Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट ?

Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट

Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट
Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट

देहरादून में साइबर अपराधियों द्वारा एक 70 वर्षीय महिला से लगभग 3 करोड़ रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। जालसाजों ने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए पीड़िता को 60 दिनों तक मानसिक दबाव और डराने-धमकाने की तकनीक से भयभीत किया। महिला को वीडियो कॉल पर घंटों डराया गया, और बाद में उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपए ट्रांसफर करवा लिए गए।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने शुक्रवार को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि पिछले साल 1 सितंबर को उन्हें एक वीडियो कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को CBI अधिकारी बताया और दावा किया कि उनका फोन नंबर 68 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है। इसके बाद जालसाजों ने लगातार दबाव बनाकर महिला से विभिन्न बैंक ट्रांजेक्शन करवाए। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, और साइबर टीम ठगों के लोकेशन और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण कर रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के साइबर अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। तकनीकी रूप से प्रशिक्षित जालसाज लोग ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और मोबाइल ऐप्स का दुरुपयोग कर लोगों को फंसा रहे हैं। बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कम जानकार लोग इस प्रकार के फ्रॉड के लिए सबसे संवेदनशील माने जाते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लोगों को चेतावनी दे रहे हैं कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और संदिग्ध गतिविधि तुरंत पुलिस या बैंक को सूचित करें।

वहीं, स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत और दुनिया दोनों के लिए एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 2022 में पूरी दुनिया में लगभग 1 करोड़ 98 लाख लोग हृदय रोगों के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से करीब 85% मौतें हार्ट अटैक के कारण हुई हैं। विशेष रूप से भारत में दिल की बीमारियों की वजह से होने वाली मौतों की दर चिंताजनक है। हर पांचवीं मौत, जो कि विश्व स्तर पर हार्ट अटैक से होती है, भारत में होती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, दिल की बीमारियों में वृद्धि के कई कारण हैं, जैसे अनियमित जीवनशैली, असंतुलित आहार, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और उच्च रक्तचाप। WHO ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते रोकथाम और उपचार के कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हृदय रोग और उससे जुड़ी मौतों में और बढ़ोतरी होगी।

भारत में हृदय रोग से बचाव के लिए विशेषज्ञ नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, शारीरिक व्यायाम और तनाव प्रबंधन को जरूरी मानते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का समय पर इलाज हृदय संबंधी जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। साथ ही धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हार्ट अटैक की संभावना बढ़ाता है।

Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट
Horrific reports of illnesses : देहरादून में साइबर ठगी और भारत में दिल की बीमारियों की भयावह रिपोर्ट

इस रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल उपचार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता और समय पर जीवनशैली में बदलाव जरूरी हैं। स्कूलों, ऑफिसों और सामुदायिक केंद्रों में हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। लोगों को बताया जा रहा है कि हृदय रोग के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना जीवन रक्षक हो सकता है।

दोनों ही मामलों—साइबर ठगी और हृदय रोग—में एक समान पहलू है: सतर्कता और जानकारी की कमी। जहां तकनीकी धोखाधड़ी में सतर्कता और जागरूकता से करोड़ों रुपए की ठगी रोकी जा सकती है, वहीं स्वास्थ्य के मामले में समय पर सावधानी और जीवनशैली सुधार से लाखों मौतों को रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दुनिया और स्वास्थ्य दोनों ही क्षेत्रों में लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। साइबर अपराध से बचाव के लिए दो-स्तरीय प्रमाणीकरण, मजबूत पासवर्ड, संदिग्ध लिंक से बचाव और व्यक्तिगत डेटा साझा न करने की आदत विकसित करना आवश्यक है। इसी तरह, हृदय रोग से बचाव के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, धूम्रपान से बचाव और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।

साइबर अपराध और स्वास्थ्य खतरे दोनों ही आधुनिक जीवन की चुनौतियां हैं। सरकार और निजी संस्थान विभिन्न स्तरों पर अभियान चला रहे हैं। साइबर सुरक्षा के लिए पुलिस और बैंक मिलकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में WHO और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान हृदय रोग रोकथाम के लिए कार्यक्रम चला रहे हैं।

इन घटनाओं ने यह दिखाया है कि चाहे डिजिटल फ्रॉड हो या स्वास्थ्य संकट, सतर्कता, जानकारी और समय पर कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। देहरादून की 70 वर्षीय महिला की घटना एक चेतावनी है कि साइबर ठगी किसी को भी निशाना बना सकती है। वहीं हृदय रोग संबंधी आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत में लाखों लोग इस खतरे के अधीन हैं।

आखिरकार, यह आवश्यक है कि आम जनता दोनों मामलों में सजग रहे—अपने डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा सुनिश्चित करे और अपनी स्वास्थ्य दिनचर्या पर ध्यान दे। समय रहते कदम उठाने से आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर नुकसान को रोका जा सकता है।

इन दो घटनाओं ने आधुनिक जीवन की दोनों प्रमुख चुनौतियों—साइबर सुरक्षा और हृदय स्वास्थ्य—को उजागर किया है और लोगों को जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता की याद दिलाई है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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