Campaign intensifies : सहारनपुर में 150 कुंडीय यज्ञ-हवन एवं जिला आर्य महासम्मेलन हेतु जनसंपर्क अभियान तेज़

एक नई लहर देखने को मिल रही है
- सहारनपुर जनपद:- के तीतरो क्षेत्र में इन दिनों आध्यात्मिक चेतना और वैदिक संस्कृति के पुनरुत्थान की एक नई लहर देखने को मिल रही है। महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा मुम्बई में प्रथम आर्य समाज की स्थापना के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने जा रहे 150 कुंडीय यज्ञ-हवन, भव्य जिला आर्य महासम्मेलन और विशाल शोभायात्रा की तैयारियों को लेकर जिला आर्य प्रतिनिधि सभा द्वारा व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। यह दो दिवसीय ऐतिहासिक आयोजन आगामी 13-14 सितम्बर को सहारनपुर में आयोजित होगा, जिसमें जिले भर से हजारों की संख्या में आर्य समाज के अनुयायी, वैदिक विचारधारा में आस्था रखने वाले नागरिक, समाजसेवी व साधु-संत भाग लेंगे।
- इस आयोजन की सूचना और महत्त्व को जन-जन तक पहुँचाने के लिए जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के पदाधिकारियों ने तीतरों क्षेत्र के साथ-साथ पूजना, फूंसगढ़, खानपुर, गन्देवड़ा जैसे अनेक गाँवों का दौरा किया। इस दौरान सभा के जिलाध्यक्ष महिपाल सिंह आर्य, जिला मीडिया प्रभारी एवं तहसील नकुड़ मंत्री डॉ. वीरसिंह भावुक, तहसील देवबंद के पूर्व अध्यक्ष विपिन आर्य, पूर्व मंत्री अमरीश आर्य, अध्यक्ष मुकेश आर्य, तथा तीतरो आर्य समाज के अध्यक्ष मेघराज आर्य आदि वरिष्ठ जन उपस्थित रहे। इन सभी ने गाँव-गाँव जाकर घर-घर जनसंपर्क किया, लोगों को आमंत्रण पत्र वितरित किए और कार्यक्रम के उद्देश्य एवं महत्व को विस्तार से समझाया।
- यह आयोजन केवल एक धार्मिक क्रिया-कर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक जागरूकता का महापर्व है। आर्य समाज की स्थापना का 150वाँ वर्ष संपूर्ण वैदिक समाज के लिए गौरव और आत्मचिंतन का अवसर है। महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन और उनके विचार आज भी सामाजिक सुधार, शिक्षा, स्त्री-सशक्तिकरण, अंधविश्वास के उन्मूलन और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। इस ऐतिहासिक वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए सहारनपुर में आयोजित 150 कुंडीय यज्ञ-हवन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जिसमें सामूहिक वैदिक आहुति के माध्यम से समाज के शुद्धिकरण, पर्यावरण संरक्षण और सार्वभौमिक कल्याण के संकल्प लिए जाएंगे।
- शोभायात्रा का आयोजन इस पूरे कार्यक्रम की एक और प्रमुख कड़ी होगा, जिसमें वैदिक धर्म, संस्कृति, ऋषियों की झांकियाँ, वेद प्रचार से जुड़े संदेश, आर्य समाज के गौरवशाली इतिहास को दर्शाती झांकियाँ और भजन-कीर्तन के माध्यम से जनमानस को जोड़ने का कार्य किया जाएगा। यह शोभायात्रा न केवल धार्मिक चेतना का संचार करेगी, बल्कि सामाजिक एकता और नैतिक मूल्यों के पुनरुद्धार का संदेश भी देगी।
Campaign intensifies : सहारनपुर में 150 कुंडीय यज्ञ-हवन एवं जिला आर्य महासम्मेलन हेतु जनसंपर्क अभियान तेज़ ? - जनसंपर्क अभियान के दौरान वक्ताओं ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज में फैली कुरीतियाँ, अंधविश्वास और नैतिक पतन के समाधान के लिए वैदिक सिद्धांतों की ओर लौटना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए समर्पित रहा — कि भारत पुनः एक ज्ञानवान, जागरूक और सशक्त राष्ट्र बने। उन्होंने उपस्थित नागरिकों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक संख्या में सहारनपुर में आयोजित इस महासम्मेलन में भाग लें, अपने बच्चों और युवाओं को भी वैदिक संस्कृति से जोड़ें, ताकि अगली पीढ़ी नैतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से परिपक्व बन सके।
- इस अवसर पर यह भी बताया गया कि यज्ञ-हवन के लिए तैयारियाँ जोरों पर हैं। 150 कुंडों की स्थापना के लिए विशेष यज्ञशाला का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें प्रशिक्षित आचार्यों की देखरेख में विधिवत आहुतियाँ दी जाएंगी। हवन सामग्री शुद्ध, जैविक और पर्यावरण हितैषी होगी, ताकि उसका सकारात्मक प्रभाव न केवल वातावरण पर पड़े, बल्कि जनमानस पर भी आध्यात्मिक उन्नयन के रूप में दिखाई दे।
- कार्यक्रम के आयोजन में आर्य समाज के सभी स्थानीय संगठन, महिला मंडल, युवाओं की समितियाँ, विद्यार्थी परिषद, और समाजसेवी संस्थाएँ सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं। यह आयोजन सहारनपुर जिले को वैदिक चेतना का केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। जिला आर्य प्रतिनिधि सभा ने यह स्पष्ट किया है कि यह सम्मेलन किसी व्यक्ति विशेष या संगठन की प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि समाज के व्यापक उत्थान और राष्ट्र पुनर्निर्माण की सोच से प्रेरित है।
- जनसंपर्क के इस चरण में ग्रामीणों का उत्साह भी देखते ही बनता था। अनेक स्थानों पर लोगों ने अपने घरों में पदाधिकारियों का स्वागत किया, आयोजन के प्रति अपनी आस्था और समर्थन प्रकट किया तथा कई युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने की इच्छा भी जताई। यह स्पष्ट संकेत है कि वैदिक आंदोलन की जड़ें समाज में अब भी गहरी हैं और सही दिशा-निर्देशन एवं संगठित प्रयासों से इन विचारों को पुनः जीवंत किया जा सकता है।
- अंततः यह आयोजन न केवल सहारनपुर, बल्कि समूचे उत्तर भारत में एक नई वैचारिक चेतना का सूत्रपात करेगा। 13-14 सितम्बर को होने वाला यह महासम्मेलन आने वाले समय में सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा — जहाँ से समाज वैदिक मूल्यों की ओर लौटेगा, आत्मबल और आत्मज्ञान की भावना को पुनः अपनाएगा। आयोजकों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक अवसर पर अपनी उपस्थिति से इसे सफल बनाएं और महर्षि दयानंद के सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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