State Congress President : जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी: पुलिस को नहीं मिल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जानें क्या है मामला  ?

State Congress President : जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी: पुलिस को नहीं मिल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जानें क्या है मामला

State Congress President : जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी: पुलिस को नहीं मिल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जानें क्या है मामला 
State Congress President : जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी: पुलिस को नहीं मिल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जानें क्या है मामला

ग्वालियर | कर्ण मिश्रा।
मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उनके खिलाफ 500 रुपये का जमानती वारंट जारी कर दिया है। यह कार्रवाई कोर्ट में लगातार पेश न होने के कारण की गई है। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को जीतू पटवारी की तलाश करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।

यह मामला लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर भिंड जिले के उमरी थाना क्षेत्र में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अब इस प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया के तहत सख्ती बढ़ाई जा रही है।

क्या है पूरा मामला

जानकारी के अनुसार, 4 मई 2024 को उमरी थाना पुलिस ने जीतू पटवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप है कि लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जीतू पटवारी ने एक सार्वजनिक बयान में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से साठगांठ करने का आरोप लगाया था।

इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी विवाद हुआ था। बसपा प्रत्याशी की ओर से इसे मानहानिकारक और चुनावी माहौल बिगाड़ने वाला बताया गया, जिसके बाद पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू की थी।

कोर्ट में पेश नहीं हुए पटवारी

मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट में चल रही है। बताया जा रहा है कि जीतू पटवारी को कोर्ट की ओर से कई बार पेश होने के लिए समन भेजे गए, लेकिन वे तय तारीखों पर न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इसी को आधार बनाकर कोर्ट ने अब उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है।

जमानती वारंट की राशि भले ही 500 रुपये रखी गई हो, लेकिन इसे न्यायिक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यदि आगे भी कोर्ट के आदेशों की अवहेलना होती है, तो मामला और गंभीर हो सकता है।

पुलिस को दिए गए निर्देश

कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित थाना पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे जीतू पटवारी को तलाश कर कोर्ट में पेश करें। पुलिस सूत्रों के अनुसार, वारंट की तामील के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है कि पटवारी को वारंट की जानकारी आधिकारिक रूप से कब और कैसे दी गई।

State Congress President : जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी: पुलिस को नहीं मिल रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, जानें क्या है मामला 
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राजनीतिक हलकों में हलचल

जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी होने की खबर सामने आते ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी के भीतर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। पार्टी समर्थकों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बयानबाजी से जुड़ा है और इसे जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है।

वहीं, भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने इसे कांग्रेस नेतृत्व की जिम्मेदारी और कानून के प्रति रवैये से जोड़कर देखा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रदेश अध्यक्ष जैसे बड़े पद पर बैठे नेता के खिलाफ कोर्ट द्वारा वारंट जारी होना राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

चुनावी बयान और कानूनी दायरा

लोकसभा चुनाव के दौरान नेताओं द्वारा दिए गए बयान अक्सर कानूनी दायरे में आ जाते हैं। चुनाव आयोग की आचार संहिता के तहत किसी भी प्रत्याशी या दल पर बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाना विवाद का कारण बन सकता है। इसी संदर्भ में जीतू पटवारी के बयान को भी देखा जा रहा है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए बयानों में संयम और तथ्यों का होना आवश्यक है। यदि किसी बयान से किसी व्यक्ति या दल की छवि को नुकसान पहुंचता है, तो वह आपराधिक या दीवानी मामले का रूप ले सकता है।

जीतू पटवारी का राजनीतिक कद

जीतू पटवारी मध्य प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे पूर्व मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। हाल ही में उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गई थी, जिसके बाद से वे लगातार प्रदेशभर में सक्रिय हैं।

ऐसे में उनके खिलाफ जारी हुआ जमानती वारंट न केवल कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मामला आने वाले समय में कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व पर भी असर डाल सकता है।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जीतू पटवारी कब कोर्ट में पेश होते हैं और इस मामले में उनका पक्ष क्या रहता है। यदि वे समय पर न्यायालय में उपस्थित होकर जमानत प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, तो मामला आगे नियमित सुनवाई की ओर बढ़ेगा।

हालांकि, यदि कोर्ट के आदेशों की अनदेखी जारी रहती है, तो न्यायालय और सख्त कदम उठा सकता है। ऐसे मामलों में गैर-जमानती वारंट जैसी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

निष्कर्ष

लोकसभा चुनाव 2024 से जुड़े इस प्रकरण में अब न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जीतू पटवारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया जाना यह दर्शाता है कि कानून सभी के लिए समान है, चाहे व्यक्ति किसी भी राजनीतिक पद पर क्यों न हो।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कानूनी रूप से किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका मध्य प्रदेश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीतिक और न्यायिक गतिविधियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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