Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई ?

Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई

Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई
Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई

नई दिल्ली – हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यह दावा किया गया कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बंद कर दी है। यह बयान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, ताज़ा व्यापारिक आंकड़े इस दावे की पूरी तरह पुष्टि नहीं करते। वास्तविकता यह है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं की है, बल्कि उसमें उल्लेखनीय कमी जरूर आई है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

हालिया व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी महीने में भारत का रूस से कुल आयात 40.48% घटकर 2.86 अरब डॉलर रह गया, जबकि जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 4.81 अरब डॉलर था। इस गिरावट का मुख्य कारण भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूसी कच्चे तेल की खरीद में कटौती करना बताया जा रहा है।

इससे साफ है कि खरीद में कमी आई है, लेकिन “पूरी तरह बंद” होने का दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। भारत अभी भी रूस से तेल आयात कर रहा है, हालांकि मात्रा पहले की तुलना में कम है।

पृष्ठभूमि: भारत-रूस ऊर्जा संबंध

यूक्रेन युद्ध के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस पर प्रतिबंध लगाए, तब रूस ने अपने कच्चे तेल पर भारी छूट देना शुरू किया। इसका लाभ भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को मिला। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, ने इस अवसर का उपयोग करते हुए रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता तेल खरीदा।

कुछ समय के लिए रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। इससे भारत को अपने आयात बिल में राहत मिली और रिफाइनरियों को सस्ता कच्चा माल मिला।

अब क्यों घटी खरीद?

रूसी तेल की खरीद में कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:

  1. भुगतान और शिपिंग संबंधी दिक्कतें: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण भुगतान तंत्र और बीमा में जटिलताएं बढ़ी हैं।

  2. डिस्काउंट में कमी: पहले रूस जो भारी छूट दे रहा था, उसमें धीरे-धीरे कमी आई है।

  3. आपूर्ति में विविधता: भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता बनाए रखना चाहता है, ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।

  4. वैश्विक दबाव: पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका की ओर से अप्रत्यक्ष दबाव की भी चर्चा होती रही है।

इन सभी कारणों के चलते भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से आयात घटाया, लेकिन इसे पूरी तरह बंद नहीं किया।

Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई
Statistics revealed the truth : क्या सच में भारत ने रूसी तेल छोड़ा? आंकड़ों ने खोली सच्चाई

अमेरिकी दावे और वास्तविकता

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा बार-बार यह दावा किया गया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। संभव है कि यह बयान कूटनीतिक संदर्भ में दिया गया हो या आंशिक आंकड़ों के आधार पर हो।

लेकिन आधिकारिक व्यापार आंकड़े बताते हैं कि भारत अब भी रूस से तेल आयात कर रहा है। अंतर केवल इतना है कि मात्रा पहले की तुलना में कम हो गई है।

भारत का आधिकारिक रुख

भारत का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए “राष्ट्रीय हित” को प्राथमिकता देगा। भारत ने कई बार कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेगा।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी एक देश के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ऊर्जा सुरक्षा का सवाल

भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। तेल की कीमतों में हलचल का सीधा असर महंगाई, परिवहन और औद्योगिक लागत पर पड़ता है।

रूस से सस्ता तेल खरीदने से भारत को लाभ मिला, लेकिन साथ ही उसने मध्य पूर्व, अमेरिका और अन्य देशों से भी आयात जारी रखा। इससे भारत ने संतुलन बनाए रखने की कोशिश की।

आगे क्या हो सकता है?

भविष्य में भारत की रूसी तेल खरीद कई कारकों पर निर्भर करेगी:

  • वैश्विक तेल कीमतें

  • रूस द्वारा दी जाने वाली छूट

  • अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की स्थिति

  • भारत की आंतरिक मांग

यदि रूस फिर से आकर्षक कीमतें देता है, तो भारत खरीद बढ़ा सकता है। वहीं यदि प्रतिबंध कड़े होते हैं या वैकल्पिक स्रोत सस्ते मिलते हैं, तो आयात और घट सकता है।

निष्कर्ष

तो क्या भारत ने सच में रूसी तेल छोड़ दिया?
आंकड़ों के आधार पर जवाब है – नहीं।

भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पूरी तरह बंद नहीं की है, बल्कि उसमें लगभग 40% की कमी आई है। अमेरिकी दावों के विपरीत, व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि रूस अब भी भारत के महत्वपूर्ण तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा व्यापार के बीच गहरा संबंध है। भारत ने संतुलन की नीति अपनाते हुए अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी है और आगे भी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेता रहेगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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