On the incident : समाज, मीडिया, राजनीति और सोशल मीडिया ने क्या क्या कहानी नही बनाई कपसाड(मेरठ) की घटना पर

उत्तर प्रदेश के जनपद मेरठ मूल में निकला – प्रेम ।
- प्रेमिका ने प्रेमी के साथ भागने का प्रयास किया, माँ ने रोका और झड़प में प्रेमिका की माँ की मौत हो गई।मामला इतना ही था।लेकिन जातियों का उल्लेख आते ही गिद्धों की गर्दन उठ खडी हुई।घटना की खबर जो फैली वह भी झकझोर देने वाली थी।माँ की हत्या कर बेटी को उठा लिया।आज के समाज के लिए ऐसी खबर बहुत दुखी करने वाली थी।
- लेकिन जातियों का उल्लेख आते ही जो आतंक मचा वह देखने लायक था।क्या गुर्जर नेता, क्या जाट नेता, क्या ब्राह्मण नेता, रावण नाम का नेता आदि सब आरोपी के लिए सूली से कम सजा मांग ही नही रहे थे।माहौल बिगड़ता देख युवक की जाती के नेता भी मैदान में उतर गए।युवक को दबंग बताया जाने लगा।याद कीजिये हाथरस की घटना, जहां ठाकुर जाती होने के कारण आरोपी को दबंग बताया गया।इस घटना से भी ज्यादा राजनीति हुई थी उसपर।
- लेकिन उसमें क्या निकला ?ठाकुर रामू जो घर से 30 किमी दूर किसी कंपनी में 8हजार प्रति महीने की नोकरी करने जाता था।वही रामू जिसे सूली पर लटकाने के लिए चंद्रशेखर रावण ने उस गांव का घेराव किया।जयंत चौधरी पैदल हाथरस की तरफ दौड़ पड़े, अपने समर्थकों को लाठियों से कुटवाया।
- जिसे फांसी दिलाने के लिए राहुल गांधी अपनी बहन के साथ गाड़ी में अट्टहास करते हुए जा रहे थे, सड़क पर गुलाटी खाकर बता रहे थे कि पुलिस ने उसे धक्का मारा है।बाद में उसी रामू को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया है।कोर्ट का कहना था कि जब यह केस हुआ उस समय रामू अपनी कंपनी में ड्यूटी पर था, इसकी सीसीटीवी फुटेज मिली हैं।
- रामू के साथ ही लवकुश और रवि को भी बरी कर दिया गया है।केवल संदीप को आरोपी माना गया है और उसपे भी 3/110 और धारा 304 में गैर इरादतन हत्या के ही आरोप सिद्ध हुए हैं।

मतलब रेप हुआ ही नही।
- जबकि विपक्षी दल चाहते थे कि युवकों को गैंगरेप के आरोप में मार डाला जाये क्योंकि युवक ठाकुर थे और युवती दलित।
जांच के बाद यह भी साबित हो गया कि मृतका और आरोपी का प्रेम प्रसंग का मामला था, 1 महीने में 105 बार लंबी और छोटी कॉल आपस मे हुई थी। - मामला क्लियर हो गया……..
लेकिन कोई जयंत चौधरी , चंद्रशेखर या राहुल गांधी इन 3 नवयुवकों रवि , लवकुश और रामू के 3 वर्ष लौटा सकता है क्या ?जिस मीडिया ने इन्हें भेड़िया बताकर मीडिया ट्रायल किया था वह मीडिया इनके 3 वर्षों का हर्जाना दे सकता है क्या ?क्या कोई प्रावधान है कि अगर कोई निर्दोष कई साल बेवजह जेल में रहकर आये तो उसके उसके समय का हर्जाना मिलेगा ?कैसे वें आगे अपने घर परिवार को संभाल सकेंगे ?बिल्कुल वैसा ही यह समाज, राजनीति और मीडिया मिलकर पारस राजपूत के साथ करने पर उतारू हैं। - दुःखद यह है कि यहाँ सच कहने वाले, सच का साथ देने वाले कम हैं।जिस क्षत्रिय व्यक्ति की चुनावी हार को बहाना बनाकरलोकसभा के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी का विरोध किया था वह नेता भी अपने इस समर्थक का साथ छोड़ गया।कितना बड़ा सबक है यह उनके लिए जो अपनी जाति के किसी नेता के लिए दूसरी जातियों को टारगेट करते हैं ?
- नेता को वोट प्यारी है।इस घटना में लड़का और लड़की दोनों दोषी हैं लेकिन क्योंकि लड़का ठाकुर है इसलिए वही अत्यचारी है।क्या यह सम्भव है कि कोई अपहृत बालिग लड़की को उठाकर 3 दिन रेल में घूमता रहे ?लेकिन लड़की को समझा दिया जायेगा कि लड़के ने उसे उठाया है, लड़के पर 302 और 376 लगेगी।क्योंकि वह ठाकुर है। समाज को ‘मीडिया ट्रायल’ के बजाय ‘न्यायिक प्रक्रिया’ पर भरोसा करना सीखना होगा, अन्यथा हम निर्दोषों की बलि चढ़ाते रहेंगे।चिंतन जरूर कीजिये।।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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