Knowledge and art : बसंत पंचमी कल, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की होगी आराधना ?

Knowledge and art : बसंत पंचमी कल, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की होगी आराधना

Knowledge and art : बसंत पंचमी कल, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की होगी आराधना
Knowledge and art : बसंत पंचमी कल, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की होगी आराधना

कल यानी 23 जनवरी को पूरे देश में बसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन विद्या, ज्ञान, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। बसंत पंचमी को मां सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में भी जाना जाता है, इसलिए इस दिन उनका पूजन-अर्चन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी अत्यंत व्यापक है। इस दिन से ऋतु परिवर्तन का संकेत मिलता है और वसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। प्रकृति में हरियाली, फूलों की बहार और वातावरण में नई ऊर्जा का संचार दिखाई देता है। इसी कारण इसे बसंत पंचमी कहा जाता है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए विशेष दिन

बसंत पंचमी का विशेष महत्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, विद्वानों, कलाकारों और संगीत साधकों के लिए होता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि, विवेक, स्मरण शक्ति और एकाग्रता में वृद्धि होती है। कई स्थानों पर इस दिन बच्चों की विद्यारंभ संस्कार भी कराया जाता है, जिसमें छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है।

विद्यालयों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में इस अवसर पर विशेष पूजा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की जाती है। विद्यार्थी अपनी पुस्तकों, कलम, वाद्य यंत्रों और अध्ययन सामग्री को मां के चरणों में रखकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मां सरस्वती का स्वरूप और महत्व

मां सरस्वती को श्वेत वस्त्र धारण किए, वीणा धारण किए हुए और हंस पर विराजमान दर्शाया जाता है। उनका श्वेत रंग पवित्रता, ज्ञान और शांति का प्रतीक है। वीणा संगीत और कला की प्रतीक है, जबकि हंस विवेक और सत्य-असत्य में भेद करने की क्षमता को दर्शाता है। उनके हाथों में पुस्तक ज्ञान का प्रतीक मानी जाती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती की कृपा से मनुष्य को अज्ञान से मुक्ति मिलती है और जीवन में सही दिशा प्राप्त होती है। यही कारण है कि ज्ञान प्राप्ति के इच्छुक लोग विशेष रूप से इस दिन मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

पीले रंग का विशेष महत्व

बसंत पंचमी पर पीले रंग का विशेष महत्व होता है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं और पूजा में पीले फूल, पीले फल और पीले मिष्ठान चढ़ाए जाते हैं। पीला रंग समृद्धि, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन केसरिया चावल, बूंदी के लड्डू, हलवा और खीर जैसे व्यंजन बनाए जाते हैं।

कई स्थानों पर लोग पतंग उड़ाकर भी बसंत पंचमी का उत्सव मनाते हैं। खासकर उत्तर भारत में यह परंपरा काफी लोकप्रिय है।

Knowledge and art : बसंत पंचमी कल, विद्या और कला की देवी मां सरस्वती की होगी आराधना
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सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव

बसंत पंचमी केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक उत्सव भी है। इस अवसर पर कई जगहों पर संगीत, नृत्य, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। कलाकारों के लिए यह दिन विशेष प्रेरणा का स्रोत माना जाता है।

ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक बसंत पंचमी का उत्साह देखने को मिलता है। मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है और श्रद्धालुओं की भीड़ मां सरस्वती के दर्शन के लिए उमड़ती है।

आध्यात्मिक संदेश

बसंत पंचमी हमें यह संदेश देती है कि ज्ञान ही जीवन का सबसे बड़ा धन है। अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाना ही मां सरस्वती की सच्ची आराधना है। यह पर्व हमें सीख देता है कि शिक्षा, संस्कार और कला के माध्यम से ही समाज का सर्वांगीण विकास संभव है।

समाज के लिए प्रेरणा

आज के समय में जब भौतिकता की दौड़ तेज हो गई है, बसंत पंचमी हमें संतुलन और विवेक की याद दिलाती है। यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम केवल ज्ञान अर्जन तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान का उपयोग समाज और मानवता के कल्याण के लिए करें।

निष्कर्ष

बसंत पंचमी का पर्व आस्था, संस्कृति और ज्ञान का संगम है। यह दिन हर आयु वर्ग के लोगों के लिए प्रेरणादायक है। मां सरस्वती की कृपा से जीवन में सकारात्मकता, सफलता और शांति का संचार होता है। कल मनाए जाने वाले इस पावन पर्व पर श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से मां सरस्वती की पूजा कर ज्ञान, बुद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करेंगे।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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