Crime control and beat accountability : मेरठ परिक्षेत्र में यक्ष ऐप लागू, अपराध नियंत्रण और बीट जवाबदेही होगी सुदृढ़ व्यवस्था ?

Crime control and beat accountability : मेरठ परिक्षेत्र में यक्ष ऐप लागू, अपराध नियंत्रण और बीट जवाबदेही होगी सुदृढ़ व्यवस्था

Crime control and beat accountability : मेरठ परिक्षेत्र में यक्ष ऐप लागू, अपराध नियंत्रण और बीट जवाबदेही होगी सुदृढ़ व्यवस्था
Crime control and beat accountability : मेरठ परिक्षेत्र में यक्ष ऐप लागू, अपराध नियंत्रण और बीट जवाबदेही होगी सुदृढ़ व्यवस्था

मेरठ परिक्षेत्र में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिनांक 02 जनवरी 2026 को मेरठ परिक्षेत्र कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र श्री कलानिधि नैथानी द्वारा यक्ष (YAKSH) ऐप के उद्देश्य, उपयोग और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत ब्रीफिंग की गई। यह ब्रीफिंग वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें रेंज के समस्त जनपद प्रभारी, राजपत्रित अधिकारी एवं सभी थाना प्रभारी शामिल रहे।

डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र ने ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट किया कि यक्ष ऐप प्रदेश में जघन्य और सनसनीखेज अपराधों की रोकथाम के लिए एक अत्याधुनिक और तकनीकी रूप से सशक्त प्लेटफॉर्म है। इस ऐप को माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश द्वारा पुलिस मुख्यालय में औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य अपराधियों की प्रभावी निगरानी, त्वरित पहचान और बीट स्तर पर जवाबदेही तय कर कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने बताया कि यक्ष ऐप के माध्यम से किसी भी जनपद में अपराध करने वाले अपराधियों का विस्तृत रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा और उनका लगातार सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा। यह व्यवस्था अपराधियों की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखने में सहायक होगी। इससे अपराधी चाहे नाम बदल लें, स्थान बदल लें या पहचान छुपाने का प्रयास करें, फिर भी पुलिस उन्हें ट्रैक कर सकेगी।

डीआईजी ने कहा कि यक्ष ऐप के तहत बीट व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया गया है। अब प्रत्येक बीट कर्मचारी की स्पष्ट जवाबदेही तय होगी। “बीट के अपराधी की जिम्मेदारी बीट सिपाही के नाम” के सिद्धांत पर कार्य करते हुए हर बीट सिपाही अपने क्षेत्र के अपराधियों का सत्यापन उनके निवास स्थान पर जाकर करेगा। वह गांव, मोहल्ले के लोगों और परिवारजनों से बातचीत कर सही और अद्यतन जानकारी ऐप में दर्ज करेगा।

यक्ष ऐप की एक प्रमुख विशेषता यह है कि हर थाना और क्षेत्र के टॉप-10 अपराधियों का चयन पूरी तरह पारदर्शी और डेटा आधारित प्रक्रिया से किया जाएगा। इससे न केवल मनमानी की संभावना समाप्त होगी, बल्कि पुलिस की निगरानी और कार्रवाई भी अधिक सटीक और प्रभावी हो सकेगी। यह प्रणाली वास्तविक सक्रिय अपराधियों, माफियाओं, हिस्ट्रीशीटरों, जिला बदर अपराधियों, वांछित और इनामी अपराधियों पर केंद्रित रहेगी।

