Rajasthan High Court : पशुधन सहायक भर्ती : राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के दिए आदेश ?

Rajasthan High Court : पशुधन सहायक भर्ती : राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के दिए आदेश

Rajasthan High Court : पशुधन सहायक भर्ती : राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के दिए आदेश
Rajasthan High Court : पशुधन सहायक भर्ती : राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के दिए आदेश

जयपुर।

  • राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ ने पशुधन सहायक (Livestock Assistant) भर्ती प्रक्रिया में फंसे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है। माननीय न्यायमूर्ति अशोक कुमार जैन ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही, न्यायालय ने अंतरिम निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं की संबंधित श्रेणी में एक-एक पद आगामी आदेश तक सुरक्षित (Reserve) रखा जाए।क्या है पूरा मामला? यह विवाद राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर (RAJUVAS) से संबद्ध संस्थानों से डिप्लोमा इन एनिमल हसबेंड्री करने वाले अभ्यर्थियों से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती परीक्षा में मेरिट हासिल की और दस्तावेज़ सत्यापन (DV) की प्रक्रिया भी पूरी की।
  • हालांकि, चयन प्रक्रिया के अंतिम चरणों में उनके नामों को यह कहते हुए अस्थायी सूची (Provisional List) में डाल दिया गया कि जिस संस्थान से उन्होंने डिप्लोमा किया, उसके पास राज्य सरकार की एनओसी (NOC) उपलब्ध नहीं थी। जबकि अभ्यर्थियों के पास विश्वविद्यालय द्वारा जारी विधिवत डिप्लोमा और अंकतालिकाएं मौजूद थीं।
Rajasthan High Court : पशुधन सहायक भर्ती : राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के दिए आदेश
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न्यायालय में दी गई दलीलें

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता तनवीर अहमद ने तर्क दिया कि:
    अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की आधिकारिक काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित होकर संस्थान में पहुंचे थे।
    परीक्षा का आयोजन और डिग्री/डिप्लोमा का वितरण सरकारी विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है।
    संस्थान और सरकार के बीच एनओसी जैसे प्रशासनिक विवादों का खामियाजा उन अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए जिन्होंने अपनी योग्यता के दम पर मेरिट में स्थान बनाया है।
    कोर्ट का रुख और अगली सुनवाई
  • न्यायालय ने इन तर्कों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए माना कि अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जाती है और सीटें भर दी जाती हैं, तो याचिकाकर्ताओं को ‘अपूर्णीय क्षति’ हो सकती है।
    अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी को तय की है। तब तक के लिए याचिकाकर्ताओं के हक में पद सुरक्षित रहेंगे, जिससे उनके चयन की संभावनाएं बरकरार हैं। इस आदेश के बाद उन सैंकड़ों अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है जो प्रशासनिक तकनीकी कारणों से अपनी नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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