Shiva blesses : महाशिवरात्रि पर समाजसेवियों का संदेश: अर्पण नहीं, सच्चा समर्पण ही शिव कृपा दिलाता

महाशिवरात्रि पर समाजसेवीयों का आध्यात्मिक संदेश “भगवान शिव की कृपा चाहते हैं तो अर्पण से अधिक समर्पण पर दें ध्यान”: समाजसेवी लाला भाई जिसने अपना मन भगवान को अर्पित कर दिया, वही जीवन का सबसे सफल व्यक्ति है : समाजसेवी राजू शर्मा
“मनुष्य को अपने जीवन की प्रत्येक परिस्थिति को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए हमारी इच्छा, भगवान की इच्छा में विलीन हो जाए यही सच्चा समर्पण है – जब हम अपने विचारों और कर्मों को भगवान शिव की व्यवस्था के अनुरूप ढाल लेते हैं, तभी जीवन में संतुलन और शांति संभव होती है।”
आगरा, संजय सिंह। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शहर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण देखने को मिला। इस अवसर पर समाजसेवी लाला भाई और राजू शर्मा ने आत्मचिंतन और समर्पण का गहरा संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि यदि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करनी है तो बाहरी अर्पण से अधिक आंतरिक समर्पण पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “भगवान किसी वस्तु से उतनी शीघ्र प्रसन्न नहीं होते, जितनी शीघ्र हमारे सच्चे समर्पण भाव से होते हैं। यदि भगवान को अर्पित करने योग्य कोई सर्वोत्तम वस्तु है, तो वह हमारा मन है। जिसने अपना मन भगवान को अर्पित कर दिया, वही जीवन का सबसे सफल व्यक्ति है।”

समाजसेवी लाला भाई ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन की प्रत्येक परिस्थिति को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करना चाहिए। “हमारी इच्छा, भगवान की इच्छा में विलीन हो जाए यही सच्चा समर्पण है। जब हम अपने विचारों और कर्मों को भगवान शिव की व्यवस्था के अनुरूप ढाल लेते हैं, तभी जीवन में संतुलन और शांति संभव होती है।”
रौद्र और सौम्य दोनों रूपों में कल्याणकारी हैं भगवान शिव
समाजसेवी राजू शर्मा ने कहा कि भगवान शिव लोक और परलोक, दोनों के अधिष्ठाता हैं। वे रुद्र स्वरूप में पालनहार भी हैं और संहारक भी। जब वे रौद्र रूप धारण करते हैं, तो वह सृष्टि के संतुलन हेतु आवश्यक होता है। वहीं उनका सौम्य और श्वेत स्वरूप करुणा, शांति और संरक्षण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि शास्त्रों में भगवान महादेव के रौद्र और सौम्य दोनों रूपों का विस्तृत वर्णन मिलता है। ये दोनों रूप परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन के पूरक हैं। “रुद्र वह दिव्य शक्ति है, जो जीवन की समस्त चिंताओं और बाधाओं का नाश करती है। जिस प्रकार प्राणवायु के बिना जीवन संभव नहीं, उसी प्रकार सृष्टि के संतुलन के लिए रुद्र रूप का अस्तित्व अनिवार्य है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संहार केवल अंत नहीं, बल्कि नए सृजन का आधार है। मृत्यु के पश्चात होने वाला शोक भी उसी लीला का हिस्सा है, जो मनुष्य को जीवन के सत्य से परिचित कराता है। भगवान शिव का प्रत्येक रूप अंततः कल्याणकारी है।
आत्मचिंतन और सेवा का संकल्प लेने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से महाशिवरात्रि के अवसर पर आत्मचिंतन, संयम और सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान शिव सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें।
उन्होंने कहा, “बाबा महाकाल का आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदैव बना रहे। आप सभी सुखी, स्वस्थ और प्रसन्न रहें इसी कामना के साथ महाशिवरात्रि का यह पावन पर्व मनाएं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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