Rakesh Tyagi paid tribute : 1971 युद्ध सेनानी श्री धर्मपाल सिंह को सैन्य सलामी, राकेश त्यागी श्रद्धांजलि अर्पित की

देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर सपूत श्री धर्मपाल सिंह (ए.डी.सी.), जो वर्ष 1971 के भारत–पाक युद्ध में सहभागी रहे, आज हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश ने एक सच्चे देशभक्त और अनुशासित सैन्य अधिकारी को खो दिया है। स्वर्गीय श्री धर्मपाल सिंह मूल रूप से ग्राम निसरखा, जनपद बुलंदशहर के निवासी थे तथा वर्तमान में आवास विकास, गांधी विहार, मेरठ रोड, हापुड़ में निवासरत थे।
श्री धर्मपाल सिंह ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण भाग भारतीय सेना को समर्पित किया। वर्ष 1971 की ऐतिहासिक लड़ाई में उनकी सहभागिता देशभक्ति, साहस और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण रही। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया। उनका संपूर्ण जीवन अनुशासन, सेवा और त्याग की मिसाल रहा, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ सदैव प्रेरणा लेती रहेंगी।
उनके पार्थिव शरीर को छावनी से आई सैन्य टुकड़ी द्वारा पूरे सम्मान के साथ सलामी दी गई। सैन्य परंपराओं के अनुसार दी गई यह सलामी उनके शौर्य, बलिदान और राष्ट्रसेवा के प्रति सम्मान का प्रतीक थी। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम थीं और वातावरण अत्यंत भावुक हो गया। सैन्य सलामी के दौरान हर व्यक्ति ने गर्व के साथ उस वीर सपूत को याद किया, जिसने मातृभूमि की रक्षा में अपना जीवन समर्पित किया।
इस अवसर पर श्री राकेश त्यागी, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस कमेटी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने स्वर्गीय श्री धर्मपाल सिंह के पार्थिव शरीर के समक्ष शीश झुकाकर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। श्री राकेश त्यागी ने कहा कि देश ऐसे वीर सैनिकों का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। उन्होंने कहा कि श्री धर्मपाल सिंह जैसे सैनिकों के बलिदान और सेवाभाव को कभी भुलाया नहीं जा सकता।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित गणमान्य नागरिकों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं क्षेत्रवासियों ने भी स्वर्गीय श्री धर्मपाल सिंह के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन सादगी, अनुशासन और देशप्रेम से परिपूर्ण था। सेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात भी वे समाज में सम्मान और प्रेरणा का केंद्र बने रहे। वे युवाओं को देशसेवा और अनुशासन का महत्व समझाते रहते थे।
स्वर्गीय श्री धर्मपाल सिंह अपने पीछे एक पुत्र श्री सुन्दर पाल सिंह एवं एक पुत्री सुश्री शशि पाल सिंह सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके परिजनों ने बताया कि वे एक आदर्श पिता, स्नेही अभिभावक और अनुशासित मार्गदर्शक थे। परिवारजनों के लिए यह अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती। इस दुख की घड़ी में क्षेत्र के लोगों, शुभचिंतकों और विभिन्न संगठनों ने परिवार के साथ खड़े होकर उन्हें सांत्वना दी।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और ईश्वर से उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान देने की कामना की। वातावरण “अमर रहें” के नारों से गूंज उठा, जो इस बात का प्रतीक था कि ऐसे वीर सपूत अपने कर्मों के कारण सदैव अमर रहते हैं।
अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प लिया कि वे स्वर्गीय श्री धर्मपाल सिंह के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे और देशसेवा, ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलेंगे। उनका जीवन और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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