Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव ?

Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव

Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव
Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव

गाजियाबाद के कमला नेहरू नगर स्थित पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय उस समय विवाद का केंद्र बन गया, जब परीक्षा देने पहुंचीं महिलाओं ने मंगलसूत्र उतारने के निर्देश का कड़ा विरोध किया। परीक्षा केंद्र पर मेटल डिटेक्टर जांच के दौरान मंगलसूत्र पहनकर आई महिला अभ्यर्थियों को प्रवेश से रोके जाने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई और देखते ही देखते गेट पर हंगामा शुरू हो गया। महिलाओं ने इस नियम को उनकी धार्मिक आस्था और वैवाहिक सम्मान के खिलाफ बताते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

परीक्षा केंद्र पर मौजूद महिलाओं का कहना था कि मंगलसूत्र केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि विवाहित महिला की पहचान, सम्मान और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी परिस्थिति में मंगलसूत्र नहीं उतार सकतीं। कई महिलाओं ने भावुक होते हुए कहा कि यह नियम उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है और प्रशासन को ऐसे संवेदनशील विषयों में लचीलापन दिखाना चाहिए।

महिलाओं का आरोप है कि अन्य कई प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती परीक्षाओं में मेटल की चेन या मंगलसूत्र पर टेप लगाकर अभ्यर्थियों को प्रवेश की अनुमति दी जाती है। लेकिन इस परीक्षा केंद्र पर मेटल डिटेक्टर जांच का हवाला देकर पूरी तरह रोक लगा दी गई, जो कि अनुचित और भेदभावपूर्ण है। अभ्यर्थियों का कहना था कि जब अन्य केंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था संभव है, तो यहां इतनी सख्ती क्यों बरती जा रही है।

हंगामे के दौरान कई महिला अभ्यर्थी परीक्षा छूट जाने की आशंका से परेशान नजर आईं। कुछ महिलाओं ने बताया कि वे दूर-दराज के क्षेत्रों से परीक्षा देने आई हैं और अब इस नियम के कारण उनका भविष्य दांव पर लग सकता है। परीक्षा केंद्र के गेट पर काफी देर तक महिलाएं जमा रहीं और नियमों में ढील देने की मांग करती रहीं।

स्थिति बिगड़ती देख परीक्षा केंद्र पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों और विद्यालय प्रशासन ने महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना था कि परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए मेटल डिटेक्टर जांच अनिवार्य है और नियमों का पालन सभी अभ्यर्थियों को करना होगा। हालांकि महिलाओं ने प्रशासन के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि मंगलसूत्र से नकल या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है।

महिलाओं ने सवाल उठाया कि यदि पुरुष अभ्यर्थियों को धार्मिक प्रतीकों या अन्य वस्तुओं के साथ परीक्षा देने की अनुमति दी जाती है, तो महिलाओं के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि इस तरह के नियम महिलाओं की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था पर सीधा हमला हैं।

हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस ने महिलाओं को शांत कराने के साथ-साथ परीक्षा केंद्र प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश की। काफी देर तक चले संवाद के बाद कुछ महिलाओं को टेप लगाकर मंगलसूत्र पहनने की अनुमति देने की बात सामने आई, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।

Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव
Conflict of rules : मंगलसूत्र उतरवाने के नियम पर भड़की महिलाएं, गाजियाबाद परीक्षा केंद्र पर आस्था बनाम नियमों का टकराव

इस पूरे घटनाक्रम के चलते परीक्षा केंद्र पर अव्यवस्था की स्थिति बनी रही और परीक्षा प्रक्रिया भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई। कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। यदि पहले से ही मंगलसूत्र या अन्य धार्मिक प्रतीकों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए जाते, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था।

सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार समूहों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर नियम बनाते समय सामाजिक और धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि भविष्य में ऐसे नियमों की समीक्षा की जाए और महिलाओं को सम्मानजनक विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

फिलहाल, इस घटना ने परीक्षा केंद्रों पर लागू किए जाने वाले नियमों और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि वे परीक्षा में पारदर्शिता और सुरक्षा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसे नियम जो उनकी पहचान और सम्मान से जुड़े हों, उन पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए। प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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