Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ?

Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी

Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी
Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी सरगर्मियों के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव की मौजूदगी में उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर उनकी पत्नी और बेटे ने भी सपा की सदस्यता ली, जिससे पार्टी का कुनबा और बड़ा हो गया है।

अखिलेश यादव ने किया स्वागत

लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को माला पहनाकर उनका स्वागत किया। उन्हें स्मृति चिह्न के रूप में अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीर भेंट की गई। इस अवसर पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सपा नेतृत्व ने इसे सामाजिक न्याय और सेक्युलर राजनीति की मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोग लगातार सपा के साथ आ रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता के जुड़ने से पार्टी को संगठनात्मक मजबूती मिलेगी और आगामी चुनावों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देगा।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक सफर

नसीमुद्दीन सिद्दीकी लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी से जुड़े रहे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रभावशाली मुस्लिम चेहरे के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उन्होंने विभिन्न सरकारों में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी निभाई है। बाद में उन्होंने कांग्रेस का रुख किया, लेकिन हाल ही में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। अब सपा में शामिल होकर उन्होंने एक बार फिर सक्रिय राजनीति में नई पारी की शुरुआत की है।

सपा में शामिल होने के बाद सिद्दीकी ने कहा कि वह समाजवादी विचारधारा से प्रभावित हैं और प्रदेश में बदलाव के लिए काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और सामाजिक समरसता को मजबूत करना आवश्यक है।

परिवार सहित सपा में शामिल

इस कार्यक्रम में उनकी पत्नी ने भी सपा की सदस्यता ली। परिवार के साथ पार्टी में शामिल होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सिद्दीकी अब पूरी तरह से समाजवादी पार्टी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके बेटे के भी पार्टी में शामिल होने से यह साफ है कि सिद्दीकी परिवार अब सपा के साथ लंबी राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में है।

Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी
Naseemuddin Siddiqui : BSP छोड़ SP के हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी

अन्य नेताओं का भी जुड़ाव

इस अवसर पर कई अन्य नेताओं ने भी समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इनमें प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक राजकुमार, देवरिया के पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा, नेता अनीस अहमद ‘फूल बाबू’ तथा पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से जुड़े रहे दानिश खान शामिल हैं।

महिला नेताओं में रचना पाल, हुसना सिद्दीकी, पूनम पाल और अल्का सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने भी सपा का दामन थामा। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में और भी नेताओं के जुड़ने की संभावना है।

चुनावी समीकरणों पर असर

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को मुस्लिम समाज में प्रभावशाली नेता के रूप में देखा जाता है। उनके सपा में शामिल होने से पार्टी को मुस्लिम वोट बैंक में मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा लगातार अपने सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को साथ लेकर चलने की नीति के तहत सपा विभिन्न दलों से नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है।

सपा का बढ़ता कुनबा

समाजवादी पार्टी पिछले कुछ समय से संगठन विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही है। जिला और मंडल स्तर पर सदस्यता अभियान चलाए जा रहे हैं। ऐसे में नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे अनुभवी नेता का पार्टी में शामिल होना संगठन के लिए मनोबल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि सपा जनता के मुद्दों पर संघर्ष करती रहेगी और प्रदेश में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी में सभी को सम्मान और अवसर मिलेगा।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नसीमुद्दीन सिद्दीकी का समाजवादी पार्टी में शामिल होना एक अहम घटनाक्रम है। उनके साथ कई पूर्व विधायक और नेताओं का सपा में आना चुनावी माहौल को और गर्म कर सकता है। आगामी चुनावों से पहले यह देखना दिलचस्प होगा कि इस राजनीतिक बदलाव का प्रदेश की सियासत पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि सपा ने अपने कुनबे को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठा लिया है।

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