From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक ?

From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक

From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक
From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक

देशभर में सिगरेट पीने वालों के लिए बुरी खबर है। रविवार से सिगरेट पर अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी लागू हो गई है, जिसके बाद सिगरेट की कीमतों में बड़ा इज़ाफा देखने को मिल रहा है। नई दरों के लागू होते ही 10 स्टिक वाले सिगरेट पैकेट की कीमत में लगभग 22 से 25 रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है, वहीं प्रीमियम सिगरेट ब्रांड्स 50 से 55 रुपये तक महंगे हो गए हैं। इस फैसले का असर सिर्फ उपभोक्ताओं पर ही नहीं, बल्कि पूरे तंबाकू उद्योग और बाजार सप्लाई चेन पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

क्यों बढ़ाई गई एक्साइज ड्यूटी?

सरकार समय-समय पर तंबाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाती रही है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण माने जाते हैं। पहला, राजस्व बढ़ाना, और दूसरा, जनस्वास्थ्य को बेहतर बनाना। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों को स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है। टैक्स बढ़ाकर सरकार का उद्देश्य यह भी होता है कि लोग सिगरेट पीने से हतोत्साहित हों, खासकर युवा वर्ग।

इस बार एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी ऐसे समय पर की गई है जब पहले से ही महंगाई का दबाव आम आदमी पर है। ऐसे में सिगरेट की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाला है।

कीमतों में कितना इज़ाफा?

नई एक्साइज ड्यूटी लागू होने के बाद अलग-अलग श्रेणी की सिगरेट पर अलग असर पड़ा है।

  • लोकप्रिय मिड-रेंज सिगरेट:
    10 स्टिक वाले पैकेट पर 22–25 रुपये तक की बढ़ोतरी।

  • प्रीमियम सिगरेट ब्रांड्स:
    कीमतों में 50–55 रुपये तक का उछाल।

  • लॉन्ग और फिल्टर सिगरेट:
    इन पर टैक्स का असर और ज्यादा देखा जा रहा है, जिससे खुदरा कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

कई शहरों में उपभोक्ताओं को अभी स्पष्ट कीमत नहीं मिल पा रही, क्योंकि दुकानदार पुराने स्टॉक और नए रेट के बीच असमंजस में हैं।

मैन्युफैक्चरर्स ने क्यों रोका स्टॉक?

एक्साइज ड्यूटी बढ़ने की घोषणा के बाद कई सिगरेट मैन्युफैक्चरर्स ने अस्थायी रूप से स्टॉक रोक दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण है नई टैक्स संरचना के अनुसार कीमतों का पुनर्मूल्यांकन (repricing)।

कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि नया स्टॉक सही MRP के साथ ही बाजार में उतारा जाए, ताकि बाद में किसी तरह की कानूनी या टैक्स संबंधी समस्या न हो। इसका नतीजा यह हुआ है कि कई जगहों पर सिगरेट की अस्थायी कमी देखी जा रही है।

दुकानदार और उपभोक्ता दोनों परेशान

खुदरा दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक बढ़ी हुई कीमत सुनकर हैरान हो रहे हैं। कई जगहों पर बहस की स्थिति तक बन रही है। दुकानदारों के लिए भी यह स्थिति आसान नहीं है, क्योंकि:

  • पुराने स्टॉक पर नई कीमतें लागू नहीं हो सकतीं

  • नए स्टॉक की सप्लाई सीमित है

  • ग्राहकों की नाराज़गी सीधे दुकानदारों पर निकल रही है

वहीं उपभोक्ताओं में भी दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग मजबूरी में बढ़ी कीमत पर सिगरेट खरीद रहे हैं, जबकि कई लोग खपत कम करने या सस्ते विकल्पों की तलाश में हैं

From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक
From consumer to market : सिगरेट हुई महंगी: एक्साइज ड्यूटी बढ़ने का असर आम उपभोक्ता से लेकर बाजार तक

क्या घटेगी सिगरेट की खपत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सिगरेट की कीमत बढ़ने से खासतौर पर युवा और निम्न आय वर्ग में खपत पर असर पड़ सकता है। हालांकि, लंबे समय से सिगरेट पीने वालों पर इसका असर सीमित रहने की संभावना जताई जाती है।

पहले भी देखा गया है कि टैक्स बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए बिक्री में गिरावट आती है, लेकिन बाद में बाजार धीरे-धीरे खुद को नई कीमतों के अनुसार ढाल लेता है।

अवैध सिगरेट का खतरा?

कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के साथ एक और चिंता जुड़ी है — अवैध और तस्करी वाली सिगरेट। जब वैध सिगरेट महंगी होती हैं, तो सस्ती अवैध सिगरेट बाजार में जगह बना सकती हैं, जो न तो स्वास्थ्य मानकों पर खरी उतरती हैं और न ही सरकार को कोई टैक्स देती हैं।

अगर प्रवर्तन एजेंसियों ने सख्ती नहीं बरती, तो यह समस्या और बढ़ सकती है।

आगे क्या?

आने वाले कुछ दिनों में बाजार के स्थिर होने की उम्मीद है। जैसे-जैसे नया स्टॉक आएगा, कीमतें स्पष्ट होंगी और उपभोक्ता नई दरों के आदी हो जाएंगे। वहीं तंबाकू कंपनियां भी अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती हैं — जैसे छोटे पैक, प्रमोशनल ऑफर या अन्य उत्पादों पर फोकस।

निष्कर्ष

एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी से सिगरेट अब एक बार फिर आम आदमी की पहुंच से थोड़ी और दूर होती दिख रही है। जहां सरकार इसे स्वास्थ्य और राजस्व के नजरिए से सही कदम मानती है, वहीं उपभोक्ता और कारोबारियों के लिए यह फैसला तत्काल तौर पर परेशानी भरा है। अब देखना यह होगा कि यह कदम लंबे समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य पर कितना सकारात्मक असर डाल पाता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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