
हापुड़,
जनपद में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बुधवार को जनपदस्तरीय सड़क सुरक्षा समिति तथा जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक जिलाधिकारी हापुड़ की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में स्कूली वाहनों की फिटनेस, बच्चों की सुरक्षा, ओवरस्पीड, सड़क दुर्घटनाओं, ब्लैक स्पॉट, टोल पर लगने वाले जाम और दुर्घटना के बाद राहत एवं बचाव व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान जनपद में 30 विद्यालयी वाहनों के बिना फिटनेस संचालित होने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) संदीप कुमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग शैलेन्द्र सिंह, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) रमेश कुमार चौबे, यात्री एवं मालकर अधिकारी प्रीति पाण्डेय, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक लक्ष्मण सिंह, यातायात निरीक्षक नरेश कुमार, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. स्वेता पूठिया, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनजीत सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
इसके अलावा एनएचएआई एनएच-334 के अधिकारी वैभव त्रिपाठी, एनएचएआई मेरठ के सीनियर इंजीनियर अंकुल कुमार, एनएचएआई गाजियाबाद के जीएम अमित शर्मा, एनएचएआई मुरादाबाद के हाईवे मैनेजर संजय हिंगे, विकास ग्लोबल स्कूल बाबूगढ़ के डायरेक्टर संजय कुमार, दिल्ली पब्लिक स्कूल के एडमिन ललित कुमार, लोक निर्माण विभाग के मुकुल नागपाल तथा एनएचएआई गाजियाबाद के साइट इंजीनियर प्रिंस चौहान सहित सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक की शुरुआत में विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में संचालित स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि स्कूली वाहनों के संचालन को लेकर शासन स्तर पर कई वैधानिक प्रावधान और सुरक्षा मानक निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद कुछ विद्यालयों में वाहनों की फिटनेस और अन्य आवश्यक दस्तावेजों को लेकर लापरवाही सामने आ रही है।
बैठक में जानकारी दी गई कि हापुड़ जनपद में 30 विद्यालयी वाहन बिना फिटनेस के संचालित हो रहे हैं। इस जानकारी पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले किसी भी वाहन के संचालन में सुरक्षा मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। जिन वाहनों की फिटनेस पूरी नहीं है, उनके दस्तावेज तत्काल दुरुस्त कराए जाएं और निर्धारित मानकों को पूरा किए बिना उनका संचालन न किया जाए।
जिलाधिकारी ने जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि वे संबंधित विद्यालयों के साथ समन्वय कर अनफिट वाहनों के संबंध में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करें। विद्यालयों के प्रतिनिधियों को भी निर्देश दिए गए कि वाहनों के सभी आवश्यक प्रपत्र सही कराकर ही उनका संचालन किया जाए। साथ ही कार्रवाई पूरी होने के बाद इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान के तहत कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि इस अभियान में परिवहन, शिक्षा, पुलिस और अन्य संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय वाहनों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी को ऐसे विद्यालयों का भौतिक निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए गए। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विद्यालयों में संचालित वाहनों की फिटनेस सही है या नहीं, उनके दस्तावेज पूरे हैं या नहीं और बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित आवश्यक व्यवस्थाएं मौजूद हैं या नहीं।
बैठक में स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए ई-रिक्शा और वैन के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर बच्चों को ऐसे वाहनों से स्कूल लाया-ले जाया जाता है। जिलाधिकारी ने विद्यालयों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिए कि वे अभिभावकों को ऐसे वाहनों से बच्चों को स्कूल भेजने से बचने के लिए जागरूक करें।
विद्यालयों से कहा गया कि बच्चों के परिवहन के लिए विद्यालय से संबद्ध और निर्धारित सुरक्षा मानकों को पूरा करने वाले वाहनों का ही प्रयोग किया जाए। अभिभावकों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए जागरूक किया जाए कि वे बच्चों को असुरक्षित या अनधिकृत वाहनों से स्कूल न भेजें। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिगत निर्धारित मानकों और आवश्यक सुरक्षा उपायों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए विद्यालय प्रबंधन पूरी तरह जिम्मेदार होगा।

बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई। छिजारसी टोल पर लगने वाले जाम की समस्या को गंभीरता से लेते हुए टोल के दोनों कट पर हाईट बैरियर लगाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से टोल क्षेत्र में अनियंत्रित वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।
