Silent circle : बूंदेलखंड राष्ट्र समिति की फतेहपुर बैठक, पृथक राज्य हेतु मौन परिक्रमा की रणनीति तय

फतेहपुर। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर एक बार फिर आंदोलन को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में बूंदेलखंड राष्ट्र समिति की एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आज फतेहपुर नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य 01 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रस्तावित मौन परिक्रमा को लेकर संगठनात्मक तैयारी, अनुशासन, कार्यक्रम की रूपरेखा और अधिकतम जनसहभागिता सुनिश्चित करना रहा। यह मौन परिक्रमा कर्तव्य पथ से राष्ट्रपति भवन तक निकाली जाएगी, जिसके माध्यम से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचाया जाएगा।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित मौन परिक्रमा पूरी तरह अहिंसात्मक, अनुशासित और संविधान के दायरे में होगी। इसका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या सरकार का विरोध करना नहीं है, बल्कि वर्षों से उपेक्षित बुंदेलखंड क्षेत्र के अधिकार, सम्मान और भविष्य की मांग को गंभीरता से राष्ट्रीय मंच पर रखना है। बैठक के दौरान सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में आंदोलन को शांतिपूर्ण रखने का संकल्प लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए बूंदेलखंड राष्ट्र समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की पीड़ा अब केवल नारों और भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, “बुंदेलखंड की आवाज़ अब मौन के संकल्प के साथ राष्ट्र के सामने रखी जाएगी। यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि बुंदेलखंड के करोड़ों लोगों के हक, स्वाभिमान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए है।” उन्होंने कहा कि लंबे समय से बुंदेलखंड विकास, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मूलभूत मुद्दों से जूझ रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र को उसका संवैधानिक अधिकार मिले।
संगठन के महामंत्री यज्ञेश गुप्ता ने बैठक में संगठनात्मक अनुशासन पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि यह मौन परिक्रमा संगठन की एकता, संयम और परिपक्वता का प्रतीक होगी। “इस कार्यक्रम में न कोई नारा होगा, न भाषण और न ही किसी प्रकार का उग्र प्रदर्शन। केवल मौन, अनुशासन और संकल्प के साथ कार्यकर्ता राष्ट्रपति भवन तक परिक्रमा करेंगे,” उन्होंने कहा। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम की गंभीरता और नियमों की जानकारी देने का आह्वान किया।

मीडिया प्रभारी देव व्रत त्रिपाठी ‘देव’ ने कहा कि यह मौन परिक्रमा देश को एक स्पष्ट और मजबूत संदेश देगी कि बुंदेलखंड का संघर्ष शांतिपूर्ण है, लेकिन अपने लक्ष्य को लेकर पूरी तरह दृढ़ और अडिग है। उन्होंने कहा कि मौन कई बार शब्दों से अधिक प्रभावी होता है और यह कार्यक्रम उसी मौन की शक्ति को राष्ट्र के सामने प्रस्तुत करेगा। उन्होंने मीडिया प्रबंधन और सूचना प्रसार की रणनीति पर भी प्रकाश डाला, ताकि आंदोलन की भावना सही रूप में देश तक पहुंचे।
बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी भी साझा की गई। बताया गया कि 01 फरवरी 2026 को सुबह 9 बजे सभी प्रतिभागी नई दिल्ली के इंडिया गेट पर एकत्रित होंगे। वहां से सभी कार्यकर्ता कर्तव्य पथ के माध्यम से राष्ट्रपति भवन तक मौन परिक्रमा करेंगे। प्रतिभागियों के लिए सफेद वेश निर्धारित किया गया है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक होगा। इसके साथ ही सभी के मुंह पर सफेद पट्टी होगी, जो मौन के संकल्प को दर्शाएगी। कार्यकर्ता किसी प्रकार का नारा, तख्ती या भाषण नहीं देंगे, बल्कि केवल सादे सफेद कागज पर “पृथक बुंदेलखंड राज्य” लिखा हुआ संदेश लेकर शांतिपूर्वक चलेंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रत्येक जिले और नगर स्तर पर जिम्मेदार पदाधिकारियों को नामित किया जाएगा, जो अपने-अपने समूह की जिम्मेदारी संभालेंगे। साथ ही, प्रशासन और कानून व्यवस्था का पूर्ण सहयोग करने की बात भी दोहराई गई।
फतेहपुर बैठक में जिला अध्यक्ष ब्रजेश सोनी ने कहा कि फतेहपुर सहित पूरे बुंदेलखंड में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग स्वेच्छा से इस ऐतिहासिक मौन परिक्रमा में शामिल होना चाहते हैं। नगर अध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने कहा कि नगर स्तर पर संपर्क अभियान तेज कर दिया गया है और लोगों को कार्यक्रम के उद्देश्य और नियमों की जानकारी दी जा रही है।
बैठक में रज्जन विश्वकर्मा, राम प्रसाद विश्वकर्मा, शैलेंद्र तिवारी, महेंद्र सिंह चौहान, आशीष सिंह, अंकित सिंह सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने विचार रखते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने का भरोसा दिलाया। वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन बुंदेलखंड के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकता है, यदि इसे पूरी एकजुटता और अनुशासन के साथ आगे बढ़ाया जाए।
बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि 01 फरवरी 2026 की मौन परिक्रमा को ऐतिहासिक, शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के लोगों की वर्षों पुरानी पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों की अभिव्यक्ति है।
कुल मिलाकर फतेहपुर में हुई यह तैयारी बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि बूंदेलखंड राष्ट्र समिति अपने आंदोलन को एक नई, परिपक्व और संवैधानिक दिशा में ले जाना चाहती है। मौन परिक्रमा के माध्यम से पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को गरिमापूर्ण ढंग से देश के सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने की यह कोशिश आने वाले समय में आंदोलन को नई ऊर्जा देने वाली मानी जा रही है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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