NIT: जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सादगी ने जीता दिल, प्रोटोकॉल तोड़कर जनता के बीच पहुँचीं राष्ट्रपति

जमशेदपुर। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुँचीं देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि संवैधानिक पद की गरिमा के साथ-साथ सादगी, संवेदनशीलता और जनता से जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है। दीक्षांत समारोह के समापन के बाद राष्ट्रपति का काफिला जब अपने गंतव्य की ओर लौट रहा था, तब एक ऐसा भावुक और ऐतिहासिक क्षण सामने आया, जिसने जमशेदपुर के लोगों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली।
दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जमशेदपुर आगमन को लेकर स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह था। राष्ट्रपति की एक झलक पाने के लिए सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों लोग सुबह से ही सड़क किनारे, चौराहों और बैरिकेडिंग के पीछे खड़े थे। कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच लोग घंटों इंतजार कर रहे थे, बस इस उम्मीद में कि उन्हें देश के प्रथम नागरिक को करीब से देखने का अवसर मिल जाए।
जब राष्ट्रपति का काफिला दीक्षांत समारोह संपन्न होने के बाद आकाशवाणी चौक के पास पहुँचा, तो वहां खड़े जनसैलाब का उत्साह देखते ही बन रहा था। लोग हाथों में तिरंगा लिए, मोबाइल कैमरे उठाए, राष्ट्रपति के दर्शन के लिए आतुर नजर आ रहे थे। आमतौर पर ऐसे अवसरों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण काफिला बिना रुके आगे बढ़ जाता है, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ।
जनता का प्रेम, उत्साह और भावनाएं देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं को रोक नहीं सकीं। उन्होंने अचानक अपने काफिले को रुकवाया और सुरक्षा मानकों की परवाह किए बिना गाड़ी से नीचे उतर आईं। जैसे ही लोगों को यह अहसास हुआ कि राष्ट्रपति उनके बीच आ रही हैं, वहां मौजूद भीड़ खुशी से झूम उठी। ‘भारत माता की जय’, ‘राष्ट्रपति जी जिंदाबाद’ और ‘द्रौपदी मुर्मू अमर रहें’ जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
राष्ट्रपति ने हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन स्वीकार किया और बेहद आत्मीयता के साथ लोगों से मिलीं। उनके चेहरे पर सादगी भरी मुस्कान और व्यवहार में अपनापन साफ झलक रहा था। उन्होंने लोगों से कुशलक्षेम पूछा और बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं को स्नेहपूर्वक अभिवादन किया। यह दृश्य न केवल भावुक था, बल्कि लोकतंत्र की उस जीवंत तस्वीर को भी दर्शा रहा था, जहां देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद आम जनता से सीधे संवाद करता नजर आया।
इसके बाद राष्ट्रपति का काफिला जब खरकई पुल की ओर बढ़ा, तब भी उन्होंने सड़क किनारे खड़े लोगों का हाथ हिलाकर अभिवादन स्वीकार किया। लोग लगातार राष्ट्रपति की एक झलक पाने की कोशिश करते रहे और यह क्षण उनके लिए जीवन भर की याद बन गया। हालांकि इस अचानक बदले घटनाक्रम से सुरक्षा में तैनात अधिकारियों और कर्मियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई, लेकिन राष्ट्रपति के इस निर्णय का सभी ने सम्मान किया और स्थिति को पूरी सतर्कता के साथ संभाला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “हम सिर्फ दूर से राष्ट्रपति जी को देखने आए थे, लेकिन उन्होंने खुद गाड़ी रोककर हमसे मुलाकात की। यह हमारे लिए गर्व और सम्मान की बात है।” वहीं एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर कहा, “ऐसा लगा जैसे कोई अपना हमारे बीच आ गया हो।”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इससे पहले भी कई बार अपने सरल स्वभाव और जनता के प्रति संवेदनशीलता के लिए चर्चा में रही हैं। चाहे आदिवासी समाज से उनका गहरा जुड़ाव हो या आम लोगों के बीच जाकर संवाद करना, उनकी कार्यशैली उन्हें अन्य राष्ट्रपतियों से अलग पहचान देती है। जमशेदपुर की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वे केवल देश की राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि जनता की राष्ट्रपति हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं झारखंड की धरती से गहरा संबंध रखती हैं। उनका जन्म ओडिशा के एक आदिवासी परिवार में हुआ और उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। यही कारण है कि आम जनता, खासकर आदिवासी और ग्रामीण समाज, उनसे विशेष आत्मीयता महसूस करता है। जमशेदपुर में जनता का उमड़ा स्नेह इसी जुड़ाव का प्रतीक माना जा रहा है।
एनआईटी जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए भी जीवन मूल्यों, अनुशासन, परिश्रम और समाज के प्रति जिम्मेदारी पर जोर दिया था। उन्होंने युवाओं से देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने और अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के कल्याण के लिए करने का आह्वान किया। दीक्षांत समारोह के बाद जनता के बीच जाकर उनका अभिवादन स्वीकार करना उनके विचारों और व्यवहार में सामंजस्य को भी दर्शाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने जमशेदपुर को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। सोशल मीडिया पर भी राष्ट्रपति के इस कदम की जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे लोकतंत्र की सच्ची भावना और जननेता की सादगी का उदाहरण बता रहे हैं।
कुल मिलाकर, एनआईटी जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का जनता के बीच जाना केवल एक औपचारिक घटना नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बन गया। यह दिन जमशेदपुर के लोगों के लिए हमेशा यादगार रहेगा, जब देश की राष्ट्रपति ने प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर जनता के प्रेम को सम्मान दिया और अपने सरल, संवेदनशील और मानवीय रूप से सभी का दिल जीत लिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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