Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस ?

Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस

Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस
Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस

प्रस्तुति: नवीन कुमार दीक्षित, पर्यावरण मित्र, रूरा, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश

पर्यावरण उजड़ने से ना हो विवश, इसलिए हमें वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के प्रति जागरूक होना चाहिए। हर वर्ष 3 मार्च को दुनिया भर में विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझें और वन्य जीवों से प्रेम और संरक्षण की भावना विकसित करें। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि वन्य जीवों और वनस्पतियों का संरक्षण न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह मानव जीवन की खुशियों और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।

विश्व वन्यजीव दिवस की स्थापना का इतिहास 20 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 68वें सत्र में हुआ। उस समय महासभा ने यह निर्णय लिया कि हर वर्ष 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लोग वन्य जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के महत्व को समझें, उनकी लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए प्रयास करें और उनके प्रति संवेदनशीलता विकसित करें। 3 मार्च का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस दिन 1973 में CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) को अपनाया गया था। CITES एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जो लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को विनियमित करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापार किसी भी प्रजाति के अस्तित्व के लिए खतरा न बने और जैव विविधता सुरक्षित रहे।

इससे पहले, 3 से 14 मार्च 2013 तक बैंकॉक, थाईलैंड में आयोजित CITES के पक्षकारों के सम्मेलन (CoP16) की 16वीं बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के रूप में नामित करने की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को थाईलैंड सरकार ने प्रायोजित किया था, जिसने CITES CoP16 का सफल आयोजन किया और इसके परिणामों को संयुक्त राष्ट्र महासभा को प्रेषित किया। इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस घोषित किया।

CITES का महत्व और वैश्विक प्रभाव
CITES का सचिवालय अन्य संयुक्त राष्ट्र संगठनों के सहयोग से वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण की दिशा में कार्य करता है और विश्व वन्यजीव दिवस के सफल आयोजन में अहम भूमिका निभाता है। CITES में वर्तमान में 183 सदस्य देश शामिल हैं, जो लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित और विनियमित करने में योगदान देते हैं। यह जैव विविधता संरक्षण के लिए दुनिया के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली उपकरणों में से एक है। CITES यह सुनिश्चित करता है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के कारण किसी भी प्रजाति के अस्तित्व को खतरा न हो और सभी देशों में वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए कानून और नियम लागू हों।

विश्व वन्यजीव दिवस के माध्यम से लोगों में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है। यह दिवस विभिन्न कार्यक्रमों, प्रदर्शनों और शिक्षण कार्यशालाओं के माध्यम से बच्चों, युवाओं और जनता को वन्य जीवों और वनस्पतियों की विविधता, उनके महत्व और उनके संरक्षण की आवश्यकता से अवगत कराता है। बच्चों में यह संदेश फैलाना विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि भविष्य में वे ही पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षक बनेंगे।

Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस
Global Awareness Day : विश्व वन्यजीव दिवस: वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के लिए वैश्विक जागरूकता दिवस

वन्य जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण का महत्व केवल जैव विविधता तक सीमित नहीं है।

यह मानव जीवन, पारिस्थितिकी तंत्र और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। वन्य जीव और वनस्पतियां पर्यावरण के संतुलन में योगदान देती हैं, जल, वायु और मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करती हैं, और प्राकृतिक आपदाओं से लड़ने में सहायक होती हैं। इसके अलावा, पर्यटन, कृषि और औषधीय उपयोगों के लिए वन्य जीव और वनस्पतियां महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसलिए उनके संरक्षण के बिना न केवल पर्यावरण खतरे में आएगा, बल्कि मानव जीवन भी अस्थिर हो जाएगा।

विश्व वन्यजीव दिवस का संदेश सरल है – “वन्य जीवों से करें प्यार, जीवन में खुशियां मिलेंगी अपार।” यह संदेश केवल संरक्षण के लिए प्रेरित करता है, बल्कि यह यह भी बताता है कि प्रकृति और मानव जीवन का आपसी संबंध गहरा और आवश्यक है। इसके माध्यम से यह संदेश भी फैलता है कि वन्य जीवों के प्रति संवेदनशील होना और उनकी सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है।

इस दिवस के अवसर पर विभिन्न संगठन, स्कूल, कॉलेज और सामाजिक समूह वन्य जीव संरक्षण, जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण और नृशंस शिकार रोकने जैसे कार्यक्रम आयोजित करते हैं। लोग वन्य जीवों और उनके आवास के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं और संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों में योगदान देते हैं। बच्चों के लिए चित्रकला, निबंध और भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से उन्हें इस विषय पर शिक्षा दी जाती है, ताकि वे पर्यावरण और जैव विविधता के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनें।

विश्व वन्यजीव दिवस हमें यह भी याद दिलाता है कि मानव गतिविधियों के कारण वन्य जीव और वनस्पतियां खतरे में हैं। जंगलों की कटाई, अवैध शिकार, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आवासों का विनाश वन्य जीवों के अस्तित्व को सीधे प्रभावित करता है। इसके परिणामस्वरूप कई प्रजातियां लुप्तप्राय हो गई हैं। इसलिए इस दिवस पर यह संदेश फैलाया जाता है कि हमें वन्य जीवों के संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।

विश्व वन्यजीव दिवस केवल जागरूकता का दिन नहीं है, बल्कि यह कार्रवाई का दिन भी है। हर नागरिक, संस्था और सरकार इस दिन को अवसर के रूप में लेते हुए ऐसे कदम उठाते हैं जो वन्य जीवों और वनस्पतियों की रक्षा और संरक्षण में सहायक हों। यह वैश्विक प्रयास यह सुनिश्चित करता है कि आने वाली पीढ़ियां भी प्रकृति और जैव विविधता की सुंदरता का अनुभव कर सकें।

अतः 3 मार्च का विश्व वन्यजीव दिवस न केवल लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह लोगों में सुरक्षा, संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना पैदा करने वाला दिन भी है। यह दिवस हमें प्रेरित करता है कि हम सभी अपने आसपास के पर्यावरण, वन्य जीव और वनस्पतियों के प्रति जिम्मेदार बनें और उन्हें बचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।

183 सदस्य देशों के सहयोग से CITES ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रजातियों के अस्तित्व को खतरे में न डाले और जैव विविधता सुरक्षित रहे। इस वैश्विक प्रयास का उद्देश्य केवल संरक्षण ही नहीं, बल्कि लोगों में जागरूकता, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सम्मान बढ़ाना भी है।

अतः यह दिन हम सभी को यह याद दिलाता है कि वन्य जीवों का संरक्षण केवल सरकारी या सामाजिक संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उनके बिना जीवन की स्थिरता और खुशहाली अधूरी है। इस अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि हम वन्य जीवों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना अपने जीवन में अपनाएंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखेंगे।

विश्व वन्यजीव दिवस का यह संदेश आज से लेकर भविष्य तक सभी देशों और लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बने। यह हमें याद दिलाता है कि प्रकृति और मानव जीवन का संतुलन बनाए रखना, वन्य जीवों और वनस्पतियों के अस्तित्व की रक्षा करना, और जैव विविधता की सुरक्षा करना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।

YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q

YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews

Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/

Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_cZ

अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।

आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता

Check Also

Eyewitness account : दुबई में मिसाइल हमलों के बीच फंसीं ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं, बयां किया आंखों देखा हाल

Eyewitness account : दुबई में मिसाइल हमलों के बीच फंसीं ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं, बयां किया आंखों देखा हाल ?

Eyewitness account : दुबई में मिसाइल हमलों के बीच फंसीं ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं, बयां …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *