The City of Nawabs : साहित्यिक उत्सव: नवाबी शहर की फिज़ाओं में घुलेगी किताबों की महक, रवीन्द्रालय में आज से सजेगा ‘ज्ञान का महाकुंभ’

“किताबें मूक होती हैं पर वे ही दुनिया का सबसे मुखर शोर पैदा करती हैं; जो समाज पढ़ना जानता है, वही इतिहास गढ़ना जानता है।”
लखनऊ, 12 मार्च : उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी लखनऊ की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर शब्दों के उत्सव के लिए सज-धज कर तैयार है। चारबाग स्थित रवीन्द्रालय के प्रांगण में कल, 13 मार्च से 10 दिवसीय ‘लखनऊ पुस्तक मेला’ का भव्य शंखनाद होने जा रहा है। शाम पांच बजे होने वाले गरिमामयी उद्घाटन के साथ ही यह परिसर अगले दस दिनों के लिए साहित्य प्रेमियों, चिंतकों और सृजनकारों की कर्मस्थली बन जाएगा।
# विकसित भारत की संकल्पना और सांस्कृतिक विविधता
इस वर्ष मेले की थीम ‘विजन-2047’ को समर्पित करते हुए ‘विकसित भारत, विकसित प्रदेश’ रखी गई है। यह थीम न केवल राष्ट्रीय आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, बल्कि यह उस बौद्धिक नींव को भी रेखांकित करती है, जिस पर आधुनिक भारत की इमारत खड़ी होनी है।
पुस्तक मेले के आयोजक मनोज सिंह चंदेल के अनुसार, यह आयोजन केवल क्रय-विक्रय का केंद्र नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक मंच होगा। यहाँ पुस्तकों के विमोचन के साथ-साथ काव्य समारोहों की रसधार बहेगी। आध्यात्मिक विमर्श, नाट्य मंचन और शास्त्रीय व लोक नृत्यों का संगम इस मेले को एक संपूर्ण सांस्कृतिक उत्सव का रूप प्रदान करेगा।

# तकनीक और परंपरा का अनूठा मेल
यूपी मेट्रो रेल के सहयोग से आयोजित इस मेले में लगभग 60 स्टॉल लगाए गए हैं। इस बार का आकर्षण पुरानी जिल्दों और नई तकनीक का समन्वय है। पाठकों को यहाँ जहाँ एक ओर नई ‘प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी’ से छपी दुर्लभ पुस्तकें मिलेंगी, वहीं डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े आधुनिक प्रकाशन उत्पाद भी देखने को मिलेंगे। शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सामग्री के स्टॉल भी यहाँ आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
# अवधी व्यंजन और कलात्मक अभिव्यक्तियाँ
लखनऊ की संस्कृति ‘ज़ायके’ के बिना अधूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मेले के परिसर में ‘अवधी व्यंजन उत्सव’ का भी आयोजन किया जा रहा है, जहाँ आगंतुक किताबों के साथ-साथ नवाबी खानपान का आनंद ले सकेंगे। इसके अतिरिक्त, ‘वंदेमातरम’ के 150 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में चित्रकारों द्वारा विशेष चित्र प्रदर्शनी और लाइव पेंटिंग का आयोजन भी किया जाएगा, जो देशभक्ति और कला का अनूठा संयोजन होगा।
# विशेष विवरण:
* दिनांक: 13 मार्च से 22 मार्च तक।
* समय: प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक।
* प्रवेश: समस्त पाठकों और नागरिकों के लिए निःशुल्क।
* स्थान: रवीन्द्रालय लॉन, चारबाग (लखनऊ)।
यह पुस्तक मेला लखनऊ की उस साझा संस्कृति और विरासत का उत्सव है, जहाँ कलम की धार को तलवार से अधिक शक्तिशाली माना जाता रहा है। विजन-2047 की ओर बढ़ते भारत के लिए यह आयोजन बौद्धिक चेतना जगाने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगा।
“स्क्रीन के इस दौर में पन्नों को पलटना एक साधना है; आइए, रवीन्द्रालय की गलियों में अपनी रूह के लिए एक नई कहानी ढूंढें।”
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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