The danger has increased : फतेहपुर में मोरम घाट चालू होते ही ओवरलोडिंग का खेल तेज, सड़क सुरक्षा पर खतरा बढ़ा

फतेहपुर जनपद के असोथर थाना क्षेत्र में स्थित बांदा मार्का मोरम घाटों के चालू होते ही अवैध ओवरलोडिंग का खेल तेजी से शुरू हो गया है। खंड संख्या 03 और 04 के घाटों से दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही जारी है, जिससे न केवल नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है बल्कि आम लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इन घाटों से ट्रैक्टर, डंपर और ट्रकों में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक मौरंग (मोरम) भरकर ले जाया जा रहा है। यह ओवरलोड वाहन तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। कई बार तो ये वाहन इतनी तेज गति से गुजरते हैं कि सामने आने वाले छोटे वाहन चालकों को संभलने का मौका तक नहीं मिलता।
ओवरलोडिंग का सबसे बड़ा असर क्षेत्र की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। हाल ही में बनी कई सड़कें इन भारी वाहनों के दबाव को सहन नहीं कर पा रही हैं और जल्दी खराब हो रही हैं। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, जिससे आम लोगों का चलना-फिरना मुश्किल हो गया है।
इसके अलावा, ओवरलोड वाहनों से गिरती मौरंग और टपकता पानी भी सड़क हादसों का बड़ा कारण बन रहा है। चलते वाहनों से मौरंग गिरकर सड़क पर फैल जाती है, जिससे फिसलन बढ़ जाती है और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा और अधिक बढ़ जाता है। कई स्थानों पर इस कारण छोटे-मोटे हादसे भी हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन वाहनों के ड्राइवर आपस में मोबाइल फोन के जरिए जुड़े रहते हैं। जैसे ही उन्हें प्रशासन या पुलिस की गतिविधियों की जानकारी मिलती है, वे तुरंत अपनी रणनीति बदल लेते हैं। कई बार यह वाहन तेज गति से भागते हैं और जैसे ही अधिकारियों की लोकेशन मिलती है, वे गलियों या सुनसान रास्तों में छिप जाते हैं।
बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क में “लोकेटर” नाम के लोग भी सक्रिय हैं, जो प्रशासन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं और ड्राइवरों को समय-समय पर सूचना देते रहते हैं। इनके जरिए ओवरलोड वाहन आसानी से चेकिंग से बचकर निकल जाते हैं।
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन फतेहपुर और स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में ओवरलोड वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे यह संदेह पैदा होता है कि कहीं न कहीं प्रशासन की अनदेखी या लापरवाही इस समस्या को बढ़ावा दे रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस मुद्दे को उठाया है, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। लोगों में यह भी चर्चा है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो भविष्य में बड़े हादसे हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरलोडिंग न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाता है। सड़कों के निर्माण पर खर्च किया गया पैसा कुछ ही समय में बेकार हो जाता है, जिससे सरकारी संसाधनों की भी हानि होती है।
इस स्थिति को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मोरम घाटों पर सख्त निगरानी रखी जाए और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा चेकिंग व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा दोषियों पर कड़ी सजा देने की भी मांग की जा रही है।
लोगों का यह भी कहना है कि यदि इस अवैध गतिविधि में शामिल माफियाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और बढ़ेगी। साथ ही प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते रहेंगे।
कुल मिलाकर, बांदा मार्का मोरम घाटों के चालू होते ही जिस तरह से ओवरलोडिंग का खेल शुरू हुआ है, वह चिंता का विषय है। यह न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में माफियाओं पर कार्रवाई होती है या यह सिलसिला यूं ही चलता रहता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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