Big shock : हमें स्वीकार नहीं बगराम एयरबेस को लेकर अफगानिस्तानी मंत्री मुत्ताकी ने ट्रंप को कैसे दे दिया बड़ा झटका

नई दिल्ली : भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के विदेश मंत्री मावलवी अमीर खान मुत्ताकी ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। तालिबान सरकार में मंत्री मुत्ताकी ने बगराम एयरबेस को लेकर अमेरिका के मंसूबों पर पानी फेर दिया है। मुत्ताकी ने शुक्रवार को कहा,बगराम के बारे में, मेरा कहना है कि अफगानिस्तान के लोगों ने कभी भी विदेशी सेना को स्वीकार नहीं किया है। और वे इससे आगे भी स्वीकार नहीं करेंगे।
‘सैन्य वर्दी में हमें कोई स्वीकार नहीं’
- अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा, ‘अगर कोई हमारे साथ संबंध रखना चाहता है, तो वह राजनयिक मिशन के जरिए आ सकता है, लेकिन सैन्य वर्दी में नहीं, यह हमें स्वीकार्य नहीं है। इससे पहले रूस, चीन और सात अन्य देशों ने अफगानिस्तान में विदेशी सैन्य बुनियादी ढांचे की तैनाती के प्रयासों का विरोध किया था। वहीं, भारत ने भी इस रुख का समर्थन किया था। यह कदम अफगानिस्तान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बगराम एयरबेस को सौंपने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तालिबान शासन पर दबाव बनाये जाने की पृष्ठभूमि में उठाया गया था।

Big shock : हमें स्वीकार नहीं बगराम एयरबेस को लेकर अफगानिस्तानी मंत्री मुत्ताकी ने ट्रंप को कैसे दे दिया बड़ा झटका ?
ट्रंप ने की थी एयरबेस की मांग
- कुछ हफ्ते पहले, ट्रंप ने कहा था कि तालिबान को बगराम एयरबेस अमेरिका को सौंप देना चाहिए, क्योंकि इसे वाशिंगटन ने स्थापित किया था। वहीं, ‘मॉस्को फॉर्मेट’ वार्ता के नए संस्करण में, देशों के समूह ने अफगानिस्तान में समृद्धि और विकास लाने के तौर-तरीकों पर व्यापक विचार-विमर्श किया था। मॉस्को में हुई बातचीत में भाग लेने वाले देशों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने का आह्वान किया था।
मीटिंग में इन देशों ने जोर देकर कहा कि
- अफगानिस्तान को आतंकवाद को खत्म करने और इसे जल्द से जल्द जड़ से मिटाने के लिए ठोस कदम उठाने में मदद दी जानी चाहिए, ताकि काबूल की धरती का इस्तेमाल पड़ोसी देशों और अन्य जगहों की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में न हो। भारत, रूस और चीन के अलावा, इस बैठक में ईरान, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने भी भाग लिया था।