Ghaziabad Police : बाइक बोट घोटाले के आरोपी और सिपाहियों के रिश्ते खंगाल रही गाजियाबाद पुलिस, जेल से भगाने की नाकाम कोशिश की थी

गाजियाबाद:
- जिला कारागार में बंद बाइक बोट घोटाले के आरोपी बिजेंद्र को अक्सर सिपाही सचिन ही पेशी पर ले जाता था। पेशी नोटिफिकेशन आने पर सचिन अपनी ड्यूटी लगवाता था। सितंबर में ही वह दो से तीन बार गया। जांच में पता चला कि 22 सितंबर और 15 सितंबर को जब विजेंद्र पेशी पर गया तो रिकॉर्ड में सिपाही सचिन कुमार की ही ड्यूटी लगी मिली। ऐसे में अधिकारियों को शक है कि बिजेंद्र और सिपाही सचिन के बीच कोई न कोई रिश्ता तो है। अब इनके बीच नजदीकियों को पुलिस खंगाल रही है।
- डासना स्थित जिला कारागार में बंद बाइक बोट घोटाले के आरोपी बिजेंद्र को पेशी पर ले जाने के बहाने भगाने की साजिश रचने और भगाने के प्रयास में दो सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस लाइंस स्थित गणना कार्यालय में तैनात सिपाही सचिन कुमार और राहुल कुमार बंदियों की लिस्ट लेकर शनिवार को जिला कारागार पहुंचे। इसमें छह बंदियों के नाम थे।दोनों सिपाही केवल बिजेंद्र को ले जाना चाहते थे। शक होने पर जेल प्रशासन ने पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया तो साजिश का पर्दाफाश हुआ। दोनों सिपाही सचिन कुमार और राहुल कुमार के खिलाफ कविनगर थाने में केस दर्ज किया गया। एसीपी कविनगर सूर्यबली मौर्य ने बताया कि केस दर्ज कर दोनों आरोपी सिपाहियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
सिपाही सचिन लगवाता था अपनी ड्यूटी
- सूत्रों का कहना कि करोड़ों रुपये के बाइक बोट घोटाला मामले का आरोपी होने के चलते विजेंद्र को पेशी पर अकसर सिपाही सचिन कुमार ही ले जाता था। पेशी को नोटिफिकेशन आने पर सिपाही सचिन विजेंद्र को ले जाने के लिए अपनी ड्यूटी लगवाता था। सितंबर माह में ही वह दो से तीन बार गया है। जानकारी के अनुसार, 22 सितंबर और 15 सितंबर को भी जब बिजेंद्र पेशी पर गया तो रिकॉर्ड में सिपाही सचिन कुमार की ही ड्यूटी लगी मिली है। पूर्व में भी ऐसा ही रिकॉर्ड जांच में पुलिस को मिला है। अधिकारियों का कहना है कि सबकी भूमिका की जांच की जा रही है।

Ghaziabad Police : बाइक बोट घोटाले के आरोपी और सिपाहियों के रिश्ते खंगाल रही गाजियाबाद पुलिस, जेल से भगाने की नाकाम कोशिश की थी ? अफसरों को झांसा देने के लिए लिया वंश का नाम
- जब जेल प्रशासन ने बिजेंद्र को देने से मना किया तो दोनों सिपाही तुरंत अपने कार्यालय पहुंच गए। जेल प्रशासन से जब पुलिस अधिकारियों को इसकी जानकारी मिली और पेशी के लिए किसी की ड्यूटी नहीं होने की बात सामने आई तो दोनों सिपाहियों की भूमिका संदिग्ध नजर आई। इसके बाद पुलिस अधिकारियों ने सिपाहियों से पूछताछ की। आरोपी सिपाही सचिन कुमार ने अधिकारियों को गुमराह करने के लिए बंदी वंश का नाम लिया। उसने कहा कि वंश उसके गांव का है। उससे रुपये का कुछ लेनदेन है। इसीलिए वह उससे मिलने के लिए गया था। वंश का नाम भी लिस्ट में था। सिपाहियों के बयान में विरोधाभास होने से आरोपियों की संदिग्धता स्पष्ट हो गई।
सचिन 2016 और राहुल 2015 बैच के सिपाही
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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