Praveen Pandey : पीएम मोदी बुंदेलखंड के मन की बात सुनें, राज्य का गठन करें — प्रवीण पांडेय

बुंदेलखंड में पृथक राज्य की मांग एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। इस मांग को लेकर सक्रिय बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने अपने आंदोलन को नए तरीके से आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे बुंदेलखंड के लोगों के “मन की बात” सुनें और पृथक बुंदेलखंड राज्य के गठन पर निर्णय लें।
गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा से जागरूकता अभियान
पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए “बुंदेलखंड गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा” निकाली जा रही है। इस यात्रा की शुरुआत 6 मार्च को जसपुरा (जिला बांदा) से हुई थी। यात्रा का उद्देश्य क्षेत्र के गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करना और राज्य निर्माण के पक्ष में समर्थन जुटाना है।
यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर स्थानीय लोगों से संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और उन्हें इस आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। यात्रा का पहला चरण बांदा के रामलीला मैदान में विश्राम के साथ संपन्न हुआ। यहां बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे आंदोलन को बल मिला है।
मई में चित्रकूट से शुरू होगा अगला चरण
समिति ने घोषणा की है कि इस यात्रा का अगला चरण मई माह में चित्रकूट से शुरू किया जाएगा। चित्रकूट धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है, इसलिए यहां से यात्रा की शुरुआत करना आंदोलन को और अधिक व्यापक समर्थन दिलाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
“मन की बात” को बनाया आंदोलन का हिस्सा
इस आंदोलन की सबसे खास बात यह है कि इसे प्रधानमंत्री के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात से जोड़ा गया है। प्रवीण पांडेय ने बताया कि लोगों से अपील की जा रही है कि वे टोल-फ्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल करके अपनी आवाज रिकॉर्ड करें और बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को सीधे प्रधानमंत्री तक पहुंचाएं।
उन्होंने बताया कि कॉल करने के बाद एक बीप की आवाज आती है, जिसके बाद 40–45 सेकंड के भीतर अपनी बात स्पष्ट और संक्षेप में रिकॉर्ड करनी होती है। यह पहल आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का एक अभिनव प्रयास है।
गरीबी, बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा
प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से गरीबी, बेरोजगारी और पलायन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। यहां के युवा रोजगार के अभाव में बड़े शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। किसानों को भी सिंचाई और संसाधनों की कमी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
उनका मानना है कि इन समस्याओं का स्थायी समाधान तभी संभव है जब बुंदेलखंड को एक अलग राज्य का दर्जा दिया जाए। इससे क्षेत्र के लिए अलग बजट, नीतियां और योजनाएं बन सकेंगी, जो स्थानीय जरूरतों के अनुरूप होंगी।

जनआंदोलन का ले रहा रूप
प्रवीण पांडेय ने दावा किया कि यह आंदोलन अब धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। गांव–गांव से मिल रहा समर्थन इस बात का संकेत है कि लोग अब अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुके हैं और बदलाव चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक मांग नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के सम्मान, स्वाभिमान और अधिकार की लड़ाई है। इस आंदोलन में युवाओं, किसानों, महिलाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी इसे और मजबूत बना रही है।
सभी वर्गों से सहयोग की अपील
समिति ने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की है। खासकर युवाओं से कहा गया है कि वे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं। किसानों और महिलाओं से भी आग्रह किया गया है कि वे अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखें और इस अभियान का हिस्सा बनें।
इसके साथ ही, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों से भी समर्थन मांगा गया है, ताकि इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी तरीके से उठाया जा सके।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
बुंदेलखंड राज्य की मांग नई नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह मुद्दा जोर पकड़ता रहा है। वर्तमान में जिस तरह से इसे संगठित और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है, उससे यह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
यदि यह आंदोलन और मजबूत होता है, तो यह न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार के सामने भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, बुंदेलखंड राष्ट्र समिति द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान क्षेत्र के लोगों की भावनाओं और आकांक्षाओं को सामने लाने का प्रयास है। “गांव–गांव, पांव–पांव यात्रा” और “मन की बात” से जुड़ी पहल ने इस आंदोलन को एक नई दिशा दी है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह आंदोलन किस हद तक जनसमर्थन जुटा पाता है और क्या सरकार इस मांग पर कोई ठोस कदम उठाती है। फिलहाल, बुंदेलखंड की जनता अपनी आवाज को बुलंद करने में जुटी हुई है और एक नए राज्य के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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