Launch of training : हापुड़ में प्रधान व वार्ड सदस्यों के लिए दो दिवसीय डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण का शुभारंभ

हापुड़ जनपद के विकासखंड हापुड़ के सभागार में प्रधान एवं वार्ड सदस्यों के लिए डिजिटल साक्षरता विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम मेरठ मंडल के मंडलीय उपनिदेशक (पंचायत) के कुशल निर्देशन में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को डिजिटल युग के अनुरूप तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन सहायक विकास अधिकारी श्री शिवम पांडे द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में उपस्थित प्रतिभागियों को डिजिटल साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वर्तमान समय में शासन की अधिकांश योजनाएं, वित्तीय प्रबंधन, रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रही हैं। ऐसे में ग्राम प्रधानों और वार्ड सदस्यों का डिजिटल रूप से दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वे अपने ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, सुशासन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें।
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में प्रतिभागियों को कंप्यूटर एवं लैपटॉप से परिचय कराया गया। उन्हें कंप्यूटर के विभिन्न भागों, उसकी कार्यप्रणाली तथा सामान्य उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। इसके साथ ही फाइल बनाना, सेव करना, प्रिंट निकालना तथा दस्तावेजों का डिजिटल प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से समझाया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि पंचायत से संबंधित पत्राचार और अभिलेखों का डिजिटल संधारण भविष्य की आवश्यकताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
इसके बाद इंटरनेट से परिचय और उसके सुरक्षित उपयोग पर सत्र आयोजित किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि इंटरनेट के माध्यम से शासन की विभिन्न वेबसाइटों और पोर्टलों तक पहुंच बनाकर योजनाओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। ईमेल बनाना, ऑनलाइन फॉर्म भरना तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास कराया गया। स्मार्टफोन के उपयोग पर विशेष ध्यान देते हुए डिजिटल भुगतान, मोबाइल एप डाउनलोड करना और ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने की विधि समझाई गई।
बैंकिंग से संबंधित ऑनलाइन सेवाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिभागियों को नेट बैंकिंग, यूपीआई, डिजिटल ट्रांजैक्शन और आधार आधारित भुगतान प्रणालियों के बारे में जानकारी दी गई, ताकि पंचायत स्तर पर होने वाले वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और गति लाई जा सके। डिजिटल भुगतान प्रणाली अपनाने से भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होती हैं और रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सकारात्मक उपयोग पर भी प्रशिक्षण दिया गया। बताया गया कि पंचायत की गतिविधियों, विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से आम जनता तक पहुंचाई जा सकती है। साथ ही ऑनलाइन सुरक्षा के विषय में भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई, जिसमें साइबर ठगी से बचाव, मजबूत पासवर्ड का उपयोग, ओटीपी की गोपनीयता और संदिग्ध लिंक से बचने के उपाय शामिल थे।
प्रशिक्षण में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) और बजट निर्माण की प्रक्रिया पर विशेष सत्र रखा गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि किस प्रकार ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की प्राथमिकता तय कर योजनाबद्ध तरीके से बजट तैयार किया जाता है। डिजिटल माध्यम से योजनाओं की प्रविष्टि और मॉनिटरिंग करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
विभागीय वेब पोर्टलों के उपयोग पर भी विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल, पीएमएस (प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सिस्टम), एसबीएम रेट्रो फिटिंग एप, मेरी पंचायत एप तथा पंचायत गेटवे पोर्टल के बारे में जानकारी दी गई। इन पोर्टलों के माध्यम से पंचायत कार्यों की ऑनलाइन एंट्री, प्रगति रिपोर्ट अपलोड करना, वित्तीय विवरण दर्ज करना और योजनाओं की निगरानी करना संभव है। प्रशिक्षकों ने प्रत्येक पोर्टल पर लॉगिन करने और आवश्यक प्रविष्टियां करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में फैमिली आईडी से संबंधित जानकारी प्रदान की गई। बताया गया कि परिवारों की डिजिटल पहचान से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक अधिक पारदर्शिता और सटीकता के साथ पहुंचाया जा सकता है। पंचायत प्रतिनिधियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में परिवारों का डेटा सत्यापित कर योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान सुनिश्चित करें।
इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर श्रीमती ज्योति शर्मा, श्रीमती मीनू सिंह एवं वरिष्ठ फैकल्टी डॉ. दीपक सिंह ने विषयवार सत्रों का संचालन किया। उन्होंने सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। प्रशिक्षण के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने डिजिटल प्रक्रियाओं से जुड़ी अपनी शंकाएं प्रस्तुत कीं।
समग्र रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पंचायत प्रतिनिधियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा है। डिजिटल साक्षरता से सुसज्जित प्रधान और वार्ड सदस्य न केवल अपने कार्यों को अधिक दक्षता से संपादित कर सकेंगे, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर पाएंगे। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंडिया के उद्देश्य को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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