Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान ?

Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान

Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान
Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान

खागा। महोबा दिवस के अवसर पर आल्हा चौक स्थित आंबेडकर पार्क में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय कार्यक्रम में खागा विजय नगर निवासी, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय को बुंदेली समाज द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें बुंदेलखंड राज्य निर्माण आंदोलन तथा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उनके सतत और समर्पित प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राएं और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े लोग उपस्थित रहे। महोबा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बुंदेलखंड की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को याद करना तथा क्षेत्र के विकास के लिए संघर्षरत व्यक्तित्वों को सम्मानित करना था। इसी क्रम में प्रवीण पांडेय के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रवीण पांडेय ने बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जन-जन का आंदोलन बना दिया। उन्होंने अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके अपनाए। प्रधानमंत्री को 51 बार अपने खून से पत्र लिखकर उन्होंने अपनी मांग की गंभीरता और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। यह कदम देशभर में चर्चा का विषय बना और बुंदेलखंड की पीड़ा को राष्ट्रीय विमर्श में स्थान मिला।

इसके अतिरिक्त, एक लाख से अधिक “राखी पाती” अभियान के माध्यम से उन्होंने महिलाओं और बहनों को इस आंदोलन से जोड़ा। इस अभियान के तहत बहनों ने प्रधानमंत्री को राखी और पत्र भेजकर बुंदेलखंड को न्याय दिलाने की अपील की। यह पहल केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि भावनात्मक जनजागरण का प्रतीक बन गई। वक्ताओं ने कहा कि इस प्रकार के रचनात्मक और शांतिपूर्ण प्रयास लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनमत तैयार करने का सशक्त माध्यम हैं।

प्रवीण पांडेय को ‘पर्यावरण पहरूवा’ की संज्ञा भी उनके पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के कारण दी गई है। उन्होंने बुंदेलखंड क्षेत्र में जल–जंगल–जमीन की रक्षा के लिए अनेक पदयात्राएं कीं और लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। क्षेत्र में जल संकट एक गंभीर समस्या रहा है, जिसे देखते हुए उन्होंने नदी, तालाब और झीलों के संरक्षण के लिए लगातार अभियान चलाए। ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन और पारंपरिक जल संरचनाओं के संरक्षण पर उन्होंने विशेष बल दिया।

Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान
Contribution : महोबा दिवस पर पर्यावरण पहरूवा प्रवीण पांडेय हुए सम्मानित बुंदेलखंड राज्य निर्माण व जल संरक्षण आंदोलन को लेकर सराहा गया योगदान

कार्यक्रम में वर्ष 2024 में प्रकाशित उनकी पुस्तक “जलनिधियों को जीने दो” का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने इसे जल संरक्षण विषय पर एक महत्वपूर्ण वैचारिक दस्तावेज बताया। पुस्तक में बुंदेलखंड की जल समस्या, उसके ऐतिहासिक कारण, वर्तमान चुनौतियां और संभावित समाधान पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इस कृति को न केवल सामाजिक कार्यकर्ताओं, बल्कि शोधार्थियों और नीति निर्माताओं के लिए भी उपयोगी बताया गया।

बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रवीण पांडेय का संघर्ष केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की पहचान, स्वाभिमान और संसाधनों की रक्षा के लिए जिस प्रकार का समर्पण पांडेय ने दिखाया है, वह प्रेरणादायक है। बुंदेलखंडी महामंत्री अजय बरसाइयां ने भी उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व समाज की चेतना को जीवित रखते हैं और परिवर्तन की राह दिखाते हैं।

सम्मान समारोह के दौरान प्रवीण पांडेय को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए उन्होंने बुंदेली समाज और आयोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की आवाज का सम्मान है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जब तक बुंदेलखंड को उसका अधिकार और सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

उन्होंने जल संरक्षण के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि यदि जल स्रोतों को नहीं बचाया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से आह्वान किया कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा को जन आंदोलन बनाया जाए।

कार्यक्रम के अंत में बुंदेलखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हुए लोकगीत और आल्हा गायन भी प्रस्तुत किया गया। महोबा दिवस के इस आयोजन ने क्षेत्रीय अस्मिता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया। प्रवीण पांडेय का सम्मान इस बात का प्रतीक रहा कि समाज उन लोगों को याद रखता है, जो अपने क्षेत्र और प्रकृति की रक्षा के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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