Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता ?

Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता

Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता
Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता

जौनपुर। जनपद जौनपुर के थाना लाइन बाजार क्षेत्र में दहेज उत्पीड़न से संबंधित एक प्रकरण में मिशन शक्ति केंद्र की पहल पर दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से सुलह समझौता कराया गया। इस मामले में आवेदिका शिरीन खातून पुत्री मोहम्मद इस्माइल, निवासी ग्राम कलीचाबाद, थाना लाइन बाजार, जनपद जौनपुर ने अपने पति एवं ससुराल पक्ष के विरुद्ध दहेज की मांग को लेकर मारपीट और प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

प्रकरण के अनुसार, शिरीन खातून ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके पति मोहम्मद आदिल पुत्र कमरुद्दीन उर्फ मुन्ना, निवासी ग्राम रसीदाबाद विशेश्वरपुर, थाना लाइन बाजार, जनपद जौनपुर तथा उनके परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा दहेज की मांग को लेकर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। शिकायत में मारपीट और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे मिशन शक्ति केंद्र के संज्ञान में लिया गया। मिशन शक्ति उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। इस केंद्र के माध्यम से महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा और अन्य सामाजिक समस्याओं से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई और समाधान का प्रयास किया जाता है।

शिकायत प्राप्त होने के बाद दोनों पक्षों को थाना स्थानीय पर उपस्थित होने के लिए नोटिस दिया गया। निर्धारित तिथि पर आवेदिका शिरीन खातून तथा विपक्षी मोहम्मद आदिल सहित दोनों पक्ष थाना लाइन बाजार में उपस्थित हुए। पुलिस अधिकारियों और मिशन शक्ति केंद्र से जुड़े कर्मियों की उपस्थिति में दोनों पक्षों से अलग-अलग तथा संयुक्त रूप से वार्ता की गई।

वार्ता के दौरान आवेदिका ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद से ही दहेज की मांग को लेकर उन्हें ताने दिए जाते थे और समय-समय पर प्रताड़ित किया जाता था। वहीं, विपक्षी पक्ष ने अपने स्तर से स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया और आपसी गलतफहमियों को कारण बताया।

Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता
Reconciliation agreement : मिशन शक्ति केंद्र की पहल से दहेज उत्पीड़न प्रकरण में हुआ सुलह समझौता

पुलिस और मिशन शक्ति केंद्र के प्रतिनिधियों ने दोनों पक्षों को समझाइश दी कि दहेज प्रथा कानूनन अपराध है और इसके गंभीर दुष्परिणाम हो सकते हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि घरेलू विवादों को आपसी संवाद और समझदारी से सुलझाना ही परिवार और समाज के हित में होता है।

काफी समय तक चली बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से सुलह समझौता करने की इच्छा व्यक्त की। आवेदिका और विपक्षी ने भविष्य में किसी प्रकार की दहेज मांग न करने तथा एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक व्यवहार बनाए रखने का आश्वासन दिया।

सुलह समझौते के तहत यह तय किया गया कि दोनों पक्ष पारिवारिक जीवन को शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर पहले आपसी संवाद का सहारा लेंगे। पुलिस की उपस्थिति में दोनों पक्षों से लिखित रूप में सहमति पत्र लिया गया, जिससे भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने पर उसे संदर्भ के रूप में देखा जा सके।

थाना स्थानीय से दोनों पक्षों को समझाइश देकर विदा किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की पुनरावृत्ति होती है, तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे प्रकरण में मिशन शक्ति केंद्र की भूमिका सराहनीय रही। केंद्र का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि महिलाओं को न्याय दिलाना और परिवारों को टूटने से बचाने का प्रयास करना भी है। जहां संभव हो, वहां आपसी सहमति से समाधान को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासन की सक्रियता समाज में सकारात्मक संदेश देती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के साथ होने वाले अन्याय को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है। परिवारों को यह समझना होगा कि दहेज मांगना और देना दोनों ही कानूनन अपराध हैं और इससे सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता है।

इस प्रकरण में दोनों पक्षों के बीच हुआ सुलह समझौता यह दर्शाता है कि संवाद और समझदारी से कई विवादों का समाधान संभव है। हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है, और किसी भी प्रकार की पुनरावृत्ति पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

जौनपुर के इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया कि मिशन शक्ति केंद्र और पुलिस प्रशासन की संयुक्त पहल से महिलाओं से जुड़े मामलों में प्रभावी हस्तक्षेप संभव है। समाज में शांति, सद्भाव और न्याय की स्थापना के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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