Prison sentence : अगले सत्र में सरकार ला सकती है जन विश्वास कानून, व्यापारियों को अब नहीं होगी जेल की सजा

गिरिराज अग्रवाल –
जयपुर। राजस्थान की भाजपा सरकार अब उन कानूनों में बदलाव करने जा रही है, जिनमें व्यापारियों को जेल की सजा सुनाए जाने का प्रावधान है। ऐसे प्रावधानों को खत्म करके केवल जुर्माना राशि का प्रावधान किया जाएगा। इसके लिए इन दिनों राजस्थान के विधि विभाग में जोर-शोर से काम चल रहा है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर जन विश्वास विधेयक विधानसभा के बजट सत्र में ही पेश किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में अभी व्यापारियों को विभिन्न आर्थिक, श्रम, पर्यावरण, और उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित कानूनों के गंभीर उल्लंघन के लिए जेल की सजा हो सकती है।
दरअसल, जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक लाने का मुख्य उद्देश्य ईज ऑफ लिविंग (जीवन सुगमता) और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देना है। इसके तहत छोटे अपराधों को गैर-आपराधिक बनाना (Decriminalisation): कई मामूली, तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक को जो पहले अपराध माने जाते थे और जिनमें जेल की सज़ा हो सकती थी, अब उन्हें गैर-आपराधिक बनाया गया है। इसका अर्थ है कि ऐसे उल्लंघनों पर जेल की सज़ा के बजाय केवल जुर्माना लगाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि छोटे मामलों को अदालतों के दायरे से हटाकर प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से निपटाने से न्यायपालिका पर अनावश्यक दबाव कम होगा और गंभीर अपराधों पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा। इस जन विश्वास अधिनियम का उद्देश्य नागरिकों और व्यवसायों को छोटे-छोटे उल्लंघनों के लिए जेल जाने के डर से मुक्त करना है। सरकार विश्वास-आधारित शासन की ओर बढ़ना चाहती है, जहाँ दंड के बजाय अनुपालन पर ध्यान केंद्रित हो। व्यापारियों को मामूली अनुपालनों के लिए जेल जाने का डर कम होने से व्यावसायिक माहौल बेहतर होगा, जिससे निवेश और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।

जन विश्वास विधेयक 42 केंद्रीय अधिनियमों के 183 से अधिक प्रावधानों में संशोधन करता है, जिनमें से कई प्रावधानों में जेल की सज़ा को समाप्त कर दिया गया है। राज्य की भजन लाल सरकार इस पर भी काम कर रही है ऐसे कानून जो समवर्ती सूची के तहत केंद्र और राज्य दोनों को कार्रवाई करने का अधिकार देते हैं उनमें भी बदलाव किया जाए। इनमें खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 शामिल हैं, इसमें मिलावट, घटिया/असुरक्षित खाद्य सामग्री बेचने पर जेल की सज़ा का प्रावधान है। यदि खाद्य सामग्री उपभोग के लिए असुरक्षित पाई जाती है और उससे किसी को नुकसान होता है, तो उम्रकैद तक भी जेल की सजा की जा सकती है।
इसी तरह लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 के तहत वजन और माप में धोखाधड़ी या गलत लेबलिंग के गंभीर मामलों में जेल की सज़ा का प्रावधान है, हालाँकि जन विश्वास अधिनियम के तहत कई छोटे उल्लंघनों को गैर-आपराधिक बनाया गया है। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण प्रदूषण से संबंधित नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करने या खतरनाक कचरे का अवैध निपटान करने पर जेल की सज़ा हो सकती है। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत कंपनी के निदेशकों या अधिकारियों द्वारा धोखाधड़ी, गलत बयानी, या अन्य गंभीर कॉर्पोरेट उल्लंघनों के मामलों में सज़ा हो सकती है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, जैसे कानूनों का उल्लंघन करने पर जेल की सज़ा हो सकती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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