Grief and emptiness : विमान हादसे में अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र राजनीति में शोक और खालीपन

महाराष्ट्र की राजनीति में बुधवार सुबह उस समय शोक की लहर दौड़ गई
- जब उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजित पवार के विमान हादसे में निधन की खबर सामने आई। इस दुखद समाचार ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। बताया गया कि अजित पवार किसी आधिकारिक कार्यक्रम के सिलसिले में यात्रा पर थे, तभी उनका विमान तकनीकी कारणों से दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा राहत टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
- महाराष्ट्र सरकार ने इस अपूरणीय क्षति को देखते हुए तत्काल तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। राज्य भर में सरकारी भवनों पर झंडे आधे झुका दिए गए और सभी सरकारी कार्यक्रम स्थगित कर दिए गए। मुख्यमंत्री सहित राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अजित पवार के निधन को महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक गहरी क्षति बताया। सरकार की ओर से यह भी घोषणा की गई कि अजित पवार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक क्षेत्र बारामती स्थित विद्या प्रतिष्ठान मैदान में सुबह 11 बजे संपन्न होगा, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।
- अजित पवार का राजनीतिक जीवन लंबा और प्रभावशाली रहा। वे कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे और वित्त, सिंचाई तथा ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभाला। एक कुशल प्रशासक और सख्त निर्णय लेने वाले नेता के रूप में उनकी पहचान थी। खासकर पश्चिमी महाराष्ट्र में उनका प्रभाव अत्यंत मजबूत माना जाता था और बारामती उनकी कर्मभूमि रही। उनके नेतृत्व में कई विकास परियोजनाओं को गति मिली, जिनका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण जनता को मिला।

उनके निधन की खबर मिलते ही देश-विदेश से नेताओं,
- सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। एनसीपी कार्यकर्ताओं के लिए यह सदमा बेहद गहरा था, क्योंकि अजित पवार न केवल पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार थे, बल्कि जमीनी स्तर से जुड़े नेता भी थे।
- बारामती और आसपास के इलाकों में उनके समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जो अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन ने ट्रैफिक व कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। राजकीय शोक के दौरान सभी सांस्कृतिक और मनोरंजन कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है।
- स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में भी शोक सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। अजित पवार के राजनीतिक सफर को याद करते हुए कई विश्लेषकों ने कहा कि वे विवादों के बावजूद एक प्रभावशाली और निर्णायक नेता थे, जिनकी प्रशासनिक पकड़ मजबूत थी। उनका अचानक इस तरह जाना महाराष्ट्र की राजनीति में एक खालीपन छोड़ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।
- राज्य की जनता, खासकर किसान और ग्रामीण वर्ग, उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में याद करेगा जिसने विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दिया। इस दुखद घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं का योगदान कितना महत्वपूर्ण होता है और उनका जाना समाज के लिए कितनी बड़ी क्षति बन जाता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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