डीआईजी कलानिधि नैथानी ने बताया कि यक्ष ऐप में आधुनिक एआई तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें AI पावर्ड फेसियल रिकग्निशन सिस्टम उपलब्ध है, जिससे संदिग्ध अपराधियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी। इसके अलावा एआई आधारित वॉयस सर्च फीचर भी ऐप में शामिल है, जो अपराधों के अनावरण और उनकी रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस ऐप के माध्यम से पहले से दर्ज अपराधियों की पहचान चेहरे के मिलान द्वारा की जाएगी। एआई तकनीक फर्जी पहचान, नाम बदलने या फरारी की स्थिति में भी अपराधियों की सटीक पहचान में सहायता करेगी। किसी भी जघन्य या सनसनीखेज घटना के घटित होते ही यक्ष ऐप के डेटाबेस से संभावित अपराधियों की सूची और उनकी वर्तमान स्थिति की जानकारी तुरंत उपलब्ध हो जाएगी, जिससे पुलिस त्वरित कार्रवाई कर सकेगी।

Crime control and beat accountability : मेरठ परिक्षेत्र में यक्ष ऐप लागू, अपराध नियंत्रण और बीट जवाबदेही होगी सुदृढ़ व्यवस्था
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यक्ष ऐप का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यह भी है कि सीसीटीएनएस पर दर्ज अभियोग में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद संबंधित अभियुक्तों का विवरण स्वतः ऐप में प्रदर्शित होने लगे। इससे डेटा अपडेट करने में समय की बचत होगी और जानकारी अधिक विश्वसनीय बनी रहेगी। सजायाफ्ता अपराधियों और हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी भी इसी ऐप के माध्यम से की जाएगी।

इसके साथ ही ऐप में लाइसेंसी शस्त्रों और कारतूसों के सत्यापन की भी व्यवस्था की गई है। अभियुक्तों को श्रेणीवार पहचानने के लिए कलर कोडिंग सिस्टम लागू किया गया है। अपराध की संवेदनशीलता, अपराध करने का समय, प्रयुक्त हथियार और अपराध की प्रकृति के आधार पर अभियुक्त का स्कोर निर्धारित किया जाएगा, जिससे उनकी प्राथमिकता तय कर निगरानी की जा सके।

यक्ष ऐप में यह सुविधा भी उपलब्ध है कि यदि कोई अभियुक्त सत्यापन के दौरान अपना निवास स्थान छोड़कर किसी अन्य स्थान पर चला जाता है, तो बीट कर्मचारी द्वारा रिपोर्ट दर्ज करते ही संबंधित गंतव्य थाना क्षेत्र के बीट कर्मचारी को स्वतः अलर्ट मिल जाएगा। इससे अपराधी के स्थान परिवर्तन की जानकारी तत्काल साझा होगी और निगरानी में कोई अंतर नहीं आएगा।

बीट कर्मियों द्वारा अपने क्षेत्र में होने वाली आपराधिक गतिविधियों जैसे जुआ, अवैध शराब, अवैध शस्त्र, मादक पदार्थों की बिक्री और तस्करी, पशु तस्करी आदि की जानकारी भी यक्ष ऐप में दर्ज की जा सकेगी। इससे स्थानीय स्तर पर अपराध की प्रवृत्तियों का विश्लेषण करना आसान होगा।

यक्ष ऐप एडवांस्ड गैंग एनालिसिस फीचर के साथ भी आता है। इस फीचर के माध्यम से उन अपराधियों की पहचान आसानी से की जा सकेगी, जो संगठित गैंग बनाकर अपराध करते हैं। FIR और अन्य दस्तावेजों को मैन्युअली खंगालने के बजाय, यह ऐप एआई की मदद से आपस में जुड़े अपराधियों को एक गैंग के रूप में प्रस्तुत करेगा, जिससे उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करना सरल होगा।

अंत में डीआईजी मेरठ परिक्षेत्र श्री कलानिधि नैथानी ने कहा कि यक्ष ऐप के प्रभावी क्रियान्वयन से न केवल अपराध नियंत्रण मजबूत होगा, बल्कि बीट स्तर पर जवाबदेही तय होने से कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ बनेगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे इस ऐप का गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ उपयोग करें, ताकि आम जनता में सुरक्षा का भरोसा और मजबूत हो सके।

मीडिया सेल
मेरठ परिक्षेत्र, मेरठ

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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