Copies of the statement were burned : टेट संबंधी बयान के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, वक्तव्य की प्रतियां जलाईं ?

Copies of the statement were burned : टेट संबंधी बयान के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, वक्तव्य की प्रतियां जलाईं

Copies of the statement were burned : टेट संबंधी बयान के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, वक्तव्य की प्रतियां जलाईं ?
Copies of the statement were burned : टेट संबंधी बयान के विरोध में शिक्षकों का प्रदर्शन, वक्तव्य की प्रतियां जलाईं ?

केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी द्वारा लोकसभा में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के संबंध में दिए गए कथित शिक्षक विरोधी और अलोकतांत्रिक वक्तव्य के खिलाफ देशभर में शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। इस बयान से आहत शिक्षकों ने इसे अपने सम्मान और अधिकारों पर आघात बताते हुए विरोध दर्ज कराया है। पूरे देश के लगभग बीस लाख शिक्षकों की भावनाओं को स्वर देते हुए उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष एवं टीएफआई (टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा के आह्वान पर देश के प्रत्येक जनपद मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए।

इसी क्रम में आज जिले में भी व्यापक स्तर पर प्रदर्शन किया गया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले पांच सौ से अधिक शिक्षक शहीद पार्क में एकत्रित हुए। शिक्षकों ने काली पट्टियां बांधकर और हाथों में ‘काला कानून वापस लो’ तथा ‘शिक्षक सम्मान बहाल करो’ जैसे नारे लिखी तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध जताया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक समाज राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है और उनके सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

शहीद पार्क में आयोजित सभा के बाद शिक्षक पैदल मार्च के रूप में धनुष चौराहा होते हुए पटेल तिराहा पहुंचे। मार्च के दौरान शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और टेट अनिवार्यता से संबंधित निर्णय को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस प्रकार से टीईटी को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया अपनाई गई है, वह शिक्षकों के हितों के प्रतिकूल है और इससे लाखों शिक्षकों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

पटेल तिराहा पहुंचकर शिक्षकों ने देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके आदर्शों को याद किया। इसके बाद शिक्षा राज्य मंत्री के वक्तव्य की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते शिक्षकों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए शिक्षक नेताओं ने कहा कि टीईटी से संबंधित आदेश शिक्षकों के लिए ‘काला कानून’ के समान है। उनका तर्क था कि वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और सेवा को नजरअंदाज कर केवल परीक्षा आधारित पात्रता को अनिवार्य बनाना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से शिक्षकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है और यह कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय अस्थिर करने वाला साबित हो सकता है।

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डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा के आवाह्न का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह केवल उत्तर प्रदेश का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के शिक्षकों का प्रश्न है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होकर आवाज उठाई जा रही है। शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि अध्यादेश लाकर टीईटी अनिवार्यता आदेश को समाप्त किया जाए और शिक्षकों के हितों की रक्षा की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो मार्च माह में दिल्ली में विशाल आंदोलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर से शिक्षक भाग लेंगे।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने यह भी कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनसे जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे शिक्षकों का मनोबल गिर रहा है। उनका कहना था कि सरकार को शिक्षकों से संवाद स्थापित करना चाहिए और किसी भी निर्णय से पहले शिक्षक संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श करना चाहिए। एकतरफा निर्णय लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं।

प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के समापन पर शिक्षकों ने सामूहिक रूप से सरकार को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया और अपनी मांगों को पुनः दोहराया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज सदैव विद्यार्थियों और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखता है, लेकिन अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना भी उसका अधिकार है।

अंत में शिक्षक नेताओं ने सभी साथियों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि एक नीति के विरोध में है, जिसे वे शिक्षक विरोधी मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक चरणबद्ध तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।

इस प्रकार टीईटी से जुड़े मुद्दे पर शिक्षकों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं कि वह इस विरोध को किस प्रकार संबोधित करती है और शिक्षकों की आशंकाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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