Death of the sailor : जौनपुर में भीषण सड़क हादसा: डीसीएम ने डिवाइडर तोड़ ट्रक में मारी टक्कर, चालक और खलासी की मौत

जौनपुर। जफराबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत
- वाराणसी–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-56) पर मंगलवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि दोनों वाहनों के परखच्चे उड़ गए और मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मृतकों में एक डीसीएम चालक और एक ट्रक का खलासी शामिल हैं। हादसे के बाद हाईवे पर कई घंटों तक लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने घंटों की मशक्कत के बाद हटवाया।
हादसे का विवरण
- जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार की रात लगभग 12 बजे जफराबाद क्षेत्र के महरुपुर गांव के पास हुआ। बताया गया कि वाराणसी से लखनऊ की ओर जा रही एक डीसीएम तेज रफ्तार में थी। अचानक वाहन चालक का नियंत्रण बिगड़ गया और वह सड़क के बीच बने डिवाइडर को तोड़ते हुए विपरीत दिशा में चली गई। इसी दौरान सामने से आ रही एक ट्रक से डीसीएम की आमने-सामने टक्कर हो गई।
- टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहनों के अगला हिस्सा पूरी तरह से चकनाचूर हो गया। डीसीएम के केबिन में बैठे चालक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि ट्रक का खलासी भी गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर तड़पता रहा। कुछ ही देर में उसने भी दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान
- हादसे में मृत डीसीएम चालक की पहचान रामअचल (36 वर्ष) पुत्र गोविंद निवासी मकूनपुर, थाना लंभुआ, जनपद सुल्तानपुर के रूप में हुई है। वह वाराणसी से सामान लादकर लखनऊ की ओर जा रहा था। पुलिस के अनुसार, प्राथमिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि रामअचल को संभवतः नींद आ गई थी, जिससे वाहन अनियंत्रित हो गया और यह भीषण हादसा घटित हो गया।
- दूसरी ओर, ट्रक का खलासी जहूर अहमद मलिक, जो जम्मू का निवासी था, हादसे के दौरान चलती ट्रक से कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी भी मौके पर ही मौत हो गई। दोनों शवों को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
हादसे के बाद का मंजर
- हादसे के बाद वाराणसी–लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया। दोनों ओर से सैकड़ों वाहन फंस गए और आवागमन ठप हो गया। रात के समय अचानक हुए इस हादसे से सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे की जानकारी स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी।
- थानाध्यक्ष जफराबाद श्रीप्रकाश शुक्ल मय फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू करवाया। भारी मशीनों की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को किनारे हटाया गया। जाम की स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक को डायवर्ट कर दूसरे मार्ग से चलाया गया। करीब दो घंटे की मेहनत के बाद सड़क पर यातायात पुनः बहाल किया जा सका।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
- थानाध्यक्ष श्रीप्रकाश शुक्ल ने बताया कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। दोनों मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर जिला चिकित्सालय भेजा गया है। वाहनों को क्रेन की मदद से सड़क के किनारे लगवाया गया।
- फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया ताकि हादसे के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि डीसीएम चालक के सो जाने या झपकी आने की वजह से वाहन डिवाइडर तोड़ते हुए सामने की लेन में चला गया।
- पुलिस ने दोनों वाहनों के दस्तावेजों की जांच की है और बीमा कंपनी को सूचित कर दिया गया है। साथ ही मृतकों के परिजनों को हादसे की जानकारी दी गई है। प्रशासन ने घटना पर दुख जताया है और मृतकों के परिवारों को सहायता देने की बात कही है।

Death of the sailor : जौनपुर में भीषण सड़क हादसा: डीसीएम ने डिवाइडर तोड़ ट्रक में मारी टक्कर, चालक और खलासी की मौत ?
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
- महरुपुर गांव के आस-पास के ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। यह क्षेत्र सड़क का मोड़ और ढलान वाला हिस्सा होने के कारण अत्यंत संवेदनशील है। रफ्तार पर नियंत्रण न होने और रात में रोशनी की कमी से अक्सर यहां दुर्घटनाएँ होती रहती हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन इस क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर लगाए और स्ट्रीट लाइट की उचित व्यवस्था करे, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।
हादसे का कारण: रफ्तार और लापरवाही
- सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसे प्रायः दो कारणों से होते हैं — तेज रफ्तार और थकान के कारण नींद आ जाना। रात के समय लंबी दूरी तय करने वाले ट्रक और डीसीएम चालक अकसर पर्याप्त विश्राम नहीं लेते, जिससे सड़क पर उनका नियंत्रण कम हो जाता है।
- रात में दृश्यता घट जाने और रफ्तार के कारण दुर्घटनाएँ अधिक घातक बन जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारी वाहनों के चालकों के लिए नियमित विश्राम, ड्राइविंग के दौरान कैफीन-ब्रेक और गति सीमा का पालन अत्यंत आवश्यक है।
सड़क सुरक्षा पर सवाल
- यह हादसा एक बार फिर राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सड़कों पर बने डिवाइडर कई जगह कमजोर या क्षतिग्रस्त हैं, जिनके कारण वाहन आसानी से उन्हें तोड़ देते हैं। इसके साथ ही, सड़क किनारे चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टरों की अनुपस्थिति भी दुर्घटनाओं की एक बड़ी वजह है।
- यदि संबंधित विभाग समय-समय पर सड़क की मरम्मत और निगरानी करें, तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है। साथ ही, सड़क पर चलने वाले भारी वाहनों की फिटनेस जांच और चालकों के स्वास्थ्य परीक्षण को भी अनिवार्य किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
जौनपुर के जफराबाद क्षेत्र में मंगलवार रात हुआ यह हादसा एक बार फिर बताता है कि सड़क पर एक पल की असावधानी कितनी भारी पड़ सकती है। एक चालक की झपकी ने दो परिवारों की खुशियाँ छीन लीं। पुलिस और प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य और यातायात बहाली की, परन्तु यह घटना हमें सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की गंभीर याद दिलाती है।
तेज रफ्तार, थकान और लापरवाही — ये तीन कारण हर साल हजारों जानें ले रहे हैं। जरूरत है कि चालक, वाहन मालिक और प्रशासन सभी मिलकर सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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