Issued instructions : जिलाधिकारी कविता मीना ने पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए

हापुड़, 17 जुलाई 2026। जनपद हापुड़ के कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में पंचायती राज विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्राम पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने 15वें वित्त आयोग, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) तथा अन्य ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को सभी कार्य समयबद्ध, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत में संबंधित अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिलाधिकारी ने प्रत्येक योजना की स्थिति की बारीकी से समीक्षा करते हुए कहा कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध कराई जा रही धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी अधिकारी नियमित रूप से कार्यों की निगरानी करें।
जिलाधिकारी कविता मीना ने विशेष रूप से ग्राम पंचायतों में स्वीकृत निर्माण कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराए जाएं और निर्माण सामग्री से लेकर कार्य निष्पादन तक प्रत्येक स्तर पर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए क्योंकि यह सीधे ग्रामीण जनता के हितों से जुड़ा विषय है।
बैठक में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत प्राप्त धनराशि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि उपलब्ध बजट का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर पेयजल व्यवस्था, नाली निर्माण, सड़क निर्माण, सामुदायिक शौचालयों के निर्माण एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाए जिनसे अधिक से अधिक ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।
मनरेगा योजना की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों से श्रमिकों को अधिकतम रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र श्रमिक को योजना के तहत 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी किया जाना चाहिए, जिससे ग्रामीण विकास को गति मिले।
जिलाधिकारी ने मनरेगा के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों का सोशल ऑडिट और जियो टैगिंग अनिवार्य रूप से कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सोशल ऑडिट से योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ती है और जनता को भी विकास कार्यों की जानकारी मिलती है। वहीं जियो टैगिंग के माध्यम से प्रत्येक परियोजना की वास्तविक स्थिति की निगरानी करना आसान होता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी विकास कार्यों का डिजिटल रिकॉर्ड भी समय पर अपडेट किया जाए।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने ओडीएफ प्लस (ODF Plus) के अंतर्गत संचालित गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में निर्मित सामुदायिक शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए और उनकी उपयोगिता बनी रहे। इसके साथ ही ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि गांवों में स्वच्छता का वातावरण बना रहे।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ग्रामीणों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जानी चाहिए। ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता संबंधी गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने तथा लोगों को स्वच्छ वातावरण के महत्व के बारे में जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में जिलाधिकारी ने ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सेवाओं की उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों में जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र तथा अन्य आवश्यक सेवाएं निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी सेवाएं सरल एवं पारदर्शी ढंग से उपलब्ध हों।
जिलाधिकारी कविता मीना ने पंचायत स्तर पर शिकायत निवारण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में शिकायत पेटिका सक्रिय रखी जाए तथा हेल्पलाइन व्यवस्था का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने ग्राम प्रधानों और पंचायत सचिवों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से ग्रामीणों की समस्याएं सुनें और स्थानीय स्तर पर ही अधिकतम समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें। यदि किसी समस्या का समाधान पंचायत स्तर पर संभव न हो तो उसे संबंधित विभाग तक तत्काल पहुंचाया जाए ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद से विकास कार्यों में तेजी आएगी और लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्रुति शर्मा ने भी विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की तथा अधिकारियों को शासन के निर्देशों के अनुसार कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि विकास योजनाओं का लाभ समय पर ग्रामीणों तक पहुंच सके।
बैठक में जनपद के सभी खंड विकास अधिकारी, पंचायती राज विभाग के अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजट उपयोग, लंबित कार्यों तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की। जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण करें और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का स्वयं मूल्यांकन करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण विकास की आधारशिला है। यदि ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो तो ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, स्वच्छता और नागरिक सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार संभव है। जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का उद्देश्य भी यही है कि विकास योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे और सरकारी संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना ने सभी अधिकारियों से शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से ही संभव है। यदि सभी संबंधित पक्ष समन्वय के साथ कार्य करेंगे तो ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को नई गति मिलेगी और ग्रामीण जनता को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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