Fifth heart attack : भारत में हर पांचवीं हार्ट अटैक से होने वाली मौत: WHO की चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट ने भारत में हृदय रोगों की गंभीर स्थिति पर प्रकाश डाला है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में पूरी दुनिया में लगभग 1 करोड़ 98 लाख लोगों ने हृदय रोगों के कारण अपनी जान गंवाई। इनमें से 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के कारण हुईं। विशेष चिंता की बात यह है कि दुनिया में होने वाली हर पांचवीं हार्ट अटैक से मृत्यु भारत में दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत हृदय रोगों के वैश्विक मानचित्र पर सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है।
भारत में हृदय रोगों की गंभीर स्थिति
भारत में हृदय रोगों की उच्च दर कई कारकों से जुड़ी है। जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित आहार, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी प्रमुख कारण हैं। शहरों में व्यस्त जीवनशैली और प्रदूषण भी हृदय रोगों को बढ़ावा देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का समय पर उपचार न होने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा और बढ़ जाता है।
देश में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों का प्रभाव न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी दिखाई देता है। हर साल लाखों लोग इस बीमारी के कारण अस्पतालों में भर्ती होते हैं, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव पड़ता है। इसके अलावा, परिवार और समाज पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। जो लोग हृदय रोग के शिकार होते हैं, उनमें कार्यक्षमता में कमी, मानसिक तनाव और जीवन की गुणवत्ता में गिरावट देखी जाती है।
WHO रिपोर्ट की मुख्य बातें
रिपोर्ट के अनुसार, हृदय रोग विश्वभर में मौत का प्रमुख कारण है। साल 2022 में लगभग 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोग के कारण हुई। इनमें से 85% मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। WHO ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते रोकथाम और उपचार के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग और उससे जुड़ी मौतों की दर और बढ़ सकती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में लोगों में हृदय रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान और इलाज में देरी, बीमारी को गंभीर और जानलेवा बना देती है। अक्सर लोग हल्के लक्षणों की अनदेखी करते हैं और डॉक्टर से परामर्श लेने में देर कर देते हैं। यही वजह है कि भारत में हृदय रोग से होने वाली मौतें विश्वसनीय आंकड़ों के अनुसार विश्व स्तर पर उच्च हैं।
हृदय रोग के कारण और जोखिम
विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोग के मुख्य कारणों में शामिल हैं:
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अनियमित जीवनशैली – दिनचर्या में व्यायाम की कमी और असंतुलित भोजन।
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अस्वस्थ आहार – तला-भुना भोजन, अधिक नमक और शुगर का सेवन।
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तनाव और मानसिक दबाव – पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में अत्यधिक तनाव।
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धूम्रपान और शराब – हृदय की कार्यक्षमता को कमजोर करना।
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हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज – समय पर इलाज न मिलने पर हृदय पर दबाव।
इन जोखिम कारकों को नियंत्रित करने से हृदय रोग और हार्ट अटैक की संभावना में काफी कमी लाई जा सकती है।

रोकथाम और उपचार
हृदय रोग से बचाव और उपचार के लिए विशेषज्ञ कई उपाय सुझाते हैं:
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नियमित स्वास्थ्य जांच – ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच समय-समय पर।
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संतुलित आहार – ताजे फल, सब्जियां, ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार।
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नियमित व्यायाम – कम से कम 30 मिनट रोजाना शारीरिक गतिविधि।
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तनाव प्रबंधन – ध्यान, योग और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान।
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धूम्रपान और शराब से परहेज – हृदय स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य।
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समय पर चिकित्सकीय उपचार – लक्षण दिखते ही डॉक्टर से परामर्श।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक पहचान और जीवनशैली में सुधार हृदय रोग की गंभीरता और इससे होने वाली मौतों को काफी हद तक कम कर सकता है।
समाज और सरकार की भूमिका
हृदय रोग से निपटने के लिए केवल व्यक्तिगत प्रयास ही पर्याप्त नहीं हैं। सरकार और समाज को मिलकर लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी। स्कूलों, कार्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में हृदय स्वास्थ्य और जीवनशैली के बारे में शिक्षा दी जानी चाहिए। स्वास्थ्य शिविर, स्क्रीनिंग कार्यक्रम और सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान लोगों को समय पर पहचान और उपचार के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
WHO ने भी देशों से अनुरोध किया है कि वे हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति और कार्यक्रम बनाएं। भारत में कई गैर-सरकारी संगठन और स्वास्थ्य संस्थान हृदय रोग रोकथाम, जागरूकता और उपचार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
निष्कर्ष
भारत में हृदय रोग की बढ़ती दर और हार्ट अटैक से होने वाली मौतें चिंताजनक स्थिति को दर्शाती हैं। हर पांचवीं हार्ट अटैक से होने वाली मृत्यु भारत में दर्ज होना एक गंभीर चेतावनी है। यह स्पष्ट संकेत है कि समय पर सावधानी, जीवनशैली में सुधार और स्वास्थ्य जागरूकता के माध्यम से लाखों जानें बचाई जा सकती हैं।
अंततः, इस रिपोर्ट से यह संदेश मिलता है कि हर व्यक्ति को अपने हृदय स्वास्थ्य के प्रति सजग और जागरूक रहना आवश्यक है। समय पर जांच, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। सरकार, स्वास्थ्य संगठन और समाज को मिलकर लोगों में जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि हृदय रोग से होने वाली मौतों को कम किया जा सके और भारत में स्वस्थ जीवन सुनिश्चित किया जा सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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