Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई ?

Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई

Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई
Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई

यूपी में अपराध जगत के बदलते समीकरण भौतिक अपराध हुए कम, साइबर अपराध में ताबड़तोड़ तेजी नये उभरते तकनीक के महारथी साइबर अपराधियो से निपटने में पुराने जमाने के पुलिसवालों के छूट जाते है पसीने तकनीक के साथ कदमताल नही करने वाले पुलिसवालों को हो रही है परेशानी यूपी में साइबर अपराधियो के लिये STF और ATS की तर्ज पर है डेडिकेटेड यूनिट की जरूरत

डिजिटल युग ने अपराध की परिभाषा ही बदल दी है। जहां कल तक चाकू-बंदूक, लूट-पाट और ठगी के पारंपरिक मामलों से पुलिस की रातें जगती थीं, आज वही पुलिसवालें स्क्रीन के सामने पसीना बहा रहे हैं। भौतिक अपराधों में कमी आई है, लेकिन साइबर अपराधों ने ताबड़तोड़ तेजी पकड़ ली है। नये उभरते तकनीकी महारथी अपराधी अब चोरी नहीं, बल्कि क्लिक में करोड़ों लूट रहे हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़े इस बदलाव की तस्वीर साफ करते हैं। 2024-25 में देशभर में साइबर अपराध के मामले पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत बढ़ गए, जबकि हत्या, लूट और चोरी जैसे पारंपरिक अपराधों में 8-12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

उत्तर प्रदेश में स्थिति और गंभीर है। यहां हर महीने औसतन 4,500 से ज्यादा साइबर ठगी के केस दर्ज हो रहे हैं। फिशिंग, रैंसमवेयर, ऑनलाइन फ्रॉड, डीपफेक वीडियो से ब्लैकमेलिंग और क्रिप्टोकरेंसी स्कैम अब अपराधियों का पसंदीदा हथियार बन चुके हैं।

साइबर अपराधों के प्रकार भी बदले हैं। पहले मुख्य रूप से फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड होते थे, लेकिन अब डिजिटल अरेस्ट, डीपफेक वीडियो से ब्लैकमेलिंग, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम, रैंसमवेयर अटैक और AI-जनरेटेड फर्जी कॉल आम हो गए हैं। अपराधी अब 20-35 साल के तकनीकी विशेषज्ञ हैं—कोडिंग, डार्क वेब, वीपीएन और क्रिप्टो वॉलेट में माहिर। वे ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों के फ्लैट तक बैठकर काम करते हैं। मथुरा जैसे जिलों में हाल ही में पुलिस ने ग्रामीण साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर छापेमारी की, जहां 34 लोग गिरफ्तार हुए और सैकड़ों फरार हैं। अंतरराष्ट्रीय रैकेट भी सक्रिय हैं, जैसे अलीगढ़ में पकड़ा गया निवेश फ्रॉड गिरोह जो सात राज्यों में फैला था।

ये अपराधी अब पुराने जमाने के गुंडे नहीं हैं। ये 20-30 साल के युवा हैं, जिन्हें कोडिंग, AI, डार्क वेब और वीपीएन की पूरी जानकारी है। वे कहीं भी बैठकर काम करते हैं—बेंगलुरु के फ्लैट से लेकर गाजियाबाद के कमरे तक। एक क्लिक में लाखों अकाउंट हैक, एक व्हाट्सएप मैसेज से करोड़ों ट्रांसफर।

Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई
Felt an urgent need : उत्तर प्रदेश में पारंपरिक अपराध घटे, साइबर अपराध बढ़े; तकनीकी पुलिसिंग की सख्त जरूरत महसूस हुई

“हमारे पास अभी भी बहुत सारे कर्मचारी ऐसे है जो कंप्यूटर सिर्फ रिपोर्ट लिखने के लिए इस्तेमाल करते हैं। हैकिंग औऱ आधुनिक ठगी के तरीके देखकर उनका सिर घूम जाता है,” यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया। “साइबर अपराधी 10 मिनट में अपना लोकेशन बदल लेते हैं, जबकि हमारी टीम एफआईआर दर्ज करने में ही घंटों लगा देती है।” तकनीक के साथ कदमताल न कर पाने वाले पुलिसकर्मी अब असहाय महसूस कर रहे हैं। ट्रेनिंग में रुचि ना लेना, आधुनिक तकनीक औऱ उपकरणों को समझने का प्रयास ना करना और पुरानी मानसिकता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

हालांकि सकारात्मक पक्ष भी है। 2025 में यूपी पुलिस ने 325.25 करोड़ रुपये फ्रीज कराए, जो कुल नुकसान का लगभग 24 प्रतिशत था—2024 के 11 प्रतिशत से दोगुना सुधार। राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और हेल्पलाइन 1930 पर त्वरित शिकायत से बैंकिंग सिस्टम के साथ रीयल-टाइम कोऑर्डिनेशन संभव हुआ। कुल मिलाकर 2017 से अब तक 382.25 करोड़ रुपये रिकवर हुए। लेकिन यह प्रयास पर्याप्त नहीं।

उत्तर प्रदेश में STF (स्पेशल टास्क फोर्स) और ATS (एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड) की तर्ज पर एक डेडिकेटेड साइबर क्राइम यूनिट की तत्काल जरूरत है। इसमें साइबर फॉरेंसिक एक्सपर्ट, हैकर-ट्रेनर पुलिसकर्मी, AI विशेषज्ञ और इंटरनेशनल लिंक वाले अधिकारी शामिल हों। यूनिट को सीधे डीजीपी के अधीन रखा जाए, हर जिले में फास्ट ट्रैक रिस्पॉन्स टीम तैयार रहे जो साइबर क्राइम की घटनाओं पर तत्काल एक्शन में आये।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में डिजिटल सुरक्षा पर जोर दिया है, लेकिन अब वक्त है कि शब्दों से आगे बढ़कर अमल किया जाए। अगर यूपी साइबर अपराधियों को कुचलना चाहता है तो पुरानी पुलिस संस्कृति को अलविदा कहना होगा। अपराध जगत के समीकरण बदल चुके हैं। अब सवाल यह है कि पुलिस भी बदलने के लिए तैयार है या नहीं? अगर नहीं, तो कल के अपराधी आज के पुलिसवालों को ही स्क्रीन पर चकमा दे जाएंगे। समय बहुत कम है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।

YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q

YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews

Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/

Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c

अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।

आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता

Check Also

Security Review Meeting : ग्लोबल तनाव के बीच भारत अलर्ट: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुलाई हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक

Security Review Meeting : ग्लोबल तनाव के बीच भारत अलर्ट: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुलाई हाई-लेवल सुरक्षा समीक्षा बैठक ?

Security Review Meeting : ग्लोबल तनाव के बीच भारत अलर्ट: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *