी चाहिए। लोकतंत्र में किसी भी चीज़ को अनिवार्य बनाना परेशान करने वाली बात है।’
  • कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने ‘संचार साथी’ ऐप के मामले पर चर्चा कराने के लिए राज्यसभा में कार्य स्थगन का नोटिस दिया है।
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क्या है सरकार का पक्ष?

  • इस मामले को लेकर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि मोबाइल हैंडसेट पर ‘संचार साथी’ ऐप का एक्टिवेशन अनिवार्य नहीं है और यह पूरी तरह से उपभोक्ताओं पर निर्भर करता है कि वे इसे किसी अन्य ऐप की तरह इस्तेमाल करें या डिलीट करें। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि ‘संचार साथी’ ऐप सरकारी निगरानी के लिए नहीं है। यह ऐप व्यक्तिगत डेटा, संदेशों या कॉल तक नहीं पहुंच सकता। इसका मुख्य उद्देश्य यूजर्स की सुरक्षा बढ़ाना, धोखाधड़ी को रोकना और खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रैक करना है।

Apple, Samsung, Google का क्या इरादा?

  • रॉयटर्स ने अमेरिकी टेक दिग्गज के कई स्रोतों का हवाला देते हुए बताया है कि Apple के भारतीय सरकार के साइबर सुरक्षा ऐप ‘संचार साथी’ को अपने उपकरणों पर प्री-लोड करने के आदेश का पालन करने की संभावना नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Apple इस ऐप इंस्टॉलेशन के संबंध में अपनी चिंताओं को सरकार के साथ साझा करेगा। आईफोन निर्माता का इरादा इस मामले को अदालत में ले जाने का नहीं है, लेकिन वह सरकार को नए आदेश का पालन करने में अपनी असमर्थता के बारे में बताएगा। एक सूत्र ने कहा कि Apple ‘यह नहीं कर सकता। बस।’ अन्य ब्रांड जैसे Samsung इस आदेश पर विचार कर रहे हैं, जबकि Google भी संभवतः अपने अगले कदम तय करने के लिए बारीकी से जांच करेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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