Divorced daughter will also get pension : MP सरकार ने 50 साल पुराने पेंशन नियम बदले, तलाकशुदा पुत्री भी पेंशन पाएगी

मध्य प्रदेश सरकार ने परिवार पेंशन नियमों में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए तलाकशुदा बेटियों को बड़ी राहत दी है. मंगलवार को राजधानी भोपाल स्थित मंत्रालय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया. अब तलाकशुदा बेटियां भी अपने माता-पिता की परिवार पेंशन की पात्र होंगी.
Bhopal,मख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट ने 2005 के बाद जारी किए गए विविध पेंशन सर्कुलरों में सुधार कर 2026 पेंशन नियम बनाए हैं। इसके साथ ही नई पेंशन स्कीम (NPS) लागू की गई है। पारिवारिक पेंशन में केंद्र का अंश बहुत कम होने से मप्र सरकार ने अब नया निर्धारण किया है। एक नियम के तहत अब तलाकशुदा पुत्री को भी पेंशन का पात्र माना जाएगा। इसके अलावा ऐच्छिक सेवानिवृति समेत अन्य नियमों का समावेश किया गया है।
प्रदेश में 50 साल बाद पेंशन नियमों में बड़े बदलाव होंगे। अब आश्रित विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और अविवाहित पुत्रियां आजीवन परिवार पेंशन की पात्र होंगी, जिसमें 25 वर्ष की आयु सीमा समाप्त की जाएगी। आश्रितों के लिए आय सीमा भी बढ़ाई जाएगी। साथ ही, सबसे बड़ी संतान को परिवार पेंशन का लाभ मिलेगा और कई प्रक्रियात्मक परिवर्तन भी प्रस्तावित हैं।
3 लाख से अधिक कर्मचारियों के परिवार को होगा लाभ
मोहन सरकार की कैबिनेट के द्वारा लिए गए फैसले से तीन लाख से अधिक कर्मचारियों के परिवारजनों को पेंशन योजना के प्रावधान में किए गए बदलाव का फायदा मिलेगा। MSME मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि कैबिनेट ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का कार्यान्वयन) नियम 2026 तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत उपदान का संदाय) नियम 2026 का अनुमोदन किया है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावशील होंगे। नियम के प्रकाशन के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है।

परिवार पेंशन का प्रावधान
जिन कर्मचारियों को पेंशन मिल रही है। उनकी मृत्यु होने की स्थिति में परिवार पेंशन का प्रावधान किया गया है। जिसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और ई-सेवा पुस्तिका संबंधी प्रावधान किया गया है। साथ ही केन्द्र तथा मध्यप्रदेश शासन की पूर्व सेवाओं को जोड़ा जाएगा। निलंबन अवधि में अभिदाता तथा नियोक्ता के अंशदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के अंतर्गत अंशदान की दर, गणना एवं विलंब की स्थिति का उत्तरदायित्व निर्धारण के साथ सेवानिवृत्ति, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, त्यागपत्र एवं मृत्यु की दशा में निकास प्रावधान किया गया है।
यदि विभागीय जांच के दौरान नियोक्ता के अंशदान का भुगतान रोका जाना है। रिटायरमेंट के तीन महीने पहले अभिदाता अंशदान रोका जाना और रिटायरमेंट के दौरान विभागीय जांच संस्थित किए जाने का प्रावधान के साथ नियमों के निवर्तन और छूट के संबंध में राज्य शासन की शक्ति का प्रावधान शामिल है।
अब ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीसी) और एनपीएस दोनों में सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसकी तलाकशुदा बेटी भी फैमिली पेंशन की पात्र होगी। इसके लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होगी। पुनर्विवाह की स्थिति में यह पेंशन बंद हो जाएगी। इससे पहले फैमिली पेंशन का अधिकार केवल 25 वर्ष तक की अविवाहित बेटी या बेटे तक सीमित था।
सरकार ने अब मानसिक रूप से विकलांग संतान को भी इस दायरे में शामिल कर लिया है। पहले यह सुविधा केवल शारीरिक विकलांग संतान तक सीमित थी। नए प्रावधान के तहत 40% से अधिक दिव्यांगता होने पर मेडिकल बोर्ड के प्रमाणपत्र के आधार पर फैमिली पेंशन मिलेगी। इन बदलावों को मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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