Gyanendra Tyagi : कोहरे से आलू, सरसों फसलों में रोग बढ़े, भारी नुकसान की आशंका: प्रगतिशील किसान ज्ञानेन्द्र त्यागी

लगातार बढ़ते कोहरे और बदलते मौसम के कारण
- किसानों की फसलों पर गहरा असर पड़ रहा है। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष एवं प्रगतिशील किसान ज्ञानेन्द्र त्यागी ने इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि वर्तमान समय में पड़ रहा घना कोहरा किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। खासतौर पर रबी की प्रमुख फसलों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाने की आशंका है।
- ज्ञानेन्द्र त्यागी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से लगातार सुबह और रात के समय घना कोहरा पड़ रहा है। कोहरे के कारण खेतों में नमी अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे फसलों में विभिन्न प्रकार के रोग और कीटों का प्रकोप तेजी से फैलने लगता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से आलू की फसल इस समय सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। आलू की फसल में चेपा (एफिड) का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जो पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है। इसके अलावा आलू में ब्लाइट और झुलसा रोग लगने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। ये रोग पत्तियों को झुलसा देते हैं, जिससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है।
उन्होंने बताया कि आलू की खेती में यदि समय रहते
- इन रोगों पर नियंत्रण न किया जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। कोहरे के साथ-साथ कम धूप निकलने के कारण खेतों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जो फफूंद और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। इसका सीधा असर किसानों की मेहनत और लागत पर पड़ता है, क्योंकि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर पहले ही भारी खर्च हो चुका होता है।
- ज्ञानेन्द्र त्यागी ने आगे बताया कि सरसों की फसल भी कोहरे से अछूती नहीं है। सरसों की फसल में इस मौसम में चेपा और फफूंदी रोग लगने की संभावना काफी बढ़ जाती है। चेपा सरसों के पौधों से रस चूसकर उनकी बढ़वार को रोक देता है, जिससे दाने छोटे रह जाते हैं और तेल की मात्रा भी कम हो जाती है। वहीं फफूंदी रोग के कारण पत्तियों पर सफेद या पीले धब्बे पड़ने लगते हैं, जिससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- उन्होंने कहा कि यदि मौसम इसी प्रकार बना रहा, तो सरसों और आलू दोनों फसलों में भारी भरकम नुकसान होने की आशंका है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि अधिकांश किसान अपनी आजीविका के लिए इन्हीं फसलों पर निर्भर रहते हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की है, ऐसे में फसल खराब होने पर उनकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

ज्ञानेन्द्र त्यागी ने यह भी बताया कि
- सरसों की खेती के क्षेत्र में उनके परिवार को विशेष अनुभव और सम्मान प्राप्त है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि वर्ष 2019 में उनकी पत्नी एवं प्रगतिशील महिला किसान सारिका त्यागी को सरसों उत्पादन में उत्कृष्ट कार्य के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पूरे प्रदेश स्तर पर सम्मानित किया गया था। इस अवसर पर उन्हें एक लाख रुपये का चेक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था। यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उनके परिवार को सरसों की खेती के बारे में गहरी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव है।
- उन्होंने कहा कि इसी अनुभव के आधार पर वह किसानों को समय-समय पर सलाह देते रहते हैं। उनका मानना है कि कोहरे के इस दौर में किसानों को अपनी फसलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। जैसे ही किसी प्रकार के रोग या कीट का प्रारंभिक लक्षण दिखाई दे, तुरंत कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर उचित दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। साथ ही, खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि अतिरिक्त नमी फसलों को नुकसान न पहुंचा सके।
- ज्ञानेन्द्र त्यागी ने सरकार और कृषि विभाग से भी अपील की कि वे किसानों की इस समस्या को गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग को चाहिए कि वह गांव-गांव जाकर किसानों को कोहरे से होने वाले रोगों की जानकारी दे और उनसे बचाव के उपाय बताए। इसके साथ ही, यदि फसलों को व्यापक स्तर पर नुकसान होता है, तो सरकार को किसानों को उचित मुआवजा भी प्रदान करना चाहिए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें।
- अंत में उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी मेहनत से ही देश का पेट भरता है। ऐसे में बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं से किसानों की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं और किसानों को उचित मार्गदर्शन व सहायता मिले, तो इस नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से भी धैर्य रखने और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील की, ताकि वे इस कठिन समय से मजबूती के साथ बाहर निकल सकें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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