जनपद में सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों की भी समीक्षा की गई। बैठक में सामने आया कि जिले में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं ओवरस्पीड के कारण हो रही हैं। तेज गति से वाहन चलाने के कारण वाहन चालक नियंत्रण खो सकते हैं और दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है। इस समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने एनएचएआई के मुरादाबाद और गाजियाबाद खंड के अधिकारियों को ओवरस्पीड कैमरे लगाने के निर्देश दिए।
ओवरस्पीड कैमरों के माध्यम से तेज गति से वाहन चलाने वाले चालकों की निगरानी की जा सकेगी। इससे यातायात नियमों का पालन कराने और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कैमरे लगाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
बैठक में जिले के ब्लैक स्पॉट की स्थिति की भी समीक्षा की गई। ऐसे स्थान जहां लगातार सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, उन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया जाता है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ब्लैक स्पॉट पर किए गए अल्पकालिक और दीर्घकालिक सुरक्षा कार्यों का दोबारा निरीक्षण किया जाए।
अधिकारियों से कहा गया कि निरीक्षण के दौरान यह देखा जाए कि दुर्घटना रोकने के लिए किए गए कार्य प्रभावी हैं या नहीं। यदि किसी स्थान पर अभी भी दुर्घटना का खतरा बना हुआ है तो वहां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएं। निरीक्षण के बाद विस्तृत आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
दुर्घटना होने के बाद राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। एनएचएआई मुरादाबाद खंड के अंतर्गत दुर्घटना होने की स्थिति में एंबुलेंस और क्रेन के निर्धारित समय पर पहुंचने की व्यवस्था की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्राधिकारी यातायात और एनएचएआई के अधिकारियों को इस व्यवस्था की पुनः जांच करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। ऐसे में एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता के साथ दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की समय पर पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। संबंधित अधिकारियों से जांच के बाद रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने सड़क सुरक्षा के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना केवल परिवहन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए पुलिस, परिवहन विभाग, लोक निर्माण विभाग, एनएचएआई, शिक्षा विभाग और विद्यालय प्रबंधन को मिलकर काम करना होगा।
विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। विद्यालय प्रबंधन को वाहनों की नियमित जांच, चालक की जिम्मेदारी और सुरक्षा मानकों के पालन पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो।
बैठक में सड़क सुरक्षा के साथ-साथ आम लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया गया। ओवरस्पीड, गलत दिशा में वाहन चलाना, असुरक्षित वाहन संचालन और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। इसलिए विभागों को जागरूकता और प्रवर्तन दोनों स्तरों पर कार्रवाई करने की आवश्यकता बताई गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि बैठक में लिए गए निर्णय केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। प्रत्येक विभाग को अपनी जिम्मेदारी के अनुसार समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी और उसकी प्रगति की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। विशेष रूप से 30 अनफिट स्कूली वाहनों के मामले में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक के अंत में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) हापुड़ रमेश कुमार चौबे ने उपस्थित सभी अधिकारियों, विद्यालय प्रतिनिधियों और सड़क सुरक्षा समिति के सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके बाद बैठक समाप्त हुई।
बैठक में लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि हापुड़ प्रशासन सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर है। 30 अनफिट स्कूली वाहनों पर कार्रवाई, विद्यालयों के भौतिक निरीक्षण, ई-रिक्शा और अनधिकृत वैन से बच्चों को स्कूल भेजने से रोकने, छिजारसी टोल पर हाईट बैरियर लगाने, ओवरस्पीड कैमरे लगाने और ब्लैक स्पॉट का दोबारा निरीक्षण करने जैसे निर्देशों से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन होता है तो स्कूली बच्चों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ जनपद में